सीपीएम ने हल कर लिया अपना पुराना अंतर्विरोध, बंगाल में कांग्रेस के साथ केरल में रहेगी खिलाफ

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कांग्रेस को लेकर अपनी स्थिति साफ़ कर दी है। बीते 30-31 अक्तूबर को सीपीएम की केन्द्रीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस व अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ मिलकर तृणमूल और बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ेगी। इसकी जानकारी देते हुए पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि बंगाल की तरह तमिलनाडु, केरल और असम में भी धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ गठबंधन किया जाएगा। किन्तु केरल में कांग्रेस के साथ कोई चुनावी समझौता नहीं होगा। 

येचुरी ने कहा, ‘केरल में हम एलडीएफ का हिस्सा रहते हुए चुनाव लड़ना जारी रखेंगे। माकपा तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा होगी। असम में हम कांग्रेस समेत सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ सहयोग करते हुए चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि माकपा और वाम दल पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस समेत सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ चुनावी तालमेल के साथ उतरेंगे ताकि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस को पराजित किया जा सके।

सीपीएम महासचिव ने एक वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से केन्द्रीय समिति की बैठक में लिए गये निर्णयों की विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की आलोचन करते हुए कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण करोड़ों लोगों पर दोहरी मार पड़ी है। कोरोना के साथ ही आर्थिक हालात भी बिगड़ गए हैं। मार्च से ही सीपीएम लोगों के खाते में नगद पैसे डालने और मुफ्त भोजन दिए जाने की मांग करती रही है। 

येचुरी ने कहा कि लॉकडाउन के पहले दिन से ही केंद्र सरकार से हम मांग करते रहे हैं कि आयकर के बाहर आने वाले सभी लोगों के खाते में 7,500 रुपए और उनके परिवार के हर सदस्य के लिए 10 किलो अनाज दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने हमारी यह मांग आज तक नहीं मानी है। हमारी यह मांग आज भी जारी है। 

उन्होंने आगे कहा कि जहां तक कोरोना वैक्सीन का सवाल है और हम उम्मीद करते हैं कि यह जल्द ही उपलब्ध होगा, और हम चाहते हैं कि यह वैक्सीन देश में सभी को मुफ्त में मिलना चाहिए; और आज़ादी के बाद से भारत में यही होता रहा है। यह स्माल पॉक्स (चेचक) के समय और बाद में पोलियो ड्राप के समय में सभी को मुफ्त दवा ही नहीं दी गयी बल्कि केंद्र सरकार ने सभी को यह दवा लेने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया था। किन्तु इस सरकार ने हैरतअंगेज तरीके से कोरोना वैक्सीन को राज्यों के जिम्मे छोड़ दिया कि उन्हें यह किस तरह देना है लोगों को। मुफ्त में या फिर पैसे लेकर। यह अस्वीकार्य है। यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी के लिए दवा मुफ्त में उपलब्ध कराए। और सरकार अपनी इस जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती। 

इस वीडियो कांफ्रेंस में सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार द्वारा अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य गुट बनाने और उनके साथ साझा नौ सैनिक अभ्यास की आलोचना करते हुए कहा कि भारत हमेशा से सैन्य और कूटनीतिक मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेता रहा है। यही देश की विशेष नीति भी रही है। 

इन तमाम मुद्दों के अलावा सीताराम येचुरी ने देश की अर्थव्यवस्था, भुखमरी इंडेक्स में भारत की स्थिति पर पार्टी की चिंताओं को साफ़ करते हुए कहा कि इस केंद्र सरकार के काल में बीते पांच सालों से लगातार देश की जीडीपी में गिरावट जारी है। उन्होंने विश्व बैंक और आईएमएफ के हवाले से कहा कि भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था और नीचे जाने वाली है। 

येचुरी ने कहा कि देश के गोदामों में लाखों टन अनाज बर्बाद हो जाता है कि वह गरीबों को नहीं मिलता। 

(पत्रकार और कवि नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

This post was last modified on November 1, 2020 6:22 pm

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