Thu. Jun 4th, 2020

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में लॉक़डाउन बन गया है ग़रीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर हमले का लाइसेंस

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माले विधायक सुदामा अस्पताल में ग्रामीणों से मिलते हुए।

पटना। कोरोना और उसकी रोकथाम के लिए लागू लाॅक डाउन से आज पूरा देश तबाह है। लेकिन अचानक हुए लाॅक डाउन ने सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों और गरीबों के जीवन को प्रभावित किया है। हम सबने दिल्ली, सूरत, मुंबई आदि जगहों से पैदल लौट रहे प्रवासियों की भयानक पीड़ा को देखा और समझा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अपने राज्य बिहार में तकरीबन 2 लाख प्रवासी लौटकर आए हैं। लौट रहे प्रवासी मजदूरों के प्रति बिहार सरकार और प्रशासन का रवैया बेहद संवेदनहीन रहा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो यहां तक कह दिया था कि इन मजदूरों को बिहार की सीमा के अंदर घुसने नहीं दिया जाएगा। प्रवासियों की बड़ी संख्या को बिहार बाॅर्डर पर ही रोक दिया गया। कुछ इलाकों में भाकपा-माले की पहलकदमी पर उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। मजदूरों के लिए की गई व्यवस्थाएं बेहद अपर्याप्त हैं। वे बेहद नारकीय स्थिति में जीने को अभिशप्त हैं। जांच की तो बात ही रहने दीजिए, उनके सामने भोजन की गंभीर समस्या उठ खड़ी हुई है। भोजन की समस्या तो एक बड़ी आबादी झेल रही है। खासकर, दिहाड़ी मजदूरों, खेत मजदूरों, किसानों और निम्न मध्यमवर्गीय तबके के सामने यह समस्या मुंह बाये खड़ी है, लेकिन सरकार अपने रूटीन वर्क के अनुसार ही काम कर रही है।

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ऐसी विकट परिस्थिति में सरकार को कम से कम अन्य राजनीतिक पार्टियों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों के साथ कोई कोआर्डिनेशन कायम करके सुसंगत हल निकालना चाहिए था, लेकिन सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं दिखती। अब तक के अनुभव यही बतला रहे हैं कि लाॅक डाउन को बहाना बनाकर सरकार सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को खत्म कर अपनी तानाशाही चला रही है। प्रशासन की निरंकुशता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। गरीबों पर दमन व अत्याचार ढाये जा रहे हैं।

पिटाई में घायल शिवरतन माँझी।

लाॅकडाउन की वजह से कटनी करने से इंकार करने पर मजदूरों पर संगठित हमले किए जा रहे हैं। प्रवासी मजदूरों को समाज की दबंग शक्तियों द्वारा सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ रहा है। और इसे लाॅक डाउन के नाम पर सही ठहराने का खतरनाक खेल जारी है। समाज की सामंती-सांप्रदायिक ताकतें इस दौर में एक तरफ फिर से गरीबों पर हमलावर हुई हैं, तो दिल्ली की मरकज घटना की आड़ में जगह-जगह अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ घृणित स्तर का प्रचार चलाये जाने की भी सूचनायें मिल रही हैं। 

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सामूहिकता की भावना का निर्माण पहला हथियार होती, लेकिन उसके उलट वह गरीबों-दलितों व अल्पसंख्यकों पर हमले व नफरत की राजनीति को बढ़ावा देने का जरिया बन रहा है। कोरोना महामारी के संदर्भ में आरंभ से ही सोशल डिस्टेंसिंग की एक गलत व्याख्या हो रही है। सरकारी विज्ञापनों में भी इसे प्रमुखता से जगह मिल रही है। इस मामले में सोशल डिस्टेंसिंग की बजाए शारीरिक डिस्टेंटिंग की आवश्यकता है।

भारत जैसे देश मे जहां सदियों से कुछ खास जाति समुदाय के प्रति बेहद क्रूर किस्म की सोशल डिस्टेंसिंग अब तक बनाए रखी गई है, कोरोना रोकने के नाम पर इसे खूब प्रचारित-प्रसारित किया जा रहा है। और गरीबों-दलितों-अल्पससंख्यकों के प्रति नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। यह सोशल डिस्टेंसिंग मनुवादी व्यवस्था को जस्टिफाई करने का हथियार बनता जा रहा है। लाॅक डाउन के नाम पर तमाम लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करके तानाशाही स्थापित करने की कोशिशें की जा रही हैं।

दमन, हमला, सामाजिक बहिष्कार व कुप्रचार

पटना। दलित मजदूर निशाने पर 

लाॅकडाउन के दौरान राजधानी पटना के विभिन्न प्रखंडों में भाजपा-जदयू संपोषित गुंडों और पुलिसिया साठ-गांठ के जरिए कोरोना वायरस, लॉक डाउन व शराबबंदी के नाम पर मसौढ़ी, धनरूआ, पुनपुन, विक्रम, पालीगंज आदि इलाकों की मुसहर टोलियों में छापेमारी, तोड़फोड़, मारपीट, लूट व हत्या की खबरें मिल रही हैं। भाकपा-माले जांच टीम ने इन घटनाओं की जांच-पड़ताल की है।

1.धनरूआ में नंदपुरा व सदीशोपुर मुसहरटोली:  

नंदपुरा और सदीशोपुर मुसहरी ( धनरूआ) में कई दिन पहले से पुलिस-प्रशासन का छापा मारने का अभियान चल रहा था। 27 मार्च को भाजपा-जदयू समर्थित सामंती-अपराधी और पुलिस एक साथ गांव में घुसे और घुसते ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को निर्ममता से पीटना शुरू कर दिया। घरों में रखी सामग्री को तहस-नहस कर दिया गया। कपड़े और अन्य सामान फेंक दिए गए। बर्तनों को तोड़कर बर्बाद कर दिया गया। टेलीविजन भी चकनाचूर कर दिया गया। पीने का चापा कल तक तोड़ दिया गया।

गरीबों ने अपनी बेटियों की शादी के लिए जो थोड़ा बहुत पैसा बचा कर रखा था, उसे लूट लिया गया। और यह कार्रवाई अनुमंडल स्तर के डीएसपी के नेतृत्व में संचालित किया गया। डीएसपी के साथ जदयू के प्रखंड अध्यक्ष वेद प्रकाश और भोला सिंह भी शामिल थे। हमले में 50 वर्षीय बीमार बोथा मांझी की बेदर्दी से पिटाई के कारण 2 अप्रैल को मौत हो गई। भाकपा-माले ने इसकी लिखित सूचना अनुमंडलाधिकारी को दी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

2. तिनेरी: 

मसौढ़ी प्रखंड के तिनेरी मुसहर टोली में भी पुलिस बल ने इसी प्रकार हमला किया। 27 मार्च को 2 बजे दिन में पुलिस भारी बल के साथ पहुंची। भाजपा-आरएसएस से जुड़े गांव के ही नरेंद्र सिंह और अन्य 15 लोग भी पुलिस बल के साथ थे। डीएसपी के नेतृत्व में शराब के नाम पर छापे मारी की गई लेकिन किसी भी घर से शराब बरामद नहीं हुई। उसके बाद पुलिस अन्य मुसहर टोलियों की तरह ही यहां भी आतंक मचा देती है। 28 मार्च को पुलिस फिर आती है और रोहित कुमार, पिता – नागेन्द्र मांझी की बेवजह पिटाई करती है।

घायलों से हाल चाल पूछते माले विधायक सुदामा।

जान मारने की धमकी देती है। पुलिस उसे पीट-पीट कर अधमरा कर देती है। लाॅक डाउन की वजह से उनका सही समय पर इलाज नहीं हो पाया और पीएमसीएच पहुंचने के पहले ही उनकी मौत हो गई। सामंती अपराधी नरेन्द्र सिंह द्वारा दाह संस्कार को भी रोकने की कोशिश की जाती है, जिसे जनता ने नाकाम बना दिया।

29 मार्च को फिर से पुलिस तिनेरी मुसहरी में पहुंची। नरेंद्र सिंह, परवीन सिंह, राहुल सिंह, शैलेश सिंह सहित एक दर्जन भर भूमिहार जाति से संबंध रखने वाले सामंती अपराधी अपने हाथ में नंगी तलवारें, लाठी-भाला-गड़ाशा लिए पुलिस बल के साथ गांव मे आ धमकते हैं। 15 वर्षीय महादलित महिला सरस्वती कुमारी, पिता टेंपो मांझी को घसीटते हुए बलात्कार की नियत से राहुल सिंह बधार में गाली-गलौज करते हुए ले जाता है। यह कहता है कि उन लोगों का मन बढ़ गया है, और वह उसकी इज्जत उतार देगा।

इसका ग्रामीणों द्वारा ज़बरदस्त विरोध किया गया। इससे बौखलाए अपराधियों ने दरवाजा तोड़कर ग्रामीणों पर लोहे के रॉड से हमला बोल दिया। 60 वर्षीय शिवरतन मांझी के दरवाजे को तोड़कर घर में बेटी की शादी के लिए रखे गहने को लूट लिया और तलवार से हमला कर उनकी जांघ पर वार किया। वे बुरी तरह घायल हो गए। उसी प्रकार, अरुण साहू का दरवाजा तोड़कर उनके परिवार के सारे सदस्यों की बुरी तरह से पिटाई की गई और घर में रखे जेवरात लूट लिए गए। नंदू मांझी (6) पिता टैंपू मांझी को गुंडों ने विरोध करने पर बेरहमी से पीटा।

3. चिचौड़ा: 

विक्रम प्रखंड के चिचौड़ा गांव में भाजपाई सामंती-अपराधियों और पालीगंज अनुमंडल पुलिस प्रशासन के गठजोड़ द्वारा शराब खोजने के नाम पर महिला-पुरुष व नौजवानों की बेरहमी से पिटाई की गई। घर में रखे टीवी व अन्य सामान तोड़ दिए गए। दाल -चावल मिट्टी में मिला दिया गया। विरोध करने पर गांव छुड़वा देने की धमकी भी दी गई। इन सभी कार्रवाइयों को पालीगंज के डीएसपी के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।

भाजपा के सामंती अपराधी पुटू सिंह-पिता मिथिला सिंह, वीरेंद्र सिंह – पिता गुड्डू सिंह, टूटू सिंह – पिता मनोज सिंह,  हरिराम सिंह – पिता अनुज सिंह, अमरनाथ सिंह – पिता सुरेश सिंह, राज कमल सिंह – पिता रुदल सिंह, सुधीर सिंह – पिता शिव कुमार सिंह सहित 15 की संख्या में लोग लाठी-भाला-गडांसा लिए पुलिस बल के साथ गांव में घुसे थे। इन लोगों ने जाते-जाते गरीबों को धमकी दी कि हमारी ही जमीन पर बसे हुए हो और हमें ही आंख दिखाते हो। एक सप्ताह में गांव छोड़ दो नहीं तो तुम सब लोगों को कोरोना बीमारी के नाम पर जिंदा जलाकर मार देंगे।

4. उरान टोली:

फुलवारी के ढिवरा पंचायत के पलंगा के उरान टोला में परसा पुलिस द्वारा पिटाई की घटना की भाकपा-माले ने जांच की। जांच टीम को ग्रामीणों ने बताया कि विगत 4 अप्रैल को वे लोग अपने घरों के बाहर दरवाजे पर बैठे हुए थे। उसी वक्त पुलिस पहुंची और कहा कि घर के अंदर जाओ। हम सभी लोग घर के अन्दर चले गये। पुलिस ने फिर घर से बाहर बुलाया और पैसा मांगने लगी।

हम लोगों ने कहा कि हम तो खुद कई दिन से भूखे हैं, पैसा कहां से लाएं। इस पर पुलिस बौखला गई और हमें पीटने लगी। दरअसल, शराबबंदी के नाम पर पुलिस को जब भी मौका मिलता है, वह ग्रामीणों की पिटाई कर देती है। लाॅक डाउन के दौर में तो ऐसा लगता है कि गरीब ही कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेवार हैं, और उन्हें बार-बार पीट दिया जा रहा है। 

5. जरखा: 

भाजपाई पूरे राज्य में कोरोना के नाम पर सांप्रदायिक उन्माद बनाए रखने के फिराक में रहते हैं। पालीगंज के जरखा गांव में दबंगों ने विगत 4 अप्रैल को भाकपा-माले की प्रखंड कमेटी के सदस्य राजेश कुमार को पहले फोन पर धमकी दी और फिर लगभग 20-25 की संख्या में अपराधी उनके घर पर चढ़ गए। घर पर चढ़कर उन लोगों ने काफी गाली गलौज की और फिर रात 8 बजे एक बार फिर उनके घर पर आ धमके।

अपराधियों ने उनके घर पर पथराव के साथ-साथ फायरिंग भी की। यह सब केवल इस कारण हुआ कि राजेश कुमार लगातार भाजपाइयों के मंसूबे का भंडाफोड़ करते रहते हैं और गांव में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के पैरोकार हैं। वही हमलावर गांव के गरीबों के घरों पर ढेला फेंके थे तथा शिव मंदिर पर मुस्लिम विरोधी पोस्टर चिपकाए थे। जिसका विरोध राजेश कुमार ने किया था।

6. रामपुर निगवां: 

रामपुर निगवां में लाॅकडाउन के उपरांत रमानी (कहार) जाति के 3 मजदूर दिल्ली से लौटकर अपने गांव पहुंचे। भाजपा-संघ के लोगों ने इन्हें गांव से फौरन निकालने के सवाल पर स्थानीय प्रशासन पर दबाव बनाया। प्रशासन ने तीनों युवकों से लंबी बातें की। बातचीत के दौरान पता चला कि बक्सर के पास इन तीनों की जांच हुई थी।

शिवमंदिर में लगी चेतावनी।

प्रशासन ने यह कहते हुए तीनों युवकों को गांव में ही रहने की सलाह दी कि ये लोग स्वस्थ दिख रहे हैं, इसलिए गांव में ही रहें। लेकिन भाजपाइयों को यह रास नहीं आया और उन्होंने उनके घरों पर एक नहीं बल्कि तीन-तीन बार हमला किया। दो बार तो हमलावर असफल हुए, लेकिन तीसरी बार उन लोगों ने खेत में फसल कटाई करते वक्त उन्हें बुरी तरह पीट दिया।

7. बिहटा:  

उसी प्रकार, इसी जिले के बिहटा प्रखंड में भी गांव के दबंगों ने भाकपा-माले की जिला कमेटी के सदस्य गोपाल सिंह के खिलाफ गांव में प्रवेश करने पर रोक लगा दी। दरअसल, प्रवासी मजदूरों व लाॅक डाउन की मार झेलते गरीबों का हाल लेने गोपाल सिंह अपने इलाके के कई गरीब-दलित बस्तियों का दौरा करने गए थे। जब वे दौरा करके गांव में पहुंचे, तब सामंत दबंगों ने यह कहते हुए कि गरीब-हरिजन ही कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेवार हैं और ये वहीं से घूम कर आए हैं, इसलिए इन्हें गांव में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। 

8. दनियावां: 

दनियावां प्रखंड के शाहजहांपुर क्षेत्र के छोटी केवई गांव में लाॅक डाउन के दौरान खेत में कटनी से मना करने पर दबंगों ने महा दलित परिवार के मजदूर हरदयाल मांझी-उम्र 40 वर्ष, की जमकर पिटाई कर दी और उनका हाथ तोड़ दिया।

भोजपुर: दलितों पर हमला और अल्पसंख्यकों के खिलाफ कुप्रचार

  1. सारा मुसहर टोली पर हमला: 

भोजपुर जिले के तरारी प्रखंड में दबंग अपराधियों ने पूरी मुसहर टोली पर हमला बोल दिया, जिसमें कम से कम 6 लोग घायल हो गए। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार विगत 5 अप्रैल की रात लगभग 9 बजे तीन-चार की संख्या में दबंग अपराधियों ने कृष्णा मुसहर के घर पर हमला किया था। बलात्कार करने की नीयत से घर में घुस आए अपराधियों का जब घर की महिलाओं ने विरोध किया, तब उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में 6 लोग घायल हो गये।

तरारी प्रखंड में पड़ने वाले इस गांव में मुसहर समुदाय के लोगों पर गोली चलने की घटना की जानकारी के बाद तरारी से भाकपा-माले विधायक सुदामा प्रसाद और तरारी के प्रखंड सचिव रमेश सिंह ने गांव का दौरा किया। 

घायल लोगों की सूची

1. कृष्णा मुसहर – उम्र 26 साल – 7 जगह छर्रा

2. रामनाथ मुसहर – उम्र 50 साल – 6 जगह छर्रा

3. अजय मुहसर –  उम्र 25 साल – 2 जगह छर्रा

4. वीडियो मुसहर – उम्र 22 साल – 2 छर्रा

5. भीखन मुसहर –  उम्र 15 साल

6. अनुशी कुमारी – बेटी अजय मुसहर – 6 महीना – हाथ में छर्रा लगा है।

वीडियो मुसहर को छोड़कर सभी को रात्रि में ही आरा सदर अस्पताल लाया गया था। घायलों से मिलने आरा सदर में भाकपा-माले के तरारी विधायक सुदामा प्रसाद, भाकपा-माले नगर सचिव दिलराज प्रीतम, मेडिकल प्रभारी दीनानाथ सिंह पहुंचे और घटना की संपूर्ण जानकारी ली। घटना की विस्तृत जानकारी उसी समय जिलाधिकारी को भी दी गई। पार्टी की पहलकदमी पर मुआवजा राशि में से सभी लोगों को एक-एक लाख का चेक जारी किया गया। माले विधायक ने स्पीडी ट्रायल चलाकर सभी अपराधियों को गिरफ्तार कर दंडित करने, सभी के समुचित इलाज की व्यवस्था करने, लाॅकडाउन के दौर में खाने-पीने की हो रही दिक्कतों के मद्दे नजर सभी पीड़ित परिवारों को बेहतर खाने का प्रबंध करने एवं सभी मुसहर टोली में राशन का प्रबंध करने की मांग की है।

रामपुर निगवां के मज़दूर।

अजय मुसहर के अनुसार वे लोग जबरदस्ती सुअर-मुर्गी पकड़कर ले जाना चाहते थे, जिसका महिलाओं ने विरोध किया था। इस घटना के कुछ समय बाद ही वे लोग घर में जबरदस्ती घुस आए थे और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने लगे। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने रवि यादव व शिव लगन सिंह को गिरफ्तार किया है, लेकिन अभी बाकी लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

2. कोरोना के नाम पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ कुप्रचार: 

इस हमले के अलावा भोजपुर जिले में कई जगहों पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को कोरोना से जोड़कर उनके खिलाफ दुष्प्रचार चलाने की रिपोर्ट मिली है। आरा टाउन प्रखंड के धरहरा गांव के 30 वर्षीय एक मुस्लिम युवक को दमा की शिकायत बढ़ने पर आरा सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डाॅक्टर ने वहां उसे सुई लगाई, लेकिन ठीक होने की बजाए उसकी मौत हो गई। जिससे परिवार वाले आक्रोशित हो उठे। डाॅक्टर ने अपने बचाव में पुलिस बल का बुला लिया और कहा कि उस लड़के की मौत कोरोना से हुई है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट कोरोना निगेटिव आया।

तब तक पूरे इलाके में यह फैल गया कि मुस्लिम लोग कोरोना फैला रहे हैं। उसी प्रकार पकड़ी में नवादा की एक महिला अपने बच्चे के साथ रिश्तेदारी में जा रही थी। कुछ बदमाशों ने कोरोना की अफवाह उड़ा दी। जिसके कारण मां व बच्चे को पूछताछ के लिए पुलिस पकड़कर थाने ले गई। एक अन्य घटना में सहार प्रखंड के बगल के गांव पेरहाप में 3-4 मुस्लिम लड़के टेंट-शामियाना लगाने गए थे। वहां गांव में अफवाह उड़ा दी गई कि यही लोग कोरोना फैलाते हैं, इन्हें गांव से बाहर कर दिया जाए। मतलब, संघी ताकतें ऐसा माहौल बना रही हैं कि कोरोना मुस्लिम समुदाय के ही लोग फैला रहे हैं और इस तरह नए सिरे से उनके खिलाफ नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।

जहानाबाद –

1.दयाली बिगहा बर्बर पुलिस दमन: 

जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के दयाली बिगहा गांव में लाॅक डाउन के बाद 40 मजदूर दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल से अपने गांव लौट आए। इन लोगों ने जांच-वगैरह सब करवा लिया। उसके बाद 6 मजदूर और लौटे, जो किसी कारण कोरोना से संबंधित जांच नहीं करवा पाए। 30 मार्च को अंचलाधिकारी पुलिस बल के साथ गांव में पहुंच गए और उन 6 मजदूरों के साथ बेहद उदंडता से पेश आए। उनके इस व्यवहार से गांव का माहौल बिगड़ गया और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच तनातनी की स्थिति बन गई।

तनातनी की स्थिति बनने के कुछ देर बाद ही अंचलाधिकारी लौट गए। लेकिन कुछ समय पश्चात ही जिलाधिकारी व एसपी के नेतृत्व में एक बड़ा पुलिस दल गांव में आ धमका और गांव पहुंचते ही बिना किसी बातचीत के ग्रामीणों की अंधाधुंध पिटाई शुरू कर दी। करीब 150 घरों की बस्ती में घरों में घुसकर व छत पर चढ़कर लोगों को पीटा गया। चापाकल के हैंडल तोड़ दिए गए। इसके कारण पूरे गांव में भगदड़ की स्थिति बन गई। इसका विरोध करने पर भाकपा-माले नेता योगेन्द्र यादव सहित अन्य तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया।

2.किसानों की पिटाई: 

इसी जिले के हुलासगंज प्रखंड के सूरदासपुर गांव में पुलिस ने कटनी काट रहे किसानों की पिटाई कर दी। मुड़गांव के पास कटनी कर रहे मजदूरों को भी पीटा गया। जहानाबाद प्रखंड कल्पा ओपी के बड़ा बाबू द्वारा मजदूर-किसानों को धमकाया गया, खलिहान में आग लगाने की धमकी दी गई। घोसी के लखावर गांव में एक तालाब में मछली मार रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने मुकदमा कर दिया है।

गोपालगंज:

1.पुलिस का दमनात्मक रवैया: 

उसी प्रकार गोपालगंज के भोरे प्रखंड के अंचलाधिकारी के दमनात्मक रवैये की वजह से आम जनता का गुस्सा आज फूट पड़ा। अंचलाधिकारी जितेन्द्र कुमार सिंह लोगों के साथ मारपीट की घटना को लगातार अंजाम दे रहे हैं। जिसमें कई लोग घायल हो गए। दो दिन पहले सीओ ने धरीक्षण मोड़ के पास कपड़ा प्रेस कर जीवन-यापन करने वाले 70 वर्षीय व्यक्ति को दुकान बंद करने के लिए पीट-पीट कर घायल कर दिया था। दूसरी घटना में काली मोड़ पर 75 वर्षीय बूढ़े व्यक्ति को घर जाते समय पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया।

तीसरी घटना विश्रामपुर की है, जिसमें सरसों के खेत में काम करने जा रही दो महिलाओं को बुलाकर पीटा गया। चौथी घटना खाना बना रहे दो लोगों की पिटाई से जुड़ा था। अंचलाधिकारी ने खाना बनाने वाला गैस चूल्हा व बर्तन आदि भी जब्त कर लिया। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने भोरे-मीरगंज पथ को जाम किया और सीओ की गुंडागर्दी के खिलाफ जमकर नारे बाजी की। 

2.सामंती-अपराधियों की दबंगई: 

विगत 30 मार्च को गोपालगंज जिले के कुचायकोट थानान्तर्गत बेदुवा टोलाट दलित बस्ती में खेत में काम करने से इंकार करने के कारण सामंती-अपराधियों ने दलितों पर हमला कर दिया। विकलांग महिला समेत 15 लोगों को बहुत ही बुरी तरह से पीटा गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 मार्च की शाम एक लड़का कुर्सी लगाकर अपने घर के दरवाजे के सामने बैठा था। यह सामंती ताकतों को नागवार गुजरा और उन्होंने उसको पीट दिया। 31 मार्च को सामंतों ने दलित-मजदूरों से सरसों काटने को कहा, लेकिन मजदूरों ने लाॅक डाउन होने के कारण सरसों काटने से इंकार कर दिया। बस क्या था, सामंतों-अपराधियों ने उन लोगों को पीट दिया। जब वे कुचायकोट थाने में मुकदमा दायर करने गए तो थानेदार ने उन लोगों को वहां से भगा दिया। बाद में माले की पहलकदमी पर हरिजन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

दरभंगा: 

दरभंगा जिले में भी इस बीच भाजपाइयों का मनोबल बढ़ा है। सदर मनीगाछी की भाकपा-माले की नेत्री रसीदा खातून पर भाजपाइयों के उकसावे पर पड़ोसियों ने हमला कर दिया। इसके खिलाफ पार्टी ने तत्काल पहलकदमी ली, जिसके दबाव में प्रशासन को हमलावरों को गिरफ्तार करना पड़ा। कई जगहों से फसल काटने पर किसानों में भाजपा कार्यकर्ताओं के उकसावे पर दहशत फैलाने, सैलून-आटा चक्की आदि सार्वजनिक जगहों से अल्पसंख्यक समुदाय को वंचित कर उनके खिलाफ भाजपाइयों द्वारा सामाजिक बहिष्कार का निंदनीय अभियान चलाया जा रहा है।

सिवान:

सिवान में भी पुलिस ने इस पूरे दौर में दमनात्मक रूख ही अपनाया है। रघुनाथपुर के राजपुर उच्च विद्यालय में जांच व खाना मांगने के सवाल पर बीडीओ ने लाठीचार्ज किया। नौतन के गंभीरपुर में मछली मार रहे लोगों को पुलिस ने खदेड़ कर भगा दिया और 10 किलो मछली जब्त कर ली। 

इस बीच अपराध की भी घटनायें घटी हैं। विगत 4 मार्च को सिवान शहर में अशोक राम पर गोल चलाई गई। 7 अप्रैल की सुबह रिंकू दुबे, जो पारा टीचर हैं, को गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

(यह पूरी रिपोर्ट एक फैक्ट फ़ाइंडिंग टीम के दौरे पर आधारित है। और सीपीआई (एमएल) के कार्यालय प्रभारी कुमार परवेज़ की ओर से जारी की गयी है।)

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