Sunday, October 17, 2021

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नीतीश की पुलिस घर में घुसकर मां-बेटी और बेटे को पीटती रही और लोग तमाशा देखते रहे; एफआईआर और न कोई सुनवाई

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बिहार के मधेपुरा जिला के गौशाला चौक के कृष्णापुरी मोहल्ला में 18 अप्रैल को शाम पांच बजे थानाध्यक्ष सुरेश प्रसाद सिंह अपने पुलिस दल बल के साथ लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए गोशाला सचिव पृथ्वीराज यदुवंशी के घर में घुसते हैं और चीखते हुए पूछते हैं- “यदुवंशी का घर यही है?”

उनकी आवाज़ सुनकर पृथ्वीराज यदुवंशी का बेटा आकाश यदुवंशी जो कि उस वक्त अनाज और अन्य सामग्री की पैकिंग कर रहा था ( बता दें कि पृथ्वीराज यदुवंशी जी के ट्रस्ट के द्वारा विगत 10-15 दिनों से ज़रूरतमंदों को अनाज वितरित किया जाता है) बाहर आया और बोला- “अंकल अभी पापा घर पर नहीं हैं। मैं उनका बड़ा लड़का हूँ मुझसे बोलिये। 

आकाश बताते हैं कि “दरोगा जी पहले से ही हमें जानते थे क्योंकि मैं पुलिस सप्ताह कार्यक्रम के भाषण प्रतियोगिता में मधेपुरा जिले में प्रथम स्थान आया। मुझे सबसे ज्यादा अंक देने वाले भी खुद मधेपुरा थानाध्यक्ष सुरेश सिंह थे। 

लेकिन उस दिन जाने क्यों दरोगा जी खार खाए हुए थे मेरे जवाब देते ही गाली-गलौज करते हुए बोले तुम लोग यहाँ के दादा या दबंग हो, जो तुम लोगों ने यहाँ की गोशाला में ताला मार रखा है।”

तो आकाश ने जवाब दिया कि “प्रधानमंत्री के कोरोना लॉकडाउन के बाद गोशाला प्रशासन ने निर्णय लिया कि वो सुबह 1-2 घण्टे और शाम में 1- 2 घण्टे गोशाला खुला रखेंगे बाकी समय गोशाला बंद रखा जाएगा क्योंकि बहुत से श्रद्धालु गोशाला में पूजा-पाठ या घूमने-फिरने आते हैं और कोरोना संक्रमण गोशाला के कर्मचारियों को भी फैल सकता है। और गोशाला प्रशासन के इस निर्णय का पालन कोरोना महामारी के बाद घोषित लॉकडाउन के बिल्कुल शुरुआती दिनों से ही होता आ रहा है। इसके बारे में यदि ज़्यादा जानकारी चाहिए तो सर आप गोशाला के मैनेजर से, स्टाफ से या मेरे पिताजी श्री यदुवंशी जी से पूछिए जो गौशाला सचिव हैं उनको फोन करके पूछिये, आप इस तरह से मेरे साथ आप धक्का-मुक्की नही कर सकते।”

इतना सुन दरोगा सुरेश कुमार सिंह का पारा सातवें आसामन पर पहुँच जाता है गुस्से में भरकर बोलते हैं, “बहुत बोलता है तुम रे, औकात दिखाते हैं तुमको।” 

तभी दरोगा के साथ गए पुलिसकर्मी आकाश यदुवंशी को लात-जूते-लाठी से पीटना शुरू कर देते हैं। इस दौरान आकाश उनसे जिरह करता रहा कि “देखिए सर यह पत्रकार का घर है। गौशाला की चाभी गैशाला में है। आपको चाभी चाहिए तो चलिए गौशाला वहीं है दिलवाते हैं हम चाभी। पर उन लोगों ने उसकी एक न सुनी। 4-5 पुलिस मिल कर मारते रहे और दरोगा पीछे के छोटे से गेट से निकलकर बोले, “रुको बांस से अब मारेंगे तुमको तब होश ठिकाने आएगा।”

इतने में भाई को पिटता देख आकाश की बहन समीक्षा आ गई। समीक्षा जयपुर यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रही है। समीक्षा ने दरोगा से पूछा आप ऐसे घसीट कर नहीं मार सकते मेरे भाई को। आप किस ग्राउंड पर आए हैं हमारे निजी आवास पर? क्या आप के पास सर्च वारंट – अरेस्ट वारंट – नोटिस या कोई रिपोर्ट है हमारे खिलाफ़? तो हमें बताइये? इस दौरान समीक्षा अपने मोबाइल फोन से घटनाक्रम का वीडियो भी शूट किए जा रही थी। इसी दरम्यान वो जिस हाथ से मोबाइल वीडियो शूट कर रही थी उस हाथ पर दरोगा सुरेश कुमार सिंह ने जोर से मारा और उसके साथ मार-पीट करने लगा। इतने में बेटी और बेटे की चीख पुकार सुन उनकी मां आ गई और बोली आप बिना महिला पुलिस के एक लड़की और महिला को हाथ नहीं लगा सकते।” 

कानून की बातें सुन दरोगा सुरेश कुमार सिंह अपनी वर्दी की मान मर्यादा सब भुलाकर माँ-बेटे के साथ बदतमीजी पर उतर आया और गाली गलौज करने लगा।”

तीन लोगों की चीख पुकार सुन आस पड़ोस के लोग भी जुटने लगे, लोगों को आते देखा दरोगा निकल गया। इसके बाद जब आकाश यदुवंशी, समीक्षा और उनकी माँ शाम 6 बजे के बाद दरोगा के खिलाफ़ केस दर्ज करने थाना पहुँचे तो उन तीनों को थाने के गेट से ही भगा दिया गया ।

तब से लगातार डीजीपी-डीआईजी-एसपी-डीएम को स्पीड पोस्ट- ईमेल -व्हाट्सएप्प के जरिये एफआईआर  भेजने की कोशिश में हैं लेकिन ये प्रशासन केस लेने से मना कर रहा है।

आरोपी थानाध्यक्ष का पक्ष

घटना के बाबत थाना अध्यक्ष सुरेश सिंह से जब पूछा गया तो उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया। जबकि अनुमंडल पुलिस अधिकारी वसी अहमद का कहना है कि सदर थानाध्यक्ष पर लगाये गये आरोप बेबुनियाद हैं। समीक्षा यदुवंशी के पिता विश्वविद्यालय में लाइब्रेरियन और स्थानीय गौशाला में सचिव हैं। उनका गौशाला परिसर में ही रह रहे एक गौ-सेवक विमल कुमार से पूर्व विवाद है।

18 तारीख को इन लोगों ने विमल कुमार की पत्नी राम दुलारी देवी को गौशाला परिसर में बंद कर दिया था। इसकी सूचना खुद दुलारी देवी ने फोन पर पुलिस को दी थी। सूचना मिलते ही पुलिस यदुवंशी के घर चाभी लेने गयी थी। और चाभी लेकर उक्त महिला को मुक्त कराया है। पुलिस पर लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद हैं किसी तरह की मारपीट और छेड़खानी की घटना को अंजाम नही दिया गया है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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