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मोदी राज में बैंकों ने माफ किए कारपोरेट के 8 लाख करोड़ रुपये

अपनी कथित फकीरी का ढिंढोरा पीटने वाले नरेंद्र मोदी नीत भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने अपने पहले पूर्णकालिक शासनकाल में पूंजीपतियों को वारे न्यारे करते हुए भारतीय बैंकों से पहले लोन दिलवाया और फिर करीब 8 लाख करोड़ रुपये बट्टे-खाते में डाल दिया।

पुणे के एक बिजनेसमैन प्रफुल्ल सारडा को एक आरटीआई से पता चला है कि मोदीराज के पहले टर्म यानि साल 2014-2019 में 7,94,354 करोड़ रुपए के लोन राइट-ऑफ में चला गया। ये रकम मनमोहन सिंह शासित दस सालों (2004 से 2014) में जितना लोन राइट-ऑफ हुआ उसका साढ़े तीन गुना से ज्यादा है। इसे यूं समझिये कि मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को कुल मिलाकर 1.71 लाख करोड़ रुपए का बजट मोदी सरकार ने आवंटित किया था जो कि बैंकों की राइट-ऑफ की गई रकम से एक चौथाई से भी कम है।

बता दें कि यूपीए कार्यकाल के दस सालों में विभिन्न बैंकों ने करीब 2,20,328 करोड़ रुपए के लोन राइट-ऑफ होने की सूचना दी थी। इसके उलट एनडीए में 7,94,354 करोड़ रुपए के लोन राइट-ऑफ कर दिये गए।

वित्त वर्ष 2014-15 में बैंकों के राइट-ऑफ लोन्स करीब 2.79 लाख करोड़ रुपए के थे। फिर अगले दो साल में ये रकम बढ़कर 6.85 लाख करोड़ रुपए तक और 2018 तक 8.96 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।  इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत आई रिकवरी से हालात कुछ सुधरे और आंकड़ा फिर थोड़ा नीचे खिसककर 7.94 लाख करोड़ पर आ गया है।

वहीं अगर मोदी राज के पिछले पांच साल में, यानी अप्रैल-2014 के बाद से सरकार ने पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) में रीकैपिटलाइजेशन के लिए करीब 3.13 लाख करोड़ रुपए लगाए हैं। जबकि लोन राइट-ऑफ हुआ 7.94 लाख करोड़ रुपये का। यानी मोदी राज में राइट-ऑफ किया गया पैसा, बैकों में लगाए गए पैसे से दोगुना हुआ।

क्या है ‘लोन राइट ऑफ’ होना

लोन राइट-ऑफ करना माने जब बैंकों को लगता है कि उन्होंने लोन बांट तो दिया, लेकिन अब वसूलना मुश्किल हो रहा है। तब ऐसे में बैंक उस लोन को ‘राइट-ऑफ’ कर देता है यानि बट्टे खाते में डाल देता है। मतलब ये कि बैंक ये मान लेता है कि इस लोन की रिकवरी अब हो नहीं पा रही है और इस लोन अमाउंट को बैलेंस शीट से हटा देता है।

देश में कुल 21 पब्लिक सेक्टर बैंक ऐसे हैं, जिनके पास कुल मिलाकर पूरे बैंकिंग सेक्टर के 70% एसेट्स हैं। खास बात ये कि कुल राइट-ऑफ में से 80% हिस्सेदारी इन 21 बैंकों की ही है।

आरटीआई के जबाव में मिली जानकारी अनुसार जिन बैंकों का लोन राइट-ऑफ हुआ है उसमें ना सिर्फ़ पब्लिक सेक्टर के बैंक शामिल हैं बल्कि निजी सेक्टर और विदेशी बैंकों के लोन भी बड़े पैमाने पर राइट-ऑफ हुए हैं। आरटीआई से पता चला है कि इसमें करीब दो दर्जन पब्लिक सेक्टर के बैंक (PSB), निजी क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन बैंक, 9 शेड्यूल कमर्शियल बैंक और चार दर्जन विदेशी बैंक शामिल हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 22, 2020 11:15 am

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