Tuesday, October 26, 2021

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भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने जुलाई में म्यांमार की जुंटा सेना को बेचा एयर डिफेंस स्टेशन

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भारत ने म्यांमार की सेना द्वारा तख्तापलट करके आंग सान सूची सहित प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार करने के मुद्दे पर अप्रैल 2021 में चुप्पी तोड़ते हुए पूरी दुनिया से एकसाथ आने की अपील की थी। एक ओर संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि के. नागराज नायडू ने म्यांमार पर हुई बैठक में कहा कि भारत म्यांमार में हुई हिंसा की निंदा करता है और वहां हुए जानमाल के नुकसान की भी भर्त्सना करता है। वहां जो कुछ हुआ, वो नहीं होना चाहिए था। वहीं दूसरी और भारत सरकार ने म्यांमार को हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध की मांग वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बना ली थी।

इसका रहस्य अब जाकर तब खुला है जब म्यांमार के जुंटा सैन्य शासन के हथियारों की ख़रीद पर निगरानी रखने वाले कार्यकर्ताओं के एक फोरम ने खुलासा किया है कि भारत की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने इस साल जुलाई में म्यांमार में रिमोट संचालित एयर डिफेंस स्टेशन का निर्यात किया है यानि बेचा है। फरवरी में म्यांमार में हुए तख़्तापलट के बाद से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स यहां की सेना को कई खेप भेज चुकी है।

‘द वायर’ ने खबर ब्रेक की है कि म्यांमार के जुंटा सैन्य शासन के हथियारों की खरीद पर निगरानी रखने वाले कार्यकर्ताओं के एक फोरम ने न्यूयॉर्क स्थिति वैश्विक डेटा ट्रेड कंपनी के हवाले से दावा किया है कि भारत की एक पीएसयू (सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी) भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने इस साल जुलाई में म्यांमार में रिमोट संचालित एयर डिफेंस स्टेशन का निर्यात किया है। द इरावडी की रिपोर्ट के मुताबिक, जुंटा और हथियार निर्माता, जिसमें भारत सरकार बहुसंख्यक शेयरधारक है, के बीच इस सौदे की पुष्टि कार्यकर्ता फोरम जस्टिस फॉर म्यांमार (जेएफएम) ने की है।

जेएफएम ने पांच अक्टूबर को न्यूयॉर्क स्थित वैश्विक ट्रेड डेटा कंपनी ‘पंजीवा’के हवाले से दावा किया कि म्यांमार की कंपनी मेगा हिल जनरल ट्रेडिंग के जरिये भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शिपमेंट (खेप) को भेजा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि मेगा हिल की वेबसाइट और लीक हुए डेटा के मुताबिक मेगा हिल ने म्यांमार की नौसेना के लिए सामानों को खरीदा है और खरीदने का प्रयास किया है। पंजीवा के मुताबिक, जुलाई में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स की खेप में एक गन माउंट और ऑप्टिकल डिवाइस शामिल थे।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की खेप को इस पूरी समझ के साथ तैयार किया गया कि ये सामान सेना की मदद और उन्हें अत्याचारों के लिए उकसा सकता है। रिपोर्ट में जेएफएम के बयान के हवाले से कहा गया कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने फरवरी में हुए तख्तापलट के बाद से तटीय सर्विलांस सिस्टम के लिए म्यांमार सेना को कई खेप भेजी हैं। जेएफएम का कहना है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने म्यांमार सेना को की गई हथियारों की आपूर्ति पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

जेएफएम के मुताबिक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के एयर डिफेंस शिपमेंट का सूचीबद्ध मूल्य 6,00,000 डॉलर से अधिक है और इसे संभवत: परीक्षण के लिए खरीदा गया है और संभावना है कि भविष्य में इससे और बड़ी खरीद की जा सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि म्यांमार को भेजे गए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शिपमेंट से एक महीना पहले भारत सरकार ने म्यांमार को हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध की मांग वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बना ली थी।

जेएफएम का यह ताजा बयान जून में जारी किए गए बयान का ही हिस्सा है, जिसमें कहा गया था कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने तब तक म्यांमार सेना को सात शिपमेंट भेजी हैं, जिनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सिस्टम, रडार वीडियो एक्सट्रैक्टर रिसीवर, वीएचएफ कम्युनिकेशंस सिस्टम, ग्राफिक्स प्रोसेसर, वर्कस्टेशन हार्डवेयर, सर्वर स्टोरेज और बैटरी शामिल हैं। उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक, जेएफएम के प्रवक्ता यदनार मौंग ने बयान में कहा था कि भारत सरकार म्यांमार में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के व्यवसाय के माध्यम से जुंटा को वैधता प्रदान कर रही है, जिससे म्यांमार के लोगों के खिलाफ जुंटा के आतंकवाद के राष्ट्रव्यापी अभियान को सक्षम किया जा सके।

अगस्त में एएफपी की रिपोर्ट में एक कार्यकर्ता समूह के हवाले से कहा गया था कि म्यांमार में एक फरवरी को हुए तख्तापलट के बाद से वहां 1,000 से अधिक नागरिकों की मौत हुई है। म्यांमार के साथ भारत की 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है। बीते कुछ महीनों में म्यांमार में सशस्त्र बलों की कार्रवाई की वजह से वहां के सीमावर्ती इलाकों से कई लोग भारत विशेष रूप से मिजोरम में दाखिल हुए हैं। म्यांमार सेना ने फरवरी 2021 में आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से ही सेना नीत सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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