Monday, December 5, 2022

सरायकेला: सत्तारूढ़ पार्टी की विधायक से जमीन बचाने के लिए ग्रामीणों ने लगाई माले विधायक से गुहार

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झारखंड। सरायकेला जिले में स्थित डोबो गांव के निवासियों ने विस्थापन एवं पुलिसिया दमन से बचाने के लिए माले विधायक विनोद कुमार सिंह से गुहार लगाई है। दरअसल सत्तारूढ़ पार्टी जेएमएम की विधायक सविता महतो इन गांव वालों की जमीन पर कब्जा करना चाहती हैं और इस मामले में प्रशासन जनता की बजाय उनके साथ खड़ा है। इसीलिए इन गांववासियों को माले विधायक की शरण लेनी पड़ रही है। 

इन ग्रामवासियों का कहना है कि हम चांडिल प्रखंड स्थित डोबो ग्राम के हनुमान कॉलोनी के निवासी फरवरी माह से अपने घरों के टूटने के डर भरे माहौल में रह रहे हैं। उक्त प्लॉट पर 11 कुड़मी, संताल और भूमिज जनजातियों के परिवार बसे हैं, जिन्हें जन नेता निर्मल महतो दादा ने बसाया था। प्लॉट खतियानी रैयत गुरुचरण भूमिज का है। और हम यहां रह सकते हैं।

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ग्रामवासियों ने बताया कि इसी साल फरवरी में झामुमो से ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र की विधायक सविता महतो ने हमारे घरों को घेरते हुए बाउंड्रीवाल चालू करवाया। उनका कहना था कि जमीन 2009 में उनके पति सुधीर महतो ने किसी एंग्लो इंडियन गैर आदिवासी मेल्विन स्टब्स से खरीदी थी। लेकिन जमीन CNT Act के तहत किसी गैर आदिवासी को बेचने के लिए थी ही नहीं। फर्जी कागज़ों के दम पर हो रहे निर्माण का जब हमने विरोध किया तो प्रदर्शन करते हम ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। साथ ही 5 धाराओं के कहत 8 लोगों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

गौरतलब है कि उसके बाद विरोध के कारण पांच महीनों तक निर्माण बंद रहा।18 जुलाई को सरायकेला-खरसावां सिविल जज कवितांजलि टोप्पो ने इस पूरे मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, क्योंकि विधायक सविता महतो कथित तौर पर जमीन पर अपने दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस कागजात पेश करने में विफल रहीं थीं। लेकिन अगले ही दिन 19 जुलाई को अधिकारियों ने उसी भूखंड के चारों ओर करीब 150 पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में एक बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू कर दिया। जब हम लोगों ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विरोध किया तो अंचल अधिकारी प्रणव अंबष्ट, चांडिल एसडीओ रंजीत लोहरा सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मारपीट की और हमें गाड़ी में बिठा कर शाम तक बंद रखा।

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ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस ने उल्टा हम लोगों पर ही अपने ज़मीन पर अवैध रूप से बाउंड्री निर्माण का विरोध करने के लिए केस ठोक दिया। जबकि चांडिल सीओ प्रणव अम्बष्ट पर हमने जो हिंसा और गाली गलौज का केस दर्ज किया उसमें भी कोई कार्यवाही नहीं की गई।

उल्लेखनीय है कि झारखंड के सरायकेला जिलान्तर्गत चांडिल प्रखंड के डोबो गांव के हनुमान नगर में पिछले 19 जुलाई को जेएमएम की विधायक सविता महतो को एक विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए चांडिल अंचल के सीओ (अंचलाधिकारी) प्रणव अम्बष्ट ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर जब उक्त जमीन पर बाउंड्रीवाल करना शुरू किया, तब ग्रामीणों द्वारा इसका जोरदार विरोध हुआ। जबकि उक्त 18 जुलाई को सरायकेला-खरसावां सिविल जज द्वारा उक्त विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था, क्योंकि विधायक सविता महतो कथित तौर पर जमीन पर अपने दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस कागजात पेश करने में विफल रही थीं।   

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इसी बात को लेकर ग्रामीण विरोध कर रहे थे। ऐसे में विरोध कर रहे लोगों के बीच सीओ प्रणव अम्बष्ट ने रैयत खतियान धारी बलराम महतो का गला पकड़कर उन्हें दूर तक धकेलते हुए ले गए और उनके साथ मारपीट की, इसका भी ग्रामीणों ने जमकर प्रतिरोध किया।

इस घटना के बाद रैयत का सीओ द्वारा गर्दन पकड़े व धक्का मुक्की करने की तस्वीर वायरल होने लगी, मामला तूल पकड़ने लगा। रैयत सर्वेश्वर सिंह सरदार ने भी मारपीट का आरोप लगाते हुए 20 जुलाई को सरायकेला -खरसांवा के डीसी और एसपी को एक पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।

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वहीं दूसरी तरफ एसडीओ रंजीत लोहरा ने एक वीडियो के माध्यम से इसे साजिश बताते हुए वीडियो वायरल करने वाले और विरोध करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। जिसमें बलराम महतो और मनोज कुमार सहित अज्ञात 25 महिला-पुरुष शामिल हैं।

जबकि रैयत सर्वेश्वर सिंह सरदार ने डीसी को ज्ञापन सौंप कर चांडिल प्रखंड के डोबो मौजा के खाता संख्या 42, प्लॉट संख्या 1240, 1236, 1237, 1239, 1241 एवं 1257, रकबा 1.95 एकड़ रैयत जमीन पर चांडिल एसडीओ एवं सीओ द्वारा जबरन चहारदीवारी निर्माण करवाने का आरोप लगाया था। सरदार ने ज्ञापन में बताया गया था कि उक्त 1.95 एकड़ जमीन उनकी पैतृक जमीन है। जिसका जिला व्यवहार न्यायालय में ओएस नंबर 21/2022 वाद में बीते 18 जुलाई को न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश है, जिसकी प्रतिलिपि पदाधिकारी चांडिल, अंचलाधिकारी चांडिल और थाना प्रभारी चांडिल को दी गयी है।

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इसके बावजूद न्यायालय के उक्त आदेश की अवमानना करते हुए प्रशासन द्वारा खड़े होकर चहारदीवारी का निर्माण करवाया गया। इस दौरान विरोध करने पर पदाधिकारियों द्वारा मारपीट भी की गयी। सर्वेश्वर सिंह सरदार ने उपायुक्त से न्यायालय के आदेश की अवमानना करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी, बावजूद इसके आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

बता दें कि सविता महतो पूर्व उप-मुख्यमंत्री और झामुमो के एक कद्दावर नेता महरूम सुधीर महतो की पत्नी हैं। स्व. महतो झारखंड अलग राज्य के आन्दोलनकारी और जेएमएम के प्रमुख नेता और ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन के संस्थापक निर्मल महतो के भाई थे। वो बिहार विधान सभा और झारखण्ड विधानसभा में ईचागढ़ विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रहे। सुधीर महतो 14 सितम्बर 2006 से 23 अगस्त 2008 तक मधु कोड़ा सरकार में उप-मुख्यमंत्री रहे। 23 जनवरी 2014 को पूर्वी सिंहभूम जिले में हृदयाघात से 53 वर्ष की आयु में उनकी मौत हो गयी। उनका जन्म 1961 में हुआ था।

इनकी मौत के बाद पत्नी सविता महतो ईचागढ़ क्षेत्र से विधायक चुनी गईं। विधायक सविता महतो ने दावा किया कि झारखंड के सरायकेला-खरसावा गांव डोबो में जमीन का एक प्लॉट उनकी संपत्ति है।

जबकि इस बाबत ग्रामीण दीपक महतो बताते हैं कि यह जमीन एक आदिवासी गुरुचरण भूमिज की है और चांडिल बांध से विस्थापित करीब एक दर्जन परिवार भूमिज की अनुमति से छह दशक से अधिक समय से वहां रह रहे हैं।

सविता महतो ने इसी साल फरवरी में जमीन के चारों ओर चारदीवारी का निर्माण शुरू किया था। इसके बाद विरोध हुआ जिसके परिणामस्वरूप निर्माण कार्य रोक दिया गया और 7 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

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सविता महतो की इस कथित तानाशाही के खिलाफ 12 फरवरी को ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन एवं विधायक का पुतला दहन कार्यक्रम किया गया। उक्त कार्यक्रम के दौरान अनूप महतो, सत्यम श्रीवास्तव, रुपाई मांझी, गोकुल सिंह सरदार, विष्णु गोप, बलराम महतो, एडवोकेट भीम महतो सहित 25 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया।

बता दें कि 19 जुलाई को अधिकारियों ने उसी भूखंड के चारों ओर करीब 150 पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में एक बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू कर दिया। लोगों ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विरोध किया तो अंचल अधिकारी प्रणव अंबष्ट, चांडिल एसडीओ रंजीत लोहरा सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मारपीट की और उन्हें गाड़ी में बिठा कर शाम तक बंद रखा।

मामले को लेकर 20 जुलाई को डोबो गांव की काफी संख्या में आयी ग्रामीण महिलाओं ने सरायकेला उपायुक्त कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया।

उपायुक्त कार्यालय के समक्ष महिलाएं कार्ड बोर्ड एवं बैनर पोस्टर लिए हुए थीं। जिन पर विधायक सविता महतो, चांडिल एसडीओ एवं सीओ के खिलाफ गम्भीर आरोप लगाते हुए नारे लिखे हुए थे। विरोध प्रदर्शन के पश्चात ग्रामीणों ने उपायुक्त कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा और उचित न्याय दिलाने की मांग की।

चूंकि आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, लिहाजा परेशान ग्रामीणों ने अंततः माले विधायक विनोद सिंह को एक ज्ञापन सौंपकर इस मामले को सदन के पटल पर लाने की  अपील की है।

वहीं झारखंड जन संघर्ष मोर्चा ने राज्य के कई क्षेत्रों में 19 अगस्त से शुरू किए गए पांच अलग-अलग कार्यक्रमों में इन तमाम मुद्दों पर भी चर्चा की तथा प्रशासनिक दमन के खिलाफ आवाज बुलंद की है। चूंकि मामला सीधे सत्ता से जुड़ा हुआ है इसलिए कोई भी प्रशासनिक अधिकारी इस मसले पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। लिहाजा कई अधिकारियों से बात करने की कोशिश नाकाम हो गयी।

(वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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