Monday, October 25, 2021

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रेप केस में पत्रकार तरुण तेजपाल आठ साल बाद बरी

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रेप केस में पत्रकार तरुण तेजपाल को बड़ी राहत मिली है। 8 साल बाद गोवा के जिला और सत्र न्यायालय, मापुसा ने ‘तहलका’ के संस्थापक और पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को एक जूनियर सहयोगी के यौन उत्पीड़न और बलात्कार के सभी आरोपों से बरी कर दिया है।

तरुण तेजपाल पर 7 और 8 नवंबर, 2013 को समाचार पत्रिका के आधिकारिक कार्यक्रम – थिंक 13 उत्सव के दौरान गोवा के बम्बोलिम में स्थित ग्रैंड हयात होटल के लिफ्ट के अंदर महिला की इच्छा के विरुद्ध जबर्दस्ती करने का आरोप लगाया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी ने पिछले महीने सात साल पुराने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। तेजपाल के कहने पर बंद कमरे में सुनवाई हुई।

तहलका मैगजीन के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल पर 2013 में गोवा के एक लक्जरी होटल की लिफ्ट के भीतर महिला साथी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था। नवंबर, 2013 में तहलका मैग्जीन का एक इवेंट ‘थिंक फेस्ट’ पणजी के एक फाइव स्टार होटल में चल रहा था। आरोप थे कि इसी इवेंट से इतर तरुण तेजपाल ने लिफ्ट में अपने जूनियर सहकर्मी युवती का दो बार यौन उत्पीड़न किया था। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद 30 नवंबर को तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था।

पीड़ित युवती ने पत्रिका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को मेल लिखकर आरोप लगाया था कि पणजी के इवेंट में तरुण तेजपाल ने 7 और 8 नवंबर 2013 को लिफ्ट में दो बार यौन उत्पीड़न किया था। आरोप ये भी लगाया था कि इस बारे में किसी को बताने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी गई थी। इसके बाद मैनेजमेंट ने तरुण तेजपाल की तरफ से 20 नवंबर, 2013 को कर्मचारियों को एक ईमेल जारी कर माफी मांगी और तेजपाल ने प्रायश्चित के तौर पर खुद को संस्थान से छह महीने के लिए अलग कर लिया।

बाद में ये मेल मीडिया में लीक हो गया। मीडिया में मामला आने के बाद गोवा पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए 21 नवंबर, 2013 को तेजपाल के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कर लिया। गोवा पुलिस ने तहलका के दफ्तर पहुंचकर शोमा चौधरी से पूछताछ की। 30 नवंबर को पणजी अदालत ने तेजपाल को गिरफ्तार करने का आदेश दिया।पिछले साल अक्तूबर में उच्चतम न्यायालय ने ट्रायल पूरा करने के लिए 31 मार्च, 2021 तक का समय दिया था, हालांकि मामला मई तक खिंच गया।

7 नवंबर, 2013, शनिवार को गोवा के एक फाइव स्टार होटल में तहलका का थिंक फेस्ट चल रहा था। तहलका के एडिटर इन चीफ और जाने-माने पत्रकार तरुण तेजपाल समेत दुनिया के कई मशहूर चेहरे इस फेस्ट का हिस्सा थे। गोवा पुलिस को दिए लड़की के बयान के मुताबिक, उस रात जब वह एक गेस्ट को उसके कमरे तक छोड़ कर वापस लौट रही थी, तो इसी होटल के ब्लॉक 7 के एक लिफ्ट के सामने उसे उसके बॉस तरुण तेजपाल मिल गए।  तेजपाल ने गेस्ट को दोबारा जगाने की बात कह अचानक उसे वापस उसी लिफ्ट के अंदर खींच लिया, लेकिन अभी ये लड़की कुछ समझ पाती कि इसी बीच तेजपाल ने लिफ्ट के बटन कुछ ऐसे दबाने शुरू किए, जिससे ना तो लिफ्ट कहीं रुके और ना ही दरवाजा खुले और तब तेजपाल ने इसी बंद लिफ्ट में ओरल सेक्स करने की कोशिश की। जब थोड़ी देर बाद लिफ्ट रुकी, तो वो किसी तरह अपने कपड़े संभालकर लिफ्ट से निकल भागी। 

उस रात तो इस लड़की ने अपने फोन पर अपने ब्वॉयफ्रैंड के अलावा दोस्तों को इस वाकये के बारे में बताया, लेकिन अगले दिन मौका मिलते ही फिर से उसी होटल की एक लिफ्ट में तेजपाल ने उसके साथ वही हरकत दोहराई और अब उसके लिए ये सब कुछ बर्दाश्त से बाहर हो चुका था। गोवा पुलिस के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बाद पीड़ित लड़की ने गोवा जाकर मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज करा दिया। मजिस्ट्रेट को दिए 22 पेज के बयान में लड़की ने पूरे तफ्सील से बताया।

गौरतलब है कि तहलका वर्ष 2001 में ऑपरेशन वेस्ट एंड के जरिए पहली बार चर्चा में आया जिसमें तहलका ने तब के भाजपा के अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण और रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस को रक्षा सौदों में मदद के लिए रिश्वत लेते हुए कैमरे में रंगे हाथों कैद किया था। तेजपाल ने पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर न्यूज वेबसाइट की शुरुआत की थी। यौन उत्पीड़न के मामले में तेजपाल को 30 नवंबर, 2013 को गिरफ्तार किया गया, जब गोवा की एक स्थानीय अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। एक साल से भी कम समय बाद जुलाई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दी थी। फरवरी 2014 में गोवा पुलिस अपराध शाखा ने उनके खिलाफ 2,846 पन्नों का आरोप पत्र दायर किया।

सत्र न्यायालय ने तीन साल बाद जून 2017 में तेजपाल के आवेदन को दोनों पक्षों की गरिमा, सम्मान और निजता की रक्षा के लिए बंद कमरे में सुनवाई करने की अनुमति दी। सत्र न्यायालय ने 28 सितंबर, 2017 को तेजपाल के खिलाफ आरोप तय किए और पीड़िता ने मार्च 2018 में गवाही दी। अभियोजन पक्ष ने मामले में 71 गवाहों की जांच की और पांच बचाव पक्ष के गवाहों को सुना। अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से पीड़िता के बयान, उसके सहयोगियों के बयान और सीसीटीवी फुटेज, ई-मेल और व्हाट्सएप संदेशों के रूप में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर आधारित था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बी आर गवई की पीठ  ने अगस्त 2019 में तेजपाल की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ आरोपों को रद्द करने की मांग की गई थी। पीठ ने इस अपराध को नैतिक रूप से घृणित और पीड़िता की निजता पर हमला करार देते हुए सत्र न्यायालय को छह महीने के भीतर मुकदमे को पूरा करने का निर्देश दिया। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने दस और गवाहों का हवाला देते हुए इस साल जनवरी में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर किया। मार्च में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनी गईं और मामले में आदेश सुरक्षित रखा गया था।

वर्ष  2000 में तहलका ने पहला स्टिंग ऑपरेशन क्रिकेट में होने वाली मैच फिक्सिंग को लेकर किया। एक साल बाद 2001 में उनका दूसरा स्टिंग ऑपरेशन रक्षा सौदों में होने वाली दलाली को लेकर था। जिसका नाम ऑपरेशन वेस्ट एंड था।इसके तहत जिन फुटेज को रिलीज किया गया, उसमें काल्पनिक हथियार सौदा कराने के बदले सरकारी अफसर और नेता कैमरे पर रिश्वत लेते दिखे थे। इस स्टिंग के सामने आने के बाद तत्कालीन सत्तारुढ़ पार्टी के अध्यक्ष और रक्षामंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। इस स्टिंग ने दुनियाभर में सनसनी बटोरी थी और तरुण तेजपाल को इससे काफी प्रसिद्धि भी मिली थी।

तरुण तेजपाल 1980 के दौर से पत्रकारिता के पेशे से जुड़े रहे हैं। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, आउटलुक जैसे मशहूर अखबारों और पत्रिकाओं में काम किया है। साल 2000 में उन्होंने तहलका वेबसाइट शुरू की थी। पंजाब यूनिवर्सिटी से इकॉनोमिक्स में स्नातक करने वाले तेजपाल मूलत: पंजाब के जालंधर के रहने वाले हैं। तीन दशक से भी लंबा पत्रकारिता का लंबा अनुभव रखने वाले तेजपाल ने साल 2000 में नौकरी छोड़कर दूसरे वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर तहलका डॉट कॉम शुरू किया था। 2004 में तहलका टैब्लायड न्यूज पेपर और फिर 2007 में उसे एक मैग्जीन का रूप दे दिया गया। तहलका ने शुरुआत में ही क्रिकेट में होने वाली मैच फिक्सिंग पर स्टिंग ऑपरेशन कर तहलका मचा दिया था। दूसरे स्टिंग ऑपरेशन में रक्षा सौदों में दलाली को उजागर किया था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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