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सफूरा जरगर की न्यायिक हिरासत 25 जून तक बढ़ी, गौतम नवलखा भेजे गए अचानक मुंबई

नई दिल्ली। मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार गौतम नवलखा को लेकर एक बड़ी ख़बर आ रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस उन्हें अचानक लेकर मुंबई चली गयी है। जबकि कल उनकी दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। बताया जाता है कि ऐसा उनकी जमानत को रोकने के मकसद से किया गया है। नवलखा पिछली 14 अप्रैल से ही तिहाड़ जेल में बंद थे। उन्हें भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई ले जाने के बाद उन्हें तलोजा जेल में रखा गया है जहां कोरोना से एक कैदी की मौत हो चुकी है।

यह पूरी कहानी उनके परिजनों के जरिये निकल कर सामने आ रही है। जिन्होंने मुंबई में उनसे मुलाकात की है।

आपको बता दें कि गौतम नवलखा ने अपनी उम्र और बीमारियों का हवाला देकर दिल्ली उच्च न्यायालय में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि कोरोना के इस दौर में उनके जेल में रहते संक्रमण का खतरा है। और एनआईए की पूछताछ के दौरान भी उनको उच्च रक्तचाप की शिकायत थी जिसके इलाज के लिए उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था।

हालांकि उनकी जमानत याचिका का सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहते हुए विरोध किया था कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन दलीलों को खारिज कर चुका है।

इन सभी दलीलों को सुनने के बाद 23 मई को हाईकोर्ट इस पूरे मसले पर एनआईए का पक्ष जानने के लिए उसे नोटिस जारी किया था। साथ ही अगली सुनवाई के लिए 27 मई यानि कल की तारीख मुकर्रर की थी। शनिवार को नवलखा के पक्ष को कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुना था।

लेकिन अब सुनवाई से पहले ही उन्हें मुंबई भेज दिया गया। परिजनों का कहना है कि उन्हें अपने वकील से संपर्क करने का भी समय नहीं दिया गया। और मुंबई रवाना होने के लिए सिर्फ पांच मिनट का समय दिया गया।

सबसे अजीब बात यह है कि एनआईए ने गौतम नवलखा की हिरासत 22 जून तक के लिए मांगी थी। लेकिन अचानक दिल्ली से मुंबई भेजे जाने की कवायद से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि एनआईए नवलखा की जमानत का खतरा मोल नहीं लेना चाहती थी।

                                                      (कुछ इनपुट जनपथ से लिए गए हैं।)

दूसरी तरफ, जामिया की छात्रा सफूरा जरगर की न्यायिक हिरासत 25 जून तक के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने बढ़ा दी है।

सफूरा गर्भवती हैं और इस वक्त जबकि जेलों में भी कोरोना फैलने की खबरें आ रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपील की है कि राजनीतिक बंदियों को इस वक्त रिहा कर दिया जाना चाहिए।

ऐसे वक्त में दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भावना के खिलाफ समझदारी के खिलाफ और दमनकारी है।

सफूरा और जामिया तथा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी तथा जेएनयू समेत दिल्ली के सैकड़ों मुसलमान और हिंदू छात्र छात्राएं इस वक्त जेलों में बंद हैं।

इनका कसूर सिर्फ यही है कि इन्होंने एक गलत कानून का विरोध किया था।

एक ऐसे कानून का जो भारत के संविधान के खिलाफ था भारत की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ था भारत के संविधान के खिलाफ था।

यह छात्र भविष्य के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कहलाएंगे।

लेकिन इस वक्त का सांप्रदायिक गैर संवैधानिक फासीवादी गुंडाराज।

इन छात्रों को अपराधी घोषित करके इन्हें जेल में डाल रहा है।

हम में से किसी को घबराने की और निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

फासीवादी ताकतें चाहती हैं कि उनके खिलाफ लड़ने वाले लोग निराश हो जाएं। उम्मीद छोड़ दें और लड़ाई बंद कर दे।

बस यही हमें नहीं होने देना है।

हम ना लड़ना छोड़ेंगे ना उम्मीद छोड़ेंगे ना निराश होंगे।

हम दुगनी ताकत से लड़ेंगे।

हमारे लिए निराशा जैसी कोई चीज मौजूद नहीं है।

यह जरूर है कि हम संख्या में जितने ज्यादा होंगे हमारी जीत उतनी करीब होगी।

इसलिए अपनी सच्चाई और सही होने का सबूत ज्यादा से ज्यादा जनता तक पहुंचाइये।

अपने साथ जनता को जोड़िए इन फासीवादियों को एक दिन हम जरूर हराएंगे

बेशक जीत हमारी होगी।

                                                  …………गांधीवादी हिमांशु कुमार

This post was last modified on May 26, 2020 8:42 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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