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Thursday, September 16, 2021

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आरटीआई में खुलासा: वैक्सिनेशन के लिए आवंटित किए 35000 करोड़, खर्च हुए महज 4489 करोड़ रुपये

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मौजूदा वित्त वर्ष (2021-22) में वैक्सिनेशन के लिये केंद्र सरकार द्वारा 35,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लेकिन वैक्सीन खरीदने पर अब तक सरकार द्वारा केवल 4,488.75 करोड़ रुपये ही खर्च हुये हैं। जबकि वैक्सीन के लिये आवंटित फंड का 87.18% इस्तेमाल ही नहीं हुआ है। ये खुलासा एक आरटीआई में हुआ है।  

‘वैक्सीन की खरीद में भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को केंद्र सरकार द्वारा कितना भुगतान किया गया’- नागपुर के एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत 27 मई को ऑनलाइन मांगी गयी सूचना के जवाब में 28 मई को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा भेजे गये सूचना में जानकारी दी गयी है कि भारत सरकार ने पीएम केयर्स फंड से भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से वैक्सीन की खरीददारी की है। कोविशील्ड की 5.6 करोड़ डोज 210 रुपये प्रति डोज (200 रुपये वैक्सीन और 5%GST)  और कोवैक्सिन की 1 करोड़ वैक्सीन डोज 309.75 रुपये की दर से (र्295 वैक्सीन और 5%GST) सरकार ने खरीदा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आगे बताया गया है कि यूनियन बजट में चालू वित्त वर्ष 2021-22 में टीकाकरण के लिये 35,000 करोड़ आवंटित किया गया है। जिसमें से 4,488.75 करोड़ रुपये कोविड वैक्सीन की खरीद के लिये एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड को दिया गया है। जिससे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से कोविशील्ड की 21 करोड़ डोज और भारत बायोटेक से कोवैक्सिन की 7.5 करोड़ डोज 157.5 रुपये प्रति डोज (र्150 वैक्सीन और 5%GST) की दर से खरीदा गया है। बता दें कि HLL Life Care Limited स्वास्थ्य मंत्रालय के लिये खरीददारी करने वाली एजेंसी है।

आरटीआई एक्टिविस्ट जबलपुरे का कहना है कि 1 मई को मुझ जैसे हजारों 18-44 आयु वर्ग के लोग अपने टीके की प्रतीक्षा कर रहे थे जो उन्हें नहीं मिली। उनमें से कई कोरोना जैसी माहामारी से मर भी गये। सरकार एक ओर कह रही है कि देश में टीके की कमी नहीं है और दूसरी ओर वैक्सिनेशन के लिये किये आवंटित कुल बजट का अभी तक सिर्फ़ 12.82 प्रतिशत ही खर्च किया है। आखिर सरकार पूरे फंड का इस्तेमाल करके लोगों को वैक्सीन क्यों नहीं मुहैय्या करवा रही है। जबकि 18-44 आयु वर्ग के लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में 1000 रुपये प्रति डोज चुकाना पड़ रहा है। जबकि 3 मई को सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि सरकार ने 2,520 करोड़ रुपये मई, जून, जुलाई के वैक्सीन की आपूर्ति के लिये भुगतान किया है जिसमें से 1,732.50 करोड़ रुपये सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और 787.50 करोड़ रुपये रुपये बारत बायोटेक को दिये गये हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता ने आगे कहा है कि केंद्र सरकार ने 18-44 आयु वर्ग के नागरिकों के टीकाकरण और टीके की व्यवस्था का जिम्मा पूरी तरह से राज्यों पर डाल दिया है। राज्यों ने मुफ्त वैक्सिनेशन शुरु तो किया लेकिन 12 को वैक्सीन की कमी के चलते रोक दिया। जिससे इस आयु वर्ग के लोगों को के लिये निजी अस्पतालों में जेब ढीली करनी पड़ रही है।

केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जून में देश के राज्यों को कोरोना वायरस वैक्सीन की 6 करोड़ से अधिक डोज दी जाएगी। मई में देश के राज्यों को केंद्र सरकार की तरफ से कोरोना टीके की चार करोड़ डोज दी गई थी। इसके अलावा जून में कोरोना वैक्सीन की करीब 6 करोड़ डोज राज्यों और निजी अस्पतालों की खरीदारी के लिए उपलब्ध रहेगी।

 सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की वैक्सीन नीति को मनमाना और तर्कहीन कहा

 कोरोना के संकट के बीच देश में इस वक्त वैक्सिनेशन की गति कछुआ से भी धीमी चल रही है, ऐसे में पूरी आबादी को टीका लगने में कितना वक्त लगेगा इस सवाल का जवाब हर कोई तलाश रहा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की वैक्सीन नीति पर लगातार गंभीर सवाल उठता आ रहा है। जिसे अब तक मीडिया बायकॉट करती आ रही थी और केंद्र सरकार ‘महामारी में विपक्ष राजनीति कर रहा है’ कह कर लोगों को बेवकूफ बनाती आ रही है। लेकिन दो दिन पहले 3 जून को सुप्रीम कोर्ट ने जब मोदी सरकार की वैक्सीन नीति को ‘मनमाना और तर्कहीन’ बताया तब मीडिया की नींद खुली।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की वैक्सीन नीति पर टिप्पणी करते हुये कहा कि 18-44 आयु वर्ग के लिए पेड कोविड-19 टीकाकरण नीति मनमानी व तर्कहीन लगती है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने 18-44 आयु वर्ग के कई लोगों को प्रभावित किया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी हाल ही में बताया है कि कोविड की पहली लहर के विपरीत जब बुजुर्ग और कॉमरेडिडिटी वाले लोग अधिक प्रभावित थे, दूसरी लहर में युवा लोग अधिक प्रभावित हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट लेकर पूछा कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन के लिए जो बजट बनाया, उसका इस्तेमाल 18 से 44 साल वालों को मुफ्त टीका लगाने में क्यों नहीं हो सकता। केंद्र बताए अब तक कैसे खर्च किया है बजट? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि वैक्सिनेशन के लिए बनाए गए 35 हजार करोड़ रुपये के फंड का इस्तेमाल 18 से 44 साल की आबादी को फ्री वैक्सीन देने में इस्तेमाल क्यों नहीं हो सकता? सर्वोच्च अदालत ने केंद्र से पूछा है कि वह बताए अब तक 35 हजार करोड़ रुपये के बजट को किस तरह खर्च किया गया है।  सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब देश के नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है, उस वक्त देश की अदालतें मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती हैं। सर्वोच्च अदालत ने मोदी सरकार को दो हफ्ते का वक़्त देते हुये कहा है कि सरकार वैक्सीन नीति में बदलाव के साथ अपना प्लान बताये। 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टीकाकरण नीति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी और साथ ही ये भी कहा है कि वैक्सीन कब-कब खरीदी गई, इस संबंध में कोर्ट को पूरी जानकारी विस्तार के साथ दी जाए। बता दें कि कोर्ट ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का वक्त दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-2022 के केंद्रीय बजट में टीकों की खरीद के लिए 35,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे। केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया जाता है कि इन निधियों को अब तक कैसे खर्च किया गया है और उनका उपयोग 18-44 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के टीकाकरण के लिए क्यों नहीं किया जा सकता है?

 वैक्सिनेशन अब तक

भारत में वैक्सिनेशन की शुरुआत 16 जनवरी, 2021 से हुआ था। अभी तक देश में 22 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी है, यानि एक दिन में औसतन 20-25 लाख वैक्सीन की डोज़ दी जा रही है।

देश के कई राज्यों में इस वक्त वैक्सीन की किल्लत है, हालांकि केंद्र का दावा है कि दिसंबर 2021 तक वैक्सिनेशन पूरा कर लिया जाएगा। केंद्र ने एक दिन में एक करोड़ वैक्सीन की डोज़ लगाने का लक्ष्य रखा है, ताकि बड़ी संख्या को जल्दी कवर किया जाये। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने आम बजट में वैक्सीन के लिए 35000 करोड़ रुपये का एलान किया था। इसका इस्तेमाल वैक्सीन खरीदने और लोगों को वैक्सीन देने के लिए किए जाने की बात थी।

फिलहाल केंद्र सरकार द्वारा 45 से अधिक उम्र वाले लोगों को वैक्सीन मुफ्त में दी जा रही है, जो सरकारी केंद्रों पर मिल रही है।  इस कैटेगरी के लोगों के लिए केंद्र अपनी ओर से राज्यों को भी वैक्सीन मुहैया करा रहा है। लेकिन 18 से 44  आयु वर्ग के लिए अधिकतर राज्य सरकारों को खुद ही वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है। यही कारण है कि वैक्सीन मिलने में देरी हो रही है और टीकाकरण की रफ्तार धीमी है। 

 दो के बजाय एक डोज टीका देने की रणनीति

केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से एक नए प्रस्तावित कोविड वैक्सीन ट्रैकर प्लेटफॉर्म से डेटा एकत्र किया जा रहा है। इस डेटा के आधार पर सरकार कोविशील्ड डोज के बीच के गैप को बढ़ाने के अपने निर्णय के प्रभाव की समीक्षा करने की योजना बना रही है। केंद्र सरकार इस ट्रैकर के डेटा की बुनियाद पर कोविशील्ड के सिंगल डोज को मंजूरी देने पर विचार करेगी।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नए प्लेटफॉर्म के डेटा का अगस्त के आस पास विश्लेषण किए जाने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट में नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) के तहत कोविड वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष डॉ एन के अरोड़ा के हवाले से बताया गया है कि एक प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। यहां क्लीनिकल डेटा, वैक्सीन डेटा और समग्र रोग डेटा के तीन सेट को एक साथ लाया जाएगा। इसके आधार पर, हम वैक्सीन की प्रभावशीलता, पुन: संक्रमण और रुझानों को देखेंगे। अरोड़ा ने जानकारी दी है कि मार्च-अप्रैल में कोरोना वैक्सीन की प्रभावशीलता की स्टडी करने की आवश्यकता पर विचार विमर्श शुरू हुआ था।

रिपोर्ट में सोर्स के हवाले से बताया गया है कि वैक्सिनेशन से जुड़े डेटा की समीक्षा का एक अन्य उद्देश्य यह समझना है कि क्या देश में कोरोना वैक्सीन की सिंगल डोज प्रभावी हो सकती है। इस संबंध में एक तर्क दिया जा रहा है कि अन्य वायरल वेक्टर वैक्सीन सिंगल डोज में उपलब्ध है। यह कोविशील्ड के साथ भी हो सकता है क्योंकि कोविशील्ड की शुरुआत भी सिंगल डोज वैक्सीन के रूप में ही हुई थी।

गौरतलब है कि जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन भी वायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म पर आधारित है। जबकि दो-डोज वाली स्पुतनिक वैक्सीन भी इसी तकनीक के आधार पर सिंगल डोज के रूप में दी जा रही है। सिंगल डोज वाली वैक्सीन से ज्यादा तेजी से अधिक से अधिक आबादी को सुरक्षा दी जा सकती है। मौजूदा समय में भारत में वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण की रफ्तार धीमी है। अगर कोविशील्ड के सिंगल डोज को मंजूरी मिल जाती है तो वैक्सिनेशन की रफ्तार दोगुनी हो जायेगी क्योंकि अभी एक व्यक्ति को कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज दी जाती है, तब दो डोज में दो लोगों का टीकाकरण हो सकेगा।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।) 

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