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Monday, September 20, 2021

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खट्टर सरकार ने दिया बलात्कारी बाबा गुरमीत को पैरोल

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हरियाणा की खट्टर सरकार ने हत्या और दुष्कर्म के अपराधी गुरमीत राम रहीम के प्रति अपना प्यार दिखाते हुए उसे एक दिन के पैरोल पर जेल से बाहर जाने की अनुमति दी। इतना ही नहीं उसके लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का भी आयोजन किया गया। और यह सब कुछ बेहद ही गोपनीय तरीके से किया गया था। जिससे किसी को कानों-कान भनक न लगे।  

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दुष्कर्म और हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बीती 24 अक्तूबर को एक दिन की पैरोल मिली थी। और यह पैरोल ऊपर के बॉस के इशारे पर हरियाणा सरकार ने दिलवाई थी। 

बताया जा रहा है कि राम रहीम की मां गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती हैं और उनसे राम रहीम को मिलवाने के लिए यह पूरी कवायद की गयी।

इससे पहले भी साल 2019 में राम रहीम के पैरोल को लेकर खट्टर सरकार सवालों के घेरे आई थी।  

उस समय भी मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा था कि गुरमीत राम रहीम के पैरोल पर निर्णय राज्य के हितों को ध्यान में रख कर लिया जायेगा। घटना बीते साल हरियाणा विधानसभा चुनाव के पहले की है।

गुरमीत राम रहीम और बीजेपी का पुराना रिश्ता

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2014 में बाबा राम रहीम के डेरे पर बीजेपी डोरे डालने में कामयाब रही थी। राम रहीम का समर्थन लेने के लिए खुद तत्कालीन और वर्तमान केन्द्रीय गृहमंत्री बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने उनसे जाकर मुलाकात की थी। जिसके बाद डेरा सच्चा सौदा ने वोटिंग से तीन दिन पहले हरियाणा और महाराष्ट्र में बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया था। डेरा के इतिहास में ये पहला मौका था जब खुलकर उसने किसी सियासी पार्टी के पक्ष में समर्थन किया था। इस अपील का असर भी हुआ और बीजेपी दोनों सूबों में बहुमत के साथ जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी।

इसलिए शायद इस बार इतनी गोपनीय तरीके से सरकारी खर्चे पर भारी सुरक्षा के बीच उसे पैरोल पर बाहर लाया गया।  

रिपोर्ट के मुताबिक गुरमीत राम रहीम को जिस गाड़ी में बाहर लाया गया, उसमें चारों ओर पर्दे लगे थे और उसकी सुरक्षा के लिए 250 से 300 तक पुलिस जवान लगाये गये थे। यानी हरियाणा पुलिस की तीन कम्पनी को उसकी सुरक्षा में लगाई गयी थी।  

आखिर, इस पर्दादारी के पीछे राज क्या है? 

हरियाणा के जेल मंत्री रणजीत चौटाला का कहना है कि हरियाणा सरकार को राम रहीम की तरफ से पैरोल याचिका मिली थी। इस याचिका में उसने मेदांता अस्पताल में इलाज करवा रही अपनी माता नसीब कौर से मिलने की प्रार्थना की थी। उसको ध्यान में रखते हुए उन्हें एक दिन के लिए कड़ी सुरक्षा में पैरोल दी गई थी और वापस उसी दिन रोहतक की सुनारिया जेल में बंद कर दिया गया है।  

जेल सुपरिंटेंडेंट से मिला था निवेदन 

रोहतक के एसपी राहुल शर्मा ने टाइम्स आफ इंडिया से इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा, ‘हमें जेल सुपरिंटेंडेंट से राम रहीम के गुरुग्राम दौरे के लिए सुरक्षा व्यवस्था का निवेदन मिला था। हमने 24 अक्तूबर को सुबह से लेकर शाम ढलने तक सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। सब कुछ शांति से हुआ।’

बता दें कि गुरमीत राम रहीम बलात्कार के केस में 20 साल की सज़ा काट रहा है। इस मामले में सुनवाई के वक्त उसे पंचकूला जेल तक लाते वक्त पंचकूला सहित हरियाणा और पड़ोसी राज्यों में कानून व्यवस्था नियंत्रण से बाहर हो गयी थी। डेरा सच्चा सौदा के उन्मादी भक्तों ने मीडिया कर्मियों पर हमला किया था और कई ओवी वैन जला दिए थे। सबसे ख़तरनाक बात यह थी कि अदालत के आदेश के बाद भी खट्टर सरकार अदालत के बाहर और राज्यों के अन्य हिस्सों में हिंसक भीड़ को नहीं रोक पायी थी।  जिसके कारण 25 अगस्त 2017 को भड़की हिंसा में पंचकूला और सिरसा में 41 लोगों की मौत हुई थी और 260 से अधिक लोग घायल हुए थे। 

साल 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दरअसल, छत्रपति अपने समाचार पत्र में डेरा से जुड़ी खबरों को प्रकाशित करते थे। पत्रकार छत्रपति की हत्या के बाद परिजनों ने मामला दर्ज कराया था और बाद में उसे सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया। सीबीआई ने 2007 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी और इसमें डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को हत्या की साजिश रचने का आरोपी माना था। इससे पहले 28 अगस्त 2017 को सीबीआई की विशेष कोर्ट ने दो महिलाओं के साथ रेप के मामले में गुरमीत राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई थी।

अपराधी और बलात्कारियों के पक्ष में खड़ा होना, रैली और झंडा यात्रा निकालना बीजेपी के लिए कोई नई बात या अनहोनी घटना नहीं है। आसाराम की गिरफ़्तारी के वक्त भी यह सब कुछ देखने को मिला था। 

वहीं पूर्व बीजेपी नेता और केन्द्रीय मंत्री चिन्मयानन्द भी जमानत पर जेल से बाहर हैं। बीजेपी नेता और उन्नाव रेप केस के आरोपी कुलदीप सेंगर का केस भी सभी जानते हैं। बीते साल बीजेपी के साक्षी महाराज कुलदीप सेंगर से जेल में मिलने गये थे। कठुआ में बलात्कारियों के समर्थन में बीजेपी नेताओं का झंडा यात्रा में शामिल होना सबको याद है। 

अब सवाल है कि आज जब एक तरफ राम रहीम को ख़ुफ़िया तरीके से पैरोल पर सरकारी खर्चे और सुरक्षा के बीच बीमार माँ से मिलाने का खेल चल रहा है, वहीं शरीर से तकरीबन 90 फीसदी विकलांग और गंभीर रूप से बीमार प्रोफेसर जीएन साईबाबा जेल में बंद हैं। जब उनकी मां का आकस्मिक निधन होता है और वह अंतिम दर्शन के लिए पैरोल की अर्जी देते हैं तो उसे खारिज कर दिया जाता है।

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(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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