Monday, January 24, 2022

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राफेल डील में 65 करोड़ की घूस: दस्तावेज के बावजूद सीबीआई-ईडी ने जांच नहीं की

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राफेल लड़ाकू विमानों की डील में भ्रष्टाचार के खुलासे न तो मोदी सरकार का न ही उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ का पीछा छोड़ रहे हैं, जिसने राफेल डील में मोदी सरकार को राष्ट्रवादी मोड में क्लीन चिट दिए जाने का निर्णय सुनाया था। राफेल लड़ाकू विमान डील को लेकर फ्रेंच मैगजीन मीडियापार्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिचौलिए को 65 करोड़ की रिश्वत दी गई थी। इतना ही नहीं यह भी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसकी जानकारी सीबीआई और ईडी को भी थी।

फ्रांस के पोर्टल मीडियापार्ट ने फेक इनवॉयस पब्लिश कर दावा किया है कि फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट ने भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की बिक्री को सुरक्षित करने के लिए एक बिचौलिए को 7.5 मिलियन यूरो (65 करोड़ रुपए) का कमीशन दिया। वहीं, भारतीय एजेंसियों ने डॉक्यूमेंट्स होने के बावजूद इसकी जांच शुरू नहीं की है। पोर्टल का कहना है कि सीबीआई और ईडी के पास अक्टूबर 2018 से सबूत मौजूद हैं कि डसॉल्ट ने राफेल जेट की बिक्री को सुरक्षित करने के लिए सुशेन गुप्ता को रिश्वत दी थी। इस कथित भुगतान का बड़ा हिस्सा 2013 से पहले किया गया था। इससे जुड़े डॉक्यूमेंट मौजूद हैं। इसके बावजूद, भारतीय पुलिस ने केस को आगे नहीं बढ़ाया और जांच शुरू नहीं की है।

फ्रांस का यह ऑनलाइन जर्नल 59,000 करोड़ रुपए के राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहा है। ‘राफेल पेपर्स’ पर मीडियापार्ट की जांच ने जुलाई में फ्रांस में राजनीति काफी गरमा दी थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मामले में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों में न्यायिक जांच शुरू की। सुशेन गुप्ता पर अगस्ता वेस्टलैंड से मॉरीशस में रजिस्टर्ड एक शेल कंपनी के जरिए रिश्वत लेने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक, डसॉल्ट ने 2001 में सुशेन गुप्ता को बिचौलिए के तौर पर हायर किया, इसी समय भारत सरकार ने लड़ाकू विमान खरीदने का ऐलान किया था। हालांकि, इसकी प्रक्रिया 2007 में शुरू हुई। गुप्ता अगस्ता वेस्टलैंड डील से भी जुड़ा था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सुशेन गुप्ता की इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज ने 2007 और 2012 के बीच फ्रांसीसी विमानन फर्म से 7.5 मिलियन यूरो (करीब 65 करोड़ रुपए) हासिल किए। यह भी खुलासा किया है कि मॉरिशस सरकार ने 11 अक्टूबर 2018 को इससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स सीबीआईको भी सौंपे दिए थे, जिसे बाद में सीबीआई ने ईडी से साझा किया। मीडियापार्ट ने दावा किया है कि इस मामले में एक भारतीय आईटी कंपनी आईडीएस भी शामिल है। इस कंपनी ने 1 जून 2001 को इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीस के साथ डील की, जिसमें यह तय हुआ कि डसॉल्ड एविएशन और आईडीएस के बीच जो भी कॉन्ट्रैक्ट होगा, उसकी वैल्यू का 40% कमीशन इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीस को दिया जाएगा। आईडीएस अधिकारी ने सीबीआई को बताया कि यह डील गुप्ता के वकील गौतम खेतान ने की थी, जो अगस्ता वेस्टलैंड मामले में जांच के दायरे में है।

सोमवार 8 नवंबर 21 को जारी अपनी एक रिपोर्ट में मीडियापार्ट ने दावा किया कि उसके पास भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की बिक्री सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट एविएशन की ओर से रिश्वत का भुगतान किए जाने के सबूत हैं। फ्रेंच मैगजीन मीडियापार्ट की ओर से कहा गया है कि बिचौलिए सुशेन गुप्ता को 7.5 मिलियन यूरो (जो लगभग 65 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी गई। इसका भुगतान करने के लिए झूठे चालान का सहारा लिया गया। सुशेन गुप्ता को पहले अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में कथित रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय के पास अक्टूबर 2018 से सबूत हैं कि फ्रांसीसी विमानन फर्म डसॉल्ट ने बिचौलिए सुशेन गुप्ता को गुप्त कमीशन में कम से कम 7.5 मिलियन यूरो (सिर्फ 650 मिलियन रुपये के बराबर) का भुगतान किया।

मीडियापार्ट ने अप्रैल में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें खुलासा किया गया था कि कैसे एक प्रभावशाली भारतीय बिजनसमैन को राफेल निर्माता डसॉल्ट एविएशन और फ्रांसीसी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स फर्म थेल्स की तरफ से गुप्त रूप से लाखों यूरो का भुगतान किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वे लड़ाकू विमान के डील से भ्रष्टाचार विरोधी धाराओं को हटाने में सफल रहे, जिस पर बाद में तत्कालीन फ्रांसीसी रक्षा मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन ने हस्ताक्षर किए थे।

मीडियापार्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सबूत गोपनीय डॉक्यूमेंट्स में मौजूद हैं और यह दो एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही अगस्ता वेस्टलैंड द्वारा वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति से जुड़े घोटाले के मामले में सामने आए हैं। गौरतलब है कि सुशेन गुप्ता को इससे पहले अगस्ता वेस्टलैंड डील में ही कथित रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सुशेन गुप्ता पर अगस्ता वेस्टलैंड से मॉरीशस स्थित इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज में रजिस्टर्ड एक शेल कंपनी के माध्यम से रिश्वत लेने का आरोप है। मॉरीशस के अधिकारियों ने जांच की सुविधा के लिए कंपनी से संबंधित दस्तावेज सीबीआई और ईडी को भेजने पर सहमति व्यक्त की है।

“राफेल पेपर्स” पर मीडियापार्ट के रिपोर्ट्स के कारण ही जुलाई 2021 में फ्रांस में राफेल के सौदे पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों में न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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