मेज डिजाइन करने के पीएम मोदी के प्रस्ताव के इंकार के क्रम में जानिये कुणाल मर्चेंट ने क्या कहा

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नई दिल्ली। भारत में बढ़ती सांप्रदायिकता को देखते हुए, अब उसके खिलाफ आवाज भी उठनी शुरू हो गई है। सबसे पहले किरण मजूमदार शॉ ने सरकार को बेंगलुरु में बिगड़ते माहौल के बारे में मशवरा दिया था, और अब प्रसिद्ध फर्नीचर डिजाइनर कुणाल मर्चेंट ने पीएम मोदी के लिए टेबल बनाने से इंकार कर दिया है क्योंकि वे देश के भीतर नफरत के माहौल को लगातार बढ़ते हुए देख रहे हैं।

कुणाल मर्चेंट ने अपने इंस्टाग्राम में एक स्टोरी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के निजी सचिव के साथ 12 अप्रैल को हुई एक ईमेल बातचीत को साझा किया है। इसमें कुणाल से प्रधानमंत्री के लिए एक खास टेबल को तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया था। इस मेज का इस्तेमाल न सिर्फ पीएम मोदी के द्वारा किया जाना है, बल्कि उनके सभी भावी उत्तराधिकारियों के द्वारा भी इसका इस्तेमाल किया जाना है।

लेकिन कुणाल मर्चेंट ने एक लंबे जवाबी पत्र में कहा है कि कैसे वे देश के भीतर भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक हिंसा को लगातार बढ़ते हुए देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन्होंने हिटलर का समर्थन किया था या फिर नाजी के तौर पर उसके लिए काम किया था इतिहास जिस तरह से आज इन लोगों को देखता है मैं उस तरह से नहीं देखा जाना चाहता हूं। यह कहते हुए उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 

 कुणाल मर्चेंट ने इस ई-मेल वाली  बातचीत को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में पोस्ट किया है।

पीएमओ द्वारा मर्चेंट को भेजा गया ईमेल

प्रिय मर्चेंट जी, हमें आपको यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आपको और आपकी डिजाइन प्रैक्टिस को विशिष्ट रूप से प्रधानमंत्री के इस्तेमाल के लिए एक स्थाई निर्माण/कार्यकारी मेज  को डिजाइन और तैयार करने के लिए चुना है। इस मेज को पीएमओ में रखा जाएगा और भविष्य के प्रधानमंत्रियों के द्वारा भी इसे इस्तेमाल में लिया जायेगा।

विवेक कुमार

पीएम के निजी सचिव

इस संदेश का कुणाल मर्चेंट द्वारा दिया गया जवाब

प्रिय विवेक कुमार जी,

ऐसे लब्धप्रतिष्ठ प्रोजेक्ट के लिए मुझे और मेरी प्रैक्टिस पर विचार करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। दुर्भाग्यवश मेरे राजनीतिक और सामाजिक विचारों के चलते मैं बेहद आदरपूर्वक इस अवसर को ठुकरा रहा हूं, और चाहता हूँ कि इस काम के लिए मेरे नाम पर विचार न किया जाये।

यदि चीजें कुछ अलग होतीं और मैं इस प्रोजेक्ट पर काम करने में खुद को समर्थ पाता, तो मैं इस प्रोजेक्ट को अवश्य करता। मैं इस मेज को ‘स्वराज डेस्क’ कहना पसंद करता, बिल्कुल ‘द रेसोल्यूट डेस्क’ की तरह जिसके पीछे संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति बैठते हैं।

मैं इस मेज को देश भर में मौजूद लकड़ी और कच्चे पदार्थों से तैयार करता, हमारी एकता, भ्रातृत्व और विविधता को प्रतीक रूप में प्रस्तुत करने के लिए।

हालांकि मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि मैं सबसे पहले एक गांधीवादी हूं और अहिंसा, और सिविल नाफरमानी के जरिए सामाजिक बदलाव पर यकीन करता हूं। मैंने इसे सबसे पहले उन पहली पीढ़ी के लोगों से जाना, जो लोग गांधी जी के साथ काम कर चुके हैं कि स्वराज के असली मायने क्या हैं। गांधीजी चाहते थे कि हर भारतीय खुद की किस्मत का मालिक हो, भले ही इसका अर्थ ब्रिटिश राज से मुक्ति हो या किसी अन्य औपनिवेशिक ताकत से, यह मायने नहीं रखता – उनका संदेश वही था, ‘स्वराज का अर्थ था स्वशासन, यानि प्रत्येक भारतीय को खुद का मालिक होना होगा, किसी भी विदेशी मालिक का प्रतिरोध या उसे उखाड़ फेंकने से पहले।’ एक डिजाइनर और क्रिएटर के रूप में मैंने इसका अर्थ यह लगाया है कि एक अच्छा डिजाइनर बनने के लिए पहला कदम यह होगा कि मुझे अपनी जिंदगी का मालिक बनना होगा।

डिजाइन की विधा में, एक इंसान खुद का ही दुश्मन बन जाता है और उसे अपने अहंकार, संशय, फैसलों, और धारणाओं को परास्त करने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कला, डिजाइन या क्रिएटिविटी के सभी क्षेत्रों में खुद को आजाद बनाये रखने और किसी पूर्वाग्रह, फैसला, और नैतिकता के पचड़े में पड़ने से बचने के लिए यह सबसे  महत्वपूर्ण चीज है। मैंने पाया है कि आपकी सरकार और इसकी नीतियां अपनी कार्यवाही और लाग-लपेट में हमेशा लोगों के भीतर की मुक्तिकामी भावनाओं का गला घोंटने की कोशिश में लगी रहती हैं और इसकी जगह पर दुनिया की हमारी समझ, हमारे इतिहास और आम लोगों के रूप में हम जिस और धकेले जा रहे हैं, उसे आसान, कुंठित और सुलभ समझ से प्रतिस्थापित करने में जुटी हुई है।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मैं बुनियादी तौर पर अपने मौजूदा प्रधानमंत्री और सत्ताधारी पार्टी की राजनीति और नीतियों के विरुद्ध रहा हूँ। जिस भारत को आप सभी लोग बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वह अतीत में कभी भी अपने अस्तित्व में नहीं था। वर्तमान में इसका कोई आधार नहीं है और भविष्य में भी इसका कोई अख्तियार नहीं रहने वाला है। आपका भारत पूर्वाग्रह, नफरती, अनन्य और नस्लवादी है। मेरा भारत धर्मनिरपेक्ष, सबको साथ लेकर चलने वाला, समावेशी, सहनशील और एक सभ्यतागत शक्ति है जिसका 7000 साल का बाहर से आने वाले लोगों को स्वीकारने और खुद में समाहित करने का रिकॉर्ड रहा है।

जहां एक तरफ मेरे 20% साथी नागरिक गरीबी की रेखा से नीचे अपना जीवन गुजार रहे हैं और जबकि मेरे 22% साथी नागरिक जो मुसलमान हैं, आपकी सरकार और उसकी नीतियों के चलते हाशिये पर रहते हुए किसी तरह जिंदा रहने के लिए मजबूर कर दिए गए हैं। मैं ऐसी सरकार के मुखिया के लिए एक मेज की डिजाइन और तैयार करने में नैतिक रूप से अक्षम पा रहा हूँ, जिस पर अल्पसंख्यकों को और भी अलग-थलग करने और अधिकारों से वंचित करने के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कानूनों और नीतियों को तैयार किया जाएगा।

कृपया याद रखिए कि इतिहास ने नाजियों के समर्थकों, आपूर्तिकर्ताओं और प्रचार-प्रसार करने वालों के साथ नाजियों के तौर पर ही व्यवहार किया है। मैं इस शासन के साथ ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता हूं और न ही अपनी ओर से कोई योगदान देना चाहता हूं, ताकि इतिहास मुझे भी आपके नस्लवाद, फासीवाद, आसान और बाइनरी वाली सोच के साथ आपकी ठगी में साझीदार के तौर पर याद रखे। एक डिजाइनर के तौर पर, मैं अपने आस-पास के लोगों की जिंदगी की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करना चाहता हूं।

पीएमओ के लिए एक मेज का निर्माण और आपके शासन में योगदान करना, न सिर्फ इस ब्रहमांड में मेरी कर्म शक्ति को घटाने वाला साबित होगा, बल्कि यह मेरी ओर से अपने दोस्तों, परिवार और कर्मचारियों के साथ धोखा और अपमानित करने जैसा होगा, जो कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं, अल्पसंख्यक हैं, एलजीबीटीक्यू समुदाय का हिस्सा हैं, या दलित हैं और अनुसूचित जातियों से आते हैं। सिर्फ तभी जब हम वास्तव में ‘बिना किसी अपवाद के’ इस बात को समझें, तो मैं पूरे गर्व के साथ और अपने पूरे आंतरिक उतावलेपन और विश्वास के साथ राज्य के प्रमुख के लिए एक ‘स्वतंत्र टेबल’ को तैयार करने के लिए समर्थ हो सकता हूं। तब तक मेरा सुझाव है कि आप अपनी मेज के लिए किसी दूसरे डिजाइनर और बनाने वाले को ढूंढ लें।

शुभकामनाओं सहित

कुणाल मर्चेंट

(यह लेख ग्राउंड रिपोर्ट पोर्टल से लिया गया है जिसका अनुवाद रविंद्र पटवाल ने किया है।)

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