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महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत कई नेता नजरबंद

जम्मू-कश्मीर में कुछ भी सामान्य नहीं है। राज्य में दहशत और डर का माहौल बढ़ता जा रहा है। इसी बीच रविवार रात बारह बजे श्रीनगर में तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया। संपूर्ण राज्य में रात 12 बजे से धारा-144 लागू कर दी गई है। इतना ही नहीं राज्य में रैलियों और सभा पर रोक के साथ ही मोबाइल ,इंटरनेट और केबल को भी बंद कर दिया गया है। राज्य के सभी स्कूल-कॉलेज में छुट्टी कर दी गई है। अच्छी बात यह है कि अभी तक सरकार ने जम्मू-कश्मीर में पानी-बिजली की आपूर्ति नहीं बंद की है।
जम्मू-कश्मीर में यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया है। केंद्र सरकार इसकी तैयारी काफी पहले से कर रही थी। यह बात अलग है कि इस योजना में मोदी-शाह की जोड़ी ने केंद्र सरकार को शामिल नहीं किया है। भारत सरकार के मंत्रियों तक को नहीं पता है कि घाटी में क्या होने जा रहा है। मोदी-शाह और उनके कुछ विश्वस्त अधिकारियों के अलावा किसी को कुछ पता नहीं है। जम्मू-कश्मीर के नागरिक, राजनेता और अधिकारियों के साथ ही केंद्र सरकार के मंत्री भी आश्चर्यचकित हैं कि आखिर जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार की नीति क्या है?
यह बात सही है कि जम्मू-कश्मीर में जो कुछ हो रहा है वह एक सोची समझी योजना के तहत किया जा रहा है। कश्मीर में ऐसे ही नहीं हजारों जवानों को भेजा गया। जो अमरनाथ य़ात्रा आतंकवाद के चरम दौर में भी बीच से नहीं बंद हुआ उसे मोदी-शाह की जोड़ी ने एक झटके में बंद कर दिया। विपक्ष ने जब सवाल किया तो जवाब आया कि घाटी में सब कुछ सामान्य है। जम्मू-कश्मीर में तो सब कुछ सामान्य है लेकिन केंद्र सरकार जो कर रही है वो अप्रत्याशित होने के साथ ही जनविरोधी और असामान्य है।
प्रशासन ने पहले ही जम्मू-कश्मीर में पढ़ने वाले बाहर के छात्रों को उनके घर भेजना शुरू कर दिया था। जम्मू विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया है। कई शैक्षणिक संस्थानों ने भी अपने छात्रों को हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया है। यात्रियों, पर्यटकों, बाहरी मजदूरों, और क्रिकेटरों को भी हटाया जा रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार की मंशा क्या है ? सरकार और गृहमंत्री की तरफ से इस पर कोई बयान नहीं आया है। लेकिन सोशल मीडिया पर एक बहस आम है कि सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा- 35 (ए) हटा सकती है। संविधान की यह धारा जम्मू-कश्मीर के लोगों को विशेष रियायत देती है। लेकिन धारा-35(ए) की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। ऐसे में यह सवाल भी प्रासंगिक है कि क्या कोरेट में विचाराधीन किसी मुद्दे को सरकार हटा सकती है। धारा 35(ए) और धारा-370 को हटाने के लिए तो संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। तो क्या संविधान में संशोधन करने के पहले सरकार जम्मू-कश्मीर में होने वाली प्रतिक्रिया को डरा-धमका कर दबाने की कोशिश सुरू कर दी है।
घाटी में भय और आशंका चरम पर
प्रशासन जिस तरह से नेताओं की गिरफ्तारी और नजरबंदी कर रही है उससे घाटी में डर और आशंका के बादल चरम पर हैं। कांग्रेस नेता उस्मान मजीद और माकपा विधायक एमवाई तारिगामी को रात में हिरासत में ले लिया गया। कल जम्मू-कश्मीर में जनता ने भारी पैमाने पर खरीदारी करते देखे गए।
नेशनल कांफ्रेस के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रात 11.30 बजे ट्वीट किया, ‘‘मुझे लगता है कि आज आधी रात से मुझे घर में नजरबंद किया जा रहा है। अन्य नेताओं के लिए भी यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई है। इसकी सच्चाई जानने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन अगर यह सच है तो फिर आगे देखा जाएगा। हमें नहीं मालूम कि कश्मीर के लोगों के लिए क्या किया जा रहा है। लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि अल्लाह ने जो भी सोचा है वह हमेशा बेहतर होगा। हमें शायद यह नजर नहीं आए, लेकिन हमें कभी उनके तरीकों पर शक नहीं करना चाहिए। सभी को शुभकामनाएं। सुरक्षित रहें और सबसे जरूरी शांति बनाए रखें।’’
महबूबा ने रात 11.34 बजे ट्वीट किया, ‘‘घाटी में इंटरनेट बंद किया जा रहा है, ये रात लंबी होने वाली है। मोबाइल कवरेज समेत इंटरनेट सेवाएं बंद होने की खबरें सुनाई पड़ रही हैं। कर्फ्यू पास भी जारी किए जा रहे हैं। ऊपरवाला ही जानता है कि कश्मीर में कल क्या होगा। मुझे लगता है कि यह एक लंबी रात होने जा रही है।’’

This post was last modified on August 5, 2019 11:27 am

प्रदीप सिंह

लेखक डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

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