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पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के ‘भारत बंद’ का भूकंप, नोएडा-ग़ाज़ियाबाद बॉर्डर बना विरोध का केंद्र

संसद से पारित कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों का राष्ट्रव्यापी गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। इसके तहत किसानों ने पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश में पूरी बंदी अमल कराई और तेलंगाना, शेष उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल व अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर राजमार्ग बंद रखे व विरोध सभाएं कीं।

‘भारत बंद’ के चलते सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त दिखे रहा है। अब तक पंजाब और हरियाणा की तुलना में शांत रहा उत्तर प्रदेश आज पूरी तरह से विरोध के मूड़ में दिखा। उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों, कस्बों और गावों में किसान विरोध रैली निकाल रहे हैं।

ग़ाज़ियाबाद और नोएडा की सीमा पर प्रदर्शनकारी किसानों को पुलिस ने रोक दिया है। भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने सड़क जाम कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने बल का प्रयोग करते हुए उन्हें तितर-बितर किया। लोगों को आने-जाने के लिए मुख्य रास्ते को पुलिस ने डायवर्ट कर दिया है। हालांकि परेशानी से बचने के लिए अधिकांश बाज़ार और व्यावसायिक संस्थान आज बंद ही हैं। वहीं कामकाजी लोगों ने भी दफ्तर से आज छुट्टी ले रखी है। गाजियाबाद-नोएडा के बॉर्डर पर पुलिस ने बैरिकेड लगाकर सील कर दिया है ताकि किसान दिल्ली में न घुस सकें ।

दिल्ली-मेरठ हाईवे को किसानों ने पूरी तरह से बंद करके रखा है।

पंजाब के किसान रेल ट्रैक पर ऐसे बैठे हैं कि पता ही नहीं चल रहा है कि वहां कोई रेलवे ट्रैक भी है।

उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों में किसानों ने विरोध रैली निकाला है। नागरिक समाज के लोग भी किसानों के समर्थन में ‘नरेंद्र मोदी, किसान विरोधी’ और किसान बिल वापस लो के पोस्टर बैनर लेकर सड़क पर उतरे हैं।

कानपुर में ऑल इंडिया किसान महासंघ के बैनर तले किसान विरोधी बिल के खिलाफ़ सड़कों पर हैं।

राजस्थान में भी सुबह से ही जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन चल रहा है।

एंबुलेंस जैसी ज़रूरी सेवा को नहीं रोक रहे प्रदर्शनकारी किसान

तमाम ‘भारत बंद’ में सत्ता और प्रशासन के लोग  प्रदर्शनकारियों पर ये आरोप लगाते आए हैं कि इसमें एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को रोका गया है। लेकिन आज के ‘भारत बंद’ में कई जगह से इस तरह के वीडियो आए हैं जहां एंबुलेंस जैसी आपातकाल सर्विस की स्थिति में किसान चक्का जाम हटाकर एंबुलेंस को फौरन आगे जाने का रास्ता दे रहे हैं।

पंजाब सरकार ने पंजाब पुलिस को प्रदर्शनकारियों के प्रति नरमी बरतने का आदेश दिया

पंजाब की कांग्रेस सरकार ने पंजाब पुलिस-प्रशासन को यह हिदायत दी है कि पंजाब बंद के दौरान किसानों के प्रति नरम रवैया अपनाया जाए और उन पर कोई सख्ती या जबरदस्ती न की जाए। इसके साथ ही एंबुलेंस सेवा, सिविल सर्जनों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को भी तैयार रहने को कहा गया है ताकि प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना में घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सके।

एक बयान में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा है कि “राज्य सरकार विधेयकों के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह किसानों के साथ है और धारा 144 के उल्लंघन के लिए प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी। हड़ताल के दौरान कानून-व्यवस्था की दिक्कतें पैदा नहीं करनी चाहिए। साथ ही किसानों को भी ये ध्यान रखना चाहिए कि नागरिकों को किसी तरह की दिक्कतें नहीं हों और आंदोलन के दौरान जान-माल को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होना चाहिए।

यूथ कांग्रेस ने भारत के समस्त राज्यों में निकाला मशाल रैली

किसान विरोधी बिल के खिलाफ़ और किसानों के भारत बंद के समर्थन में कल रात कांग्रेस की यूथ विंग ने समूचे भारत के हर एक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में मशाल रैली निकाली। पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश ग्वालियर, नागपुर, छत्तीसगढ़, महिदपुर इंदौर, हरियाणा खरगौन, उज्जैन, खंडवा, रीवां, वाराणसी, उत्तराखंड, तमिलनाडु, बिहार, सहारनपुर, कानपुर, इलाहाबाद आंध्र प्रदेश, दादरा नगर हवेली, पंजाब, गोवा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गुजरात समेत लगभग देश के हर राज्य के मुख्य शहरों में किसानों के समर्थन में युवा कांग्रेस ने मशाल रैली निकालकर संदेश दिया कि कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है।

वहीं कांग्रेस पार्टी दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसानों के समर्थन में विरोध रैली निकाल रही है। ये रैली दोपहर 12 बजे शुरु हुआ।

पटना में भाजपा कार्यकर्ता और जाप के बीच भिंड़त

किसानों के विरोध रैली से भन्नाए भाजपा कार्यकर्ता ने बिहार की राजधानी पटना में पप्पू यादव की पार्टी जाप के समर्थकों के बीच भिड़ंत हो गई। ये भिड़ंत भाजपा ऑफिस के बाहर हुई जब वहां से जाप कार्यकर्ता किसानों के समर्थन में विरोध जुलूस लेकर जा रहे थे।

इलाहाबाद में विरोध-जुलूस

इलाहाबाद में आयोजित विरोध में कई किसान संगठन, ट्रेड यूनियन संगठन, छात्र व नागरिक संगठन मौजूद रहे। खेती के नए कानून, नया बिजली बिल 2020 और डीजल-पेट्रोल के दाम में वृद्धि के विरोध में नारे लगाए गये। धरना बालसन चौराहे पर हुआ जिसे एआईकेएमएस महासचिव डा. आशीष मित्तल, एआईकेएस के भूपेन्द्र , पाण्डेय, एआईकेएस के उदय नरायण पटेल, एआईकेएम के सुभाष पटेल, सीटू के रविशंकर मिश्र, रामसागर, गिरिधर गोपाल त्रिपाठी, नसीम अंसारी, मुन्नी लाल, अनु सिंह, एआईकेएमएस के करन व गौतम गांगुली, मुस्तकीम, अखिल विकल्प, विकास स्वरूप, राजवेन्द्र सिंह, आशुतोष तिवारी, मोहम्मद ख़ालिद, प्रदीप ओबामा, चन्द्रावती, इफ्टू के संतराम कुशवाहा, सीमा आज़ाद, विश्व विजय, गायत्री गांगुली ने संबोधित किया। सभा की अध्यक्षता गिरिधर गोपाल त्रिपाठी तथा संचालन भूपेंद्र पाण्डेय ने किया ।

एआईकेएमएस के नेतृत्व में घूरपुर बाजार में एक विशाल जुलूस निकाला गया जिसमें बड़ी संख्या में मजदूरों ने नारे लगाते हुए, खेती के नए कानून, नया बिजली बिल तथा उत्तर प्रदेश सरकार के 24 जून, 2019 के गैर कानूनी शासनादेश जो केवल जमुना नदी में, केवल प्रयागराज जिले में, नाव द्वारा खनन पर रोक लगाता है का पुतला फूंका।

इलाहाबाद में विरोध-जुलूस निकालकर एक सभा की गई। जहां वक्ताओं ने कहा कि सरकार इन कानूनों को जबरन अमल करके विदेशी कम्पनियों व बड़े निजी प्रतिष्ठानों को सरकारी मंडियों के बाहर अपनी निजी मंडियां स्थापित करने की अनुमति दे रही है और इन ‘गरीब’ महारथियों को सभी टैक्सों से भी मुक्त कर रही है, किसान इस बात को समझ गये हैं कि इनके आने से सारी सरकारी खरीद, सरकारी भंडारण और राशन में अनाज की आपूर्ति समाप्त कर दी जाएगी। आज तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि अच्छी फसल पैदावार के बाद प्रतिष्ठानों ने सरकारी रेट से बेहतर रेट दिया हो। आरएसएस-भाजपा नेतृत्व वाली मोदी सरकार जो कारपोरेट हितों की सेवक है, किसानों व देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है और ढोंग रचकर दावा कर रही है कि विदेशी कम्पनियां अच्छा रेट देंगी।

वक्ताओं ने कहा कि मंडी बिल को दाम आश्वासन और ठेका खेती बिल को आमदनी आश्वासन कह कर धोखा देने की कोशिश की गई है। वे इन्हें आत्मनिर्भर विकास व किसानों का सुरक्षा कवच बताने का नाटक कर रहे हैं। ये कानून वास्तव में ‘सरकारी मंडी बाई पास’ तथा किसानों को ‘कारपोरेट जाल मे फंसाने’ के कानून हैं। किसानों की कोई बेड़ी नहीं खुलेगी, क्योंकि ग्रामीण मंडियां निजी कारपोरेशन के कब्जे में होंगी, किसान अनुबंध खेती द्वारा उनसे बंधे होंगे और उनकी जमीनें निजी सूदखोरों के हाथों गिरवी रखी होंगी। ये कानून उदारीकरण नीति का गतिमान रूप हैं और इनके अमल से किसानों पर कर्जे बढ़ेंगे और आत्म हत्याएं तेज होंगी।

इन कानूनों के द्वारा सरकार ने देश के खाद्यान्न सुरक्षा पर गम्भीर हमला किया है। उसने सभी अनाज, दालें, तिलहन, आलू व प्याज को आवश्यक वस्तुओं के माध्यम से नियमन से मुक्त कर दिया है। इसका नया कानून असल में ‘कालाबाजारी की मुक्ति’ का कानून है, जिसमें फसल खरीद पर नियंत्रण करने वाले प्रतिष्ठानों को जमा खोरी व काला बाजारी की पूरी छूट होगी और 75 करोड़ राशन के लाभार्थियों को मजबूरन खुले बाजार से अनाज खरीदना होगा।

वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व केन्द्रीय कृषि मंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी खरीद और एमएसपी को जारी रखने की बात कह कर वह देश के लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भी ये दोनो चीजें बहुत कम ही अमल की जाती हैं और सरकार को इनको अमल करने के लिए बाध्य करने का कोई कानून मौजूद ही नहीं है। फिर भी सरकार ने विदेशी कम्पनियों का कृषि बाजार पर नियंत्रण करने देने का कानून बनाया है।

किसानों ने हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल का गांव में प्रवेश कर दिया मुश्किल, रास्ता रोककर किया कृषि विधेयकों का विरोध

जंतर-मंतर पर भी आज वाम दलों के नेतृत्व में बड़ा जमावड़ा हुआ। इस मौके पर नेताओं सरकार से किसान विरोधी विधेयकों को वापस लेकर जनता की भावनाओं का सम्मान करने की गुजारिश की। उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और उसकी भावनाओं को कुचल कर कोई भी व्यवस्था नहीं चलायी जा सकती है।

इस मौके पर वाम दलों के तमाम नेता मौजूद थे।

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This post was last modified on September 25, 2020 3:57 pm

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