Saturday, January 22, 2022

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गृहमंत्री शाह के साथ भी किसानों की बैठक बेनतीजा रही, आज की वार्ता पर संशय

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नई दिल्ली। भारत बंद के बाद रात में गृहमंत्री अमित शाह और किसान नेताओं के बीच हुई बैठक में भी कोई नतीजा नहीं निकला। आनन-फानन में बुलाई गयी इस बैठक में कुल 13 नेता शामिल थे। पहले बैठक की जगह को लेकर भ्रम बना रहा उसके बाद यह पता चलने पर कि बैठक अमित शाह के घर पर हो रही है कुछ नेताओं ने वहां जाने से इंकार कर दिया। फिर पूसा स्थित आईसीएआर में आखिर बैठक तय हुई। यहां किसान नेताओं के साथ बातचीत में अमित शाह ने एक बार फिर वही कानून में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव दिया जिसे किसानों ने खारिज कर दिया। उनका कहना था कि कानून रद्द करने से कम पर कोई समझौता नहीं। और सभी किसान नेता कानून को खत्म करने की अपनी मांग पर बने रहे।

हालांकि छठे चक्र की वार्ता आज होनी है लेकिन किसानों का कहना है कि वो उसमें भाग नहीं लेंगे और पहले सरकार के प्रस्तावों पर बातचीत के लिए बैठक करेंगे। आज केंद्रीय कैबिनेट की भी बैठक होनी है। किसान नेताओं का कहना था कि सरकार का संशोधन भेजने का प्रस्ताव बताता है कि वह कानून को रद्द करने के लिए तैयार नहीं है। तीन घंटे लंबी चली बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सीपीएम नेता और आल इंडियान किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि “आज की बैठक में गृहमंत्री ने इस बात को साफ कर दिया कि सरकार कानून नहीं रद्द करेगी। उन्होंने बताया कल (आज) सरकार उन संशोधनों को लिखकर देगी जिसे वह करने के लिए तैयार है…..संशोधनों से कुछ नहीं होने वाला है हम पूरा कानून ही रद्द करवाना चाहते हैं। हम संशोधनों को स्वीकार ही नहीं करेंगे। हम चाहते हैं कि पूरा कानून रद्द हो”।

मोल्लाह ने कहा कि “कल (आज) हमारी सिंघु बॉर्डर पर बैठक होगी उसके बाद ही अगले चक्र की वार्ता के बारे में आपको कोई जानकारी दे पाएँगे”।  मोल्लाह ने कहा कि “एक और बैठक होने की कोई उम्मीद नहीं है। आज की बैठक में कुछ निकल कर नहीं आया…..हम कल की बैठक में भाग नहीं लेंगे। वो कल एक पत्र देंगे। लेकिन वो जो भी उसमें लिखकर देने के लिए तय किए हैं उसे हम स्वीकार नहीं करेंगे। फिर से बैठक का कोई सवाल ही नहीं है”।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मोल्लाह ने कहा कि “बैठक बेकार थी……हम लोगों ने एकमत से उन्हें बता दिया कि हम संशोधन नहीं चाहते हैं हम कानून को रद्द करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कानून रद्द करना संभव नहीं है। उसमें कठिनाई है। हमने कहा कि हम लोगों की कोई दूसरी मांग नहीं है।”

उन्होंने कहा कि “सभी किसान संगठनों के नेताओं की कल सिंघु बार्डर पर दोपहर में बैठक होगी। अगर सरकार केवल संशोधन के बारे में बात करेगी तो उस पर आगे बात करने का कोई फायदा नहीं है….रिश्ता खत्म हो जाएगा।”

हरियाणा भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि “कल किसानों और सरकार के बीच कोई बैठक नहीं होगी”। उन्होंने कहा कि “सरकार कल अपने प्रस्ताव भेजेगी। हम उस पर बात करेंगे और फिर तय करेंगे कि एक और बैठक की जरूरत है भी या नहीं। बातचीत में आज कोई प्रगति नहीं हुई। सरकार ने संशोधन का प्रस्ताव दिया जिसे हम लोगों ने खारिज कर दिया”।

इसके पहले दिन में जब किसानों को शाह से बातचीत के बारे में पता चला तो उन्हें एक ही उत्तर जानना था हां या ना। पीटीआई के मुताबिक किसान नेता रुल्दू सिंह मानसा ने सिंघु बार्डर पर हुए प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वहां कोई बीच का रास्ता नहीं है। हम गृहमंत्री के साथ बातचीत में केवल हां या ना का उत्तर चाहेंगे। शाह के साथ किसानों की यह पहली बैठक थी। रात 8 बजे से शुरू हुई यह बैठक तकरीबन 11 बजे तक चली। हालांकि बैठक को लेकर तमाम किसान नेताओं के बीच कुछ विवाद भी रहा।  

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