Thursday, October 28, 2021

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म्यांमार में सैन्य तख्ता पलट, आंग शान सू की समेत कई नेता हिरासत में

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पड़ोसी देश म्यांमार में आज सुबह सत्ताधारी आंग शान सू की समेत तमाम नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद देश की सेना ने टीवी चैनल पर एलान किया कि म्यांमार में अगले एक साल तक आपातकाल रहेगा। इसके साथ ही सेना द्वारा म्यांमार की सत्ता सैन्य प्रमुख मिन आंग लाइंग को सौंपते हुए उन्हें कार्यकारी राष्ट्रपति नियुक्त किया है। इस एलान के बाद से ही म्यांमार की राजधानी नेपीटाव और मुख्य शहर यंगून में सड़कों पर सैनिक मौजूद हैं। इससे पहले सेना ने सोमवार को संसद की बैठक को स्थगित करने का आह्वान किया था।

सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के प्रवक्ता म्यो नुएंत ने न्यूज एजेंसी एएफपी से बताया है कि , म्यांमार की नेता आंग सान सू की और सत्तारूढ़ पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को सोमवार तड़के गिरफ्तार किया।   

म्यांमार की नेता आंग सान सू और सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर वहां की सेना ने एक साल के लिए इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। म्यांमार की आर्मी ने ये तख्तापलट इस आरोप की आड़ में किया गया है कि देश में नवंबर 2020 में हुए चुनावों में धांधली की गई है। बता दें कि चुनाव में आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी।

बीती 8 नवंबर को आए चुनावी नतीजों में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने 83% सीटें जीत ली थीं। इस चुनाव को म्यांमार में आंग सान सू ची सरकार के जनमत संग्रह के रूप में देखा गयाा। साल 2011 में सैन्य शासन ख़त्म होने के बाद से ये दूसरा चुनाव था. इस चुनाव में मात खाने के बाद म्यांमार सेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति और चुनाव आयोग के अध्यक्ष के ख़िलाफ़ शिकायत की थी। बता दें कि म्यांमार की संसद में सेना के लिए एक-चौथाई सीटें आरक्षित हैं। 

म्यांमार की सेना द्वारा चुनाव परिणाम में धांधली पड़ोसी देश म्यांमार में आज सुबह सत्ताधारी आंग शान सू की समेत तमाम नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद देश की सेना के टीवी चैनल पर एलान किया गया कि म्यांमार में अगले एक साल तक आपातकाल रहेगा। इसके साथ ही सेना द्वारा म्यांमार की सत्ता सैन्य प्रमुख मिन आंग लाइंग को सौंपते हुए उन्हें कार्यकारी राष्ट्रपति नियुक्त किया हैै। इस एलान के बाद से ही म्यांमार की राजधानी नेपीटाव और मुख्य शहर यंगून में सड़कों पर सैनिक मौजूद हैं। इससे पहले सेना ने सोमवार को संसद की बैठक को स्थगित करने का आह्वान किया था।

सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के प्रवक्ता म्यो नुएंत ने न्यूज एजेंसी एएफपी से बताया है कि, म्यांमार की नेता आंग सान सू की और सत्तारूढ़ पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को सोमवार तड़के गिरफ्तार किया गया.l।

म्यांमार की नेता आंग सान सू और सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर वहां की सेना ने एक साल के लिए इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। म्यांमार की आर्मी ने ये तख्तापलट इस आरोप की आड़ में किया गया है कि देश में नवंबर 2020 में हुए चुनावों में धांधली की गई है। बता दें कि चुनाव में आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। बीती 8 नवंबर को आए चुनावी नतीजों में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने 83% सीटें जीत ली थीं।

इस चुनाव को म्यांमार में आंग सान सू की सरकार के जनमत संग्रह के रूप में देखा गया। साल 2011 में सैन्य शासन ख़त्म होने के बाद से ये दूसरा चुनाव था। इस चुनाव में मात खाने के बाद म्यांमार सेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति और चुनाव आयोग के अध्यक्ष के ख़िलाफ़ शिकायत की थी। बता दें कि म्यांमार की संसद में सेना के लिए एक-चौथाई सीटें आरक्षित हैं।

म्यांमार की सेना द्वारा चुनाव परिणाम में धांधली के आरोप के बाद से ही चुनी हुई ‘नागरिक सरकार’ और म्यांमार सेना के बीच भारी तनाव चल रहा था। हालांकि म्यांमार की सेना कोर्ट में साबित नहीं कर सकी कि चुनाव में धांधली हुई है। म्यांमार के चुनाव आयोग ने भी सेना के आरोपों को सिरे से नकार दिया था। लेकिन बावजूद इन सबके लंबे समय तक म्यांमार पर राज करने वाली म्यांमार आर्मी ने एक बार फिर म्यांमार में लोकतान्त्रिक सरकार को गिराकर तख्तापलट कर दिया है।

पर असल बात ये है कि म्यांमार में आंग सान सू की पार्टी एनएलडी ने नवंबर महीने में हुए चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी जबकि उनकी तुलना में सेना को बहुत कम सीटों पर जीत मिली थी। इस चुनाव परिणाम के बाद से ही सेना को ये डर था कि सरकार में उसका प्रभाव कम हो सकता है। इसीलिए म्यांमार की सेना ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाते हुए काफी दिनो से तख्तापलट के फ़िराक़ में थी।

म्यांमार सेना द्वारा एक चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करने की घटना की दुनिया भर में निंदा हुई है। यूनाइटेड किंगडम, जापान, भारत, चीन, यूरोपियन यूनियन ने तख्तापलट की कड़ी निंदा करते हुए नेताओं की रिहाई की अपील की है।

वहीं अमेरिका ने म्यांमार मिलिट्री से सख्त जुबान में कहा है कि आंग सान सू की समेत हिरासत में लिए गए तमाम लीडरों को तुरंत रिहा कर दिया जाए। अन्यथा अमेरिका की तरफ से प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहेंं।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन पेस्की ने कहा है कि, “अमेरिका को इस बात की जानकारी मिली है कि म्यांमार की सेना ने स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और अन्य अधिकारियों को हिरासत में लेने समेत देश की लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया को कमजोर करने के लिए कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा राष्ट्रपति बाइडेन को जानकारी दी गई हैै।”

उन्होंने कहा कि हम बर्मा (म्यांमार) की लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ संपर्क में हैं। हम सेना और अन्य सभी दलों से लोकतांत्रिक मानदंडों और कानून का पालन करने तथा हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का आग्रह करते हैं।

व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका हालिया चुनाव परिणामों को बदलने या म्यांमार की लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया को बाधित करने के किसी भी तरह के प्रयास का विरोध करता है। इन कदमों को वापस नहीं लिया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और बर्मा के लोगों के साथ खड़े हैं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी (Jen Psaki) ने म्यांमार में हुए तख्तापलट पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि ‘अमेरिका म्यांमार में हुए लोकतान्त्रिक चुनावों के परिणामों को बदलने या लोकतान्त्रिक ढाँचे को बदलने के किसी भी प्रकार के प्रयास का विरोध करता है। अगर ये प्रयास वापस नहीं लिया गया तो जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं वे कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

चुनी हुई ‘नागरिक सरकार’ और म्यांमार सेना के बीच भारी तनाव चल रहा था। हालांकि म्यांमार की सेना कोर्ट में साबित नहीं कर सकी कि चुनाव में धांधली हुई है। म्यांमार के चुनाव आयोग ने भी सेना के आरोपों को सिरे से नकार दिया था। लेकिन बावजूद इन सबके लंबे समय तक म्यांमार पर राज करने वाली म्यांमार आर्मी ने एक बार फिर म्यांमार में लोकतान्त्रिक सरकार को गिराकर तख्तापलट कर दिया है।

पर असल बात ये है कि म्यांमार में आंग सान सू की पार्टी एनएलडी ने नवंबर महीने में हुए चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी जबकि उनकी तुलना में सेना को बहुत कम सीटों पर जीत मिली थी। इस चुनाव परिणाम के बाद से ही सेना को ये डर था कि सरकार में उसका प्रभाव कम हो सकता। इसीलिए म्यांमार की सेना ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाते हुए काफी दिनो  से तख्तापलट के फ़िराक़ में थी। 

म्यांमार सेना द्वारा एक चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करने की घटना की दुनिया भर में निंदा हुई है। यूनाइटेड किंगडम, जापान, भारत, चीन, यूरोपियन यूनियन ने तख्तापलट की कड़ी निंदा करते हुए नेताओं की रिहाई की अपील की है।

वहीं अमेरिका ने म्यांमार मिलिट्री से सख्त जुबान में कहा है कि आंग सान सू की समेत हिरासत में लिए गए तमाम लीडरों को तुरंत रिहा कर दिया जाए। अन्यथा अमेरिका की तरफ से प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहें।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन पेस्की ने कहा है कि, “अमेरिका को इस बात की जानकारी मिली है कि म्यांमार की सेना ने स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और अन्य अधिकारियों को हिरासत में लेने समेत देश की लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया को कमजोर करने के लिए कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा राष्ट्रपति बाइडेन को जानकारी दी गई है।”

उन्होंने कहा कि हम बर्मा (म्यांमार) की लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ संपर्क में हैं। हम सैना और अन्य सभी दलों से लोकतांत्रिक मानदंडों और कानून का पालन करने तथा हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का आग्रह करते हैं।

व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका हालिया चुनाव परिणामों को बदलने या म्यांमार की लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया को बाधित करने के किसी भी तरह के प्रयास का विरोध करता है।इन कदमों को वापस नहीं लिया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और बर्मा के लोगों के साथ खड़े हैं।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी (Jen Psaki) ने म्यांमार में हुए तख्तापलट पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि ‘अमेरिका म्यांमार में हुए लोकतान्त्रिक चुनावों के परिणामों को बदलने या लोकतान्त्रिक ढाँचे को बदलने के किसी भी प्रकार के प्रयास का विरोध करता हैै। अगर ये प्रयास वापस नहीं लिया गया तो जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं वे कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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