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दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर लाखों किसानों का जमावड़ा, आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाने की ठानी

तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का देशव्यापी आंदोलन केंद्र की मोदी सरकार की पूरी कोशिशों के बावजूद नहीं थम सका है। दिल्ली न घुसने देने की हरसंभव कोशिश को किसानों के बड़े समूह ने नाकाम कर दिया है और कई लाख किसान दिल्ली बार्डर पर मौजूद हैं। किसानों के दबाव में आई सरकार ने अब उनके दिल्ली में घुसने का रास्ता साफ कर दिया है। दरअसल सरकार ने किसानों को निरंकारी मैदान में आंदोलन करने की जगह देने की पेशकश की है, लेकिन किसानों की तरफ से अभी इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है। इस बीच उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा से किसानों के कई और जत्थे रवाना होने की खबर है। किसान अपनी इस लड़ाई को फैसलाकुन अंजाम तक पहुंचाने की ठान कर निकले हैं। यही वजह है कि तमाम किसान परिवार समेत यहां आए हैं और साथ में कई हफ्ते का राशन भी लाए हैं।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के आह्वान पर देश के 500 से ज्यादा किसान संगठनों ने 26-27 नवंबर को दिल्ली कूच का एलान किया था। किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 25 नवंबर की रात से ही हरियाणा में किसान नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया था। इसके बावजूद हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से किसानों के जत्थे दिल्ली की तरफ बढ़ रहे थे। यह किसान ट्रैक्टर-ट्राली से दिल्ली के लिए निकले थे।

इन्हें रोकने के लिए केंद्र सरकार ने भारी पुलिस फोर्स तैनात की थी। पुलिस फोर्स ने कई जगहों पर किसानों पर लाठीचार्ज ही नहीं किया, बल्कि उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े। सत्ता के नशे में चूर सरकार की ज्यादती का अंत यहीं नहीं था। सर्दी भरी रात में किसानों पर ठंडे पानी की बौछार तक की गई। इसके बावजूद किसान बिना हिंसा का सहारा लिए डटे हुए हैं।

किसानों के जत्थों को रोकने के लिए पुलिस ने जगह-जगह युद्ध जैसी तैयारी कर रखी थी। सड़क पर न सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए, बल्कि कंटीले तार भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद किसान तमाम बैरिकेड और अवरोध पार करते हुए दिल्ली बार्डर तक पहुंचने में कामयाब हो गए हैं। मोदी सरकार ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार से नौ स्टेडियम मांगे थे, ताकि किसानों को गिरफ्तार करके उसमें रखा जा सके, लेकिन दिल्ली सरकार ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए स्टेडियम देने से साफ मना कर दिया। इस बीच किसानों के भारी दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने निरंकारी मैदान में आंदोलन के लिए जगह देने की पेशकश की है।

एआईकेएससीसी के सदस्य पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया, “लाखों किसानों के दबाव में आई सरकार ने निरंकारी मैदान देने को कहा है, लेकिन किसान नेताओं की तरफ से अभी इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है। इस मामले में कल 28 नवंबर को किसान नेता आपसी सहमति से कोई फैसला लेंगे।”

इस बीच उन्हें रास्ते में ही रोकने की कोशिश कर रही केंद्र सरकार की यह तदबीर उलटी पड़ गई है। किसान अब एनएच वन पर ही डट गए हैं। इससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। केंद्र सरकार की उन्हें रोकने की तमाम कोशिशों को तोड़ते हुए दिल्ली बार्डर तक पहुंचे किसान अपने आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाकर लौटने की ठान कर निकले हैं। उन्हें साफ लग रहा है कि निरंकारी मैदान में पहुंचने से उनकी स्थिति बंधक जैसी हो सकती है, जहां वह केंद्र सरकार के रहमोकरम पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने सेंट्रल दिल्ली में आंदोलन के लिए जगह देने की भी मांग की है। उधर, उनकी ट्रैक्टर-ट्राली और दूसरे वाहन सड़क पर कई किलोमीटर दूर तक खड़े हुए हैं। खबर है कि नेशनल हाइवे पर काफी लंबा जाम लग गया है।

पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया, “योंगेंद्र यादव और वीएम सिंह को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। सिंधू बार्डर पर किसानों और पुलिस फोर्स से तनातनी के बीच दोनों नेता कृषकों को समझाने पहुंचे थे। उसके बाद मामला शांत हो गया था।” हालांकि दोनों लोगों के पुलिस की गाड़ी से जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

यह देश का सबसे बड़ा किसान आंदोलन बनने जा रहा है। दो दिन का ‘दिल्ली चलो’ आह्वान अब एक बड़े आंदोलन की तरफ बढ़ रहा है। उत्तराखंड से भी किसानों का जत्था आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो गया है। इसके अलावा यूपी में की गई नाकेबंदी किसानों के भारी दबाव की वजह से हटा ली गई है। यहां से भी बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं। भारी संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसानों के जत्थे विभिन्न मार्गों से दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं। पुलिस द्वारा सड़कों पर खड़े अवरोधों को हटाने के लिए हरियाणा के किसान भी जगह-जगह खोदी गई सड़कों के गड्ढे भर रहे हैं, ताकि किसानों के जत्थे दिल्ली की ओर जा सकें।

पंजाब और दिल्ली से सटे हरियाणा के सील किए गए बार्डरों पर लाखों किसानों का जमावड़ा होता जा रहा है। हरियाणा के बार्डरों पर रोके गए किसान जत्थे 3 दिसंबर तक केंद्र सरकार से वार्ता तक वहीं जमे रहेंगे। उत्तर प्रदेश के बार्डरों से भी किसानों के जत्थों को कल रात से ही रोक रखा गया था। देश भर में किसान संगठन सभी जिला, तहसील और ब्लॉक कार्यालयों पर भी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में भी लाखों किसानों ने हिस्सा लिया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने यूपी सहित कई राज्यों में सड़कें जाम करने की घोषणा की है।

किसान समूहों ने कृषि मंत्री द्वारा 3 दिसंबर को किसानों से वार्ता करने की बात छेड़ने की कड़ी निंदा की है। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के पास किसानों से चर्चा करने के लिए कुछ तय मसला ही नहीं है। किसान अपने एजेंडे के बारे में बहुत स्पष्ट हैं कि तीनों खेती के काले कानून और बिजली बिल 2020 रद्द होना चाहिए। अगर केंद्र सरकार का इस पर कोई पक्ष है तो उसे यह घोषित करना चाहिए। अगर पक्ष नहीं है तो वार्ता की बात करके भ्रम नहीं फैलाना चाहिए।

इस बीच पश्चिमी उप्र के हापुड़ में दिल्ली-मुरादाबाद मार्ग पर बागड़पुर चेक पोस्ट और मुजफ्फरनगर, संभल और रामपुर आदि इलाकों में भी कई बड़े प्रदर्शन हुए हैं। रामपुर में किसानों को दिल्ली की ओर चलने से रोक दिया गया है और आगे बढ़ने की अनुमति के लिए किसानों का लगातार दबाव जारी है। उप्र के अन्य जिलों से भी भारी संख्या में कल तक किसानों के जत्थे चलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिला मुख्यालय पर अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया। सुलतानपुर, सीतापुर, इलाहाबाद समेत कई जिलों से भी किसानों के प्रदर्शनों की खबरें हैं।

पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, असम, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखण्ड, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक समेत सभी राज्यों में बड़े पैमाने पर किसानों के सड़कों में उतरने की खबरें हैं। इस आंदोलन में किसानों के साझे मोर्चे में शामिल 500 संगठनों के अलावा भी कई अन्य संगठनों की सक्रिय भागीदारी है।

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This post was last modified on November 27, 2020 10:39 pm

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