Tuesday, January 18, 2022

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सुशासन बाबू की योजनाओं पर मोदी को ऐतबार नहीं! राहुल ने भी पीएम की घेरेबंदी

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आज जब राज्य के सोलह जिलों के 71 विधान सभा क्षेत्रों में वोट डाले जा रहे थे, उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए के लिए वोट मांग रहे थे। अपनी सभाओं में प्रधानमंत्री ने केंद्र की योजनाओं को गिनाया पर सुशासन बाबू उनके उपलब्धि की सूची से गायब दिखे। राज्य सरकार की सात निश्चय योजना के बदौलत सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए सुशासन बाबू के लिए यह कहा जा सकता है कि मोदी को उन पर ऐतबार नहीं है।

आज प्रधानमंत्री ने दरभंगा से अपने चुनावी सभाओं की शुरुआत की। वे पटना व मुजफ्फरपुर में भी सभाओं को संबोधित किए। यथार्थ से दूर अपने चिर परिचित अंदाज में दरभंगा की सभा की शुरुआत राम मंदिर व सीता माता के मायके से जोड़कर की। 

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ‘पान,माछ आ मखान सँ समृद्ध अई गौरवशाली भूमि पर आबि क हम अहां सभ के प्रणाम करैत छी। महाकवि विद्यापति ने कभी मां सीता से प्रार्थना की थी, कहा था। जन्मभूमि अछि ई मिथिला, संभारू हे माँ तनी आबि के अप्पन, नैहर संभारू हे माँ! आज मां सीता अपने नैहर को प्रेम से तो देख ही रही होंगी।’ ये अपनी सभाओं में भगवान राम सीता की भले बात करें, पर भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में उनके आदर्शों की चर्चा करना नहीं चाहते। इनके राम मात्र एक संहारक के रूप में हैं। 

तीनों सभाओं में प्रधानमंत्री ने महागठबंधन के रोजगार के एजेंडे के सामने अपनी पार्टी के रोजगार के वादे की चर्चा तक नहीं की। इस पर लोग सवाल करते दिखे। पटना की सभा में भी उन्नीस लाख लोगों को रोजगार देने के वादे पर चुप्पी दिखी। जबकि पटना युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिहाज से प्रमुख हब है।

प्रधानमंत्री ने अपनी तीनों सभाओं में अपने कार्यकाल के 15 वर्ष के कार्यों से अधिक तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल पर चर्चा की। इन सभाओं में पीएम के संबोधन से एक बार फिर यह चर्चा रही कि जदयू व बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं है। एनडीए का मुख्यमंत्री चेहरा भले ही नीतीश को उनके नेता कह रहे पर उनकी योजनाओं पर बोलने से परहेज़ करते हैं। जबकि नीतीश कुमार अपने सात निश्चय की योजनाओं के भरोसे ही सरकार में वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

प्रवासी मजदूरों के सवाल पर नहीं बोल रहे मोदी

अपने विज्ञापनों के माध्यम से प्रवासी मजदूरों को बिहार पहुंचाने की वाहवाही जताने वाली भाजपा बिहार चुनाव में चुप है। जबकि महागठबंधन मजदूरों के सवाल पर एनडीए को घेरने में लगा है। कोरोना काल में अमानवीय यातना झेल चुके मजदूर आज भी उस वक्त को याद कर अपने को कमजोर महसूस कर रहे हैं। मजदूरों के सवाल पर मोदी की चुप्पी पर जनता के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है।

किसानों व मजदूरों के सवाल पर राहुल ने भाजपा को घेरा

उधर, बिहार में आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दो सभाओं को संबोधित किया। पश्चिमी चंपारण में रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आए थे और कहा था कि ये गन्ने का इलाका है, चीनी मिल चालू करूंगा और अगली बार आऊंगा तो यहां की चीनी चाय में मिलाकर पीऊंगा। आगे सवालिया अंदाज में कहा कि क्या चाय पी ?

राहुल गांधी ने बीजेपी को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि यह पहली बार हुआ कि दशहरे पर प्रधानमंत्री और अडानी के पुतले जलाए गए। इस बार पूरे पंजाब में दशहरा पर रावण नहीं, नरेंद्र मोदी, अंबानी और अडानी का पुतला जलाया गया। राहुल ने कहा कि ये दुख की बात है, लेकिन ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि किसान परेशान हैं।

राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर दो करोड़ नौजवानों को रोजगार देने के लिए झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए हमला बोला। राहुल ने कहा कि अब अगर पीएम मोदी यहां आकर 2 करोड़ रोजगार की बात बोल दें तो शायद भीड़ उन्हें आज भगा देगी।

लॉकडाउन के दौरान पैदल चलकर बिहार लौटे मजदूरों का मसला उठाते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा तथा कहा कि इस सरकार को बदल देने का यह वक़्त आ गया है।

(पटना से स्वतंत्र पत्रकार जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट।)

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