Wednesday, December 8, 2021

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दो साल में मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से कमा लिए 5.79 लाख करोड़

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आम लोगों को महंगाई से निजात दिलाने और कीमतें काबू में रखने के वादे के साथ 2014 में सत्ता में मोदी सरकार ने सिर्फ दो साल में ही पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी के बहाने 5.79 लाख करोड़ रुपए की कमाई की है। ये खुलासा एक आरटीआई अर्जी के जवाब से हुआ है। पेट्रोल पर 5 रूपये और डीजल पर 10 रूपये प्रति लीटर की हालिया कटौती के बाद भी पेट्रोल पर 27.90 रुपये और डीजल पर 21.80 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगती है, जो पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान लगने वाली ड्यूटी के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इसके बावजूद इसका इतना ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जैसे मोदी सरकार ने कमाल कर दिया हैं।2014 में कच्चे तेल के दाम 105 डॉलर प्रति बैरल थे, जबकि आज 83 डॉलर हैं।

आरटीआई जवाब से सामने आया है कि मोदी सरकार ने 2019-20 से 2020-21 के दौरा डीजल पर 1,31,786 करोड़ और पेट्रोल पर 75,271 करोड़ रुपए एक्साइज ड्यूटी के रूप में वसूले  हैं। आरटीआई जवाब में माहवार टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों से सामने आया है कि मोदी सरकार ने 2020-21 में डीजल पर 2,59,560 करोड़ रुपए और पेट्रोल पर 1,12,384 करोड़ रुपए एक्साइज ड्यूटी के रूप में कमाए।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी के अलावा वैट भी लगता है जिसे राज्य सरकारें लगाती हैं। आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार पेट्रोल पर 32.90 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 31.80 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। इस तरह डीजल पर 31 फीसदी और पेट्रोल पर 34 फीसदी एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती है। कुल मिलाकर पेट्रोल के खुदरा मूल्य पर करीब 54 फीसदी तो केंद्र सरकार और राज्यों का टैक्स ही होता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने आम लोगों पर बोझ नहीं डाला था। लेकिन इसके विपरीत मोदी सरकार सस्ता कच्चा तेल होने के बावजूद आम लोगों को लूट रही है। लोगों की कमर तोड़ने वाली इस टैक्स वसूली का मुद्दा कांग्रेस लगातार उठाती रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इसे टैक्स डकैती की संज्ञा देते रहे हैं। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था, “मोदी जी की सरकार ने आम लोगों को तकलीफ देने का रिकॉर्ड बना दिया है। मोदी सरकार के दौर में सरकारी संपत्तियां बेची जा रही हैं, पेट्रोल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।” वहीं पूर्व  वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि जब पेट्रोल के दाम 100 का आंकड़ा पार कर गए तो मोदी सरकार को इस शतक का भी जश्न मनाना चाहिए।

23 फरवरी 2012 को क्रूड ऑयल का दाम 107.83 डॉलर प्रति बैरल था। सितंबर 2013 को क्रूड ऑयल 107 डॉलर के लगभग और 19 मई 2014 को 102.31 डॉलर प्रति बैरल और 27 मई 2014 को 102.72 डॉलर प्रति बैरल था। 30 मई 2019 को क्रूड ऑयल 56.59 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा था। आज यह 66 डॉलर प्रति बरेल से कुछ अधिक पर चल रहा है। यानी 2013-14 की तुलना में इसमें भारी गिरावट आई है।  इसका अर्थ यह है कि  मनमोहन सिंह सरकार 100 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक की खरीद कर पेट्रोल 70-72 रुपये प्रति लीटर के आसपास की कीमत पर उपलब्ध करा रही थी। आज क्रूड ऑयल की कीमत 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है, लेकिन इसके बाद भी पेट्रोल की कीमत 93-94 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। कई शहरों में पेट्रोल की कीमत सौ रुपये प्रति लीटर के स्तर को भी पार कर गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई अंकुश नहीं लगा सके हैं। उनके पीएम बनने के पूर्व दिल्ली में पेट्रोल की कीमत (अप्रैल 2014 में) 72.26 रुपये प्रति लीटर थी। आज ही के दिन पिछले वर्ष यानी 30 मई 2020 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 76.29 रुपये प्रति लीटर थी। इस एक साल में ही पेट्रोल की कीमत में भारी इजाफा हुआ है और प्रति लीटर 17.65 रुपये प्रति लीटर के इजाफे के साथ यह बढ़कर 93.94 रुपये प्रति लीटर हो चुकी है।

पेट्रोल की तरह डीजल की कीमतों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल 2014 में डीजल 55.48 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा था। आज ही के दिन पिछले वर्ष (30 मई 2020) को दिल्ली में डीजल की कीमत 66.19 रुपये प्रति लीटर थी जो इस समय बढ़कर 84.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यानी पिछले एक साल में ही डीजल की कीमतों में 18.70 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ताजा कटौती के बाद भी पेट्रोल पर 27.90 रुपये और डीजल पर 21.80 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगती है, जो पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान लगने वाली ड्यूटी के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

पेट्रोल-डीजल की यह कीमतें तब हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में 2014 की तुलना में भारी गिरावट आई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अन्य चीजों पर भी हो रहा है। डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण मालभाड़े में बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण आवश्यक चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं। दाल, सब्जी, अनाज, रेडीमेड खाद्य पदार्थों की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार देश की सत्ता संभालने के पूर्व अपनी चुनावी रैलियों में डॉलर के सामने रुपये के गिरते मूल्य को बड़ा मुद्दा बनाया था। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमतें कम होनी चाहिए और भारतीय रुपये का मूल्य बढ़ना चाहिए। लेकिन अगर प्रधानमंत्री के पिछले सात साल के शासन काल को देखें तो डॉलर के सामने भारतीय रुपये की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट आई है।प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालने के अगले दिन यानी 27 मई 2014 को एक डॉलर की कीमत भारतीय रुपयों में 58.67 रुपये थी। इसके बाद रुपये की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ 13 अक्तूबर 2018 को यह 73.67 रुपये और 17 अप्रैल 2020 को 77.15 रुपये हो गई। इस समय डॉलर की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक डॉलर की कीमत 72.42 रुपये हो चुकी है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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