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Monday, September 27, 2021

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नॉम चामस्की, अमितव घोष, मीरा नायर, अरुंधति समेत 200 से ज्यादा शख्सियतों ने की उमर खालिद की रिहाई की मांग

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नई दिल्ली। 200 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्कॉलर, एकैडमीशियन और कला से जुड़े लोगों ने दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के पक्ष में अपील जारी कर सरकार से उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की है। हस्ताक्षर कर्ताओं ने जांच को पूर्वाग्रह से परिपूर्ण एक शिकारी का शिकार करार दिया है। साथ ही उसमें कहा गया है कि खालिद को बिल्कुल गलत तरीके से दिल्ली पुलिस ने यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया है।

उन्होंने सरकार से खालिद समेत उन सभी को जिन्हें सीएए-एनआरसी के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए अन्यायपूर्ण और गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है,  तत्काल छोड़ने की मांग की है। इसके साथ ही सरकार से यह मांग की गयी है कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि दिल्ली पुलिस भारतीय संविधान के तहत एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर ली गयी शपथ के अनुसार निष्पक्षता से दिल्ली के दंगों की जांच करेगी।

हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख लोगों में अंतरराष्ट्रीय भाषाविद नॉम चामस्की, लेखक सलमान रुश्दी, अमितव घोष, अरुंधति राय, रामचंद्र गुहा और राजमोहन गांधी; फिल्म निर्माता मीरा नायर और आनंद पटवर्धन; इतिहासकार रोमिला थापर और इरफान हबीब और एक्टिविस्ट मेधा पाटेकर, अरुणा राय और सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार शीबा असलम फहमी शामिल हैं।

इन लोगों ने लिखा है कि “हम बहादुर युवा स्कॉलर और एक्टिविस्ट उमर खालिद के साथ एकजुट होकर खड़े हैं……उनके खिलाफ देशद्रोह, हत्या का षड्यंत्र और भारत के आतंकवाद विरोधी कड़े कानून यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज है। पिछले कुछ सालों से सभी तरह की असहमति को अपराध में बदलने की प्रक्रिया चल रही है यहां तक कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी लगातार मनगढंत आरोपों के तहत राजनीतिक गिरफ्तारियों के जरिये निर्दोष लोगों को दंडित किया जा रहा है और यह सब कुछ अभी ट्रायल शुरू होने से बहुत पहले हो रहा है।”

हस्ताक्षर कर्ताओं ने कहा कि सीएए विरोधी आंदोलन स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन था जिसने पूरे गर्व के साथ महात्मा गांधी के कदमों का अनुसरण किया और डॉ. बीआर आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान की आत्मा को अपने साथ आत्मसात किया था।

उन्होंने कहा कि “पूरे भारत के पैमाने पर छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक 100 से ज्यादा सभाओं में संबोधन, भारतीय संविधान के मूल्यों को थामे; भूख, गरीबी, उत्पीड़न और भय से आजादी के भारतीय युवाओं के सपनों को व्याख्यायित करते हुए  उमर खालिद इस आंदोलन में सत्य की एक शक्तिशाली युवा आवाज बनकर उभरे हैं। “

उन्होंने आगे कहा कि “समझौता परस्त मीडिया के एक हिस्से द्वारा उन्हें एक जिहादी और नफरती शख्सियत के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा है। ऐसा इसलिए केवल नहीं है क्योंकि वह प्रेरक तरीके से सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलते हैं और इस बात में वह विश्वास करते हैं कि वे अन्यायपूर्ण हैं बल्कि ऐसा इसलिए भी है क्योंकि वह मुस्लिम हैं।”

बयान में उन सभी का जिक्र है जिन्हें यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया है। इसमें पिंजरा तोड़ एक्टिविस्ट देवांगना कालिता और नताशा नरवल भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि “अपने सभी आलोचकों को कड़ा संदेश देने के लिए राज्य ने भारत के सबसे बेहतरीन और चमकदार; युवा, निडर, एक बेहतर देश का सपना देखने वाले जहां गैरबराबरी एक कड़वी दवा नहीं है जिसे कुछ को हजम करना है, बल्कि घिनौने किस्म का अपवाद है जिसके खिलाफ अनवरत लड़ाई जारी रहनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि “मौजूदा समय में आतंकी कानून के तहत गिरफ्तार 21 लोगों में 19 मुस्लिम हैं। अगर उनकी पहचान को हम उनका अपराध होने की इजाजत देते हैं तो भारत को सेकुलर राष्ट्रों के वैश्विक समुदाय में शर्मिंदगी के साथ खड़ा होना पड़ेगा। ये सभी आंतकी नहीं हैं और दिल्ली दंगों में पुलिस की जांच कोई जांच भी नहीं है। यह पूर्वाग्रह से पूरिपूर्ण एक शिकारी का शिकार है।”

बयान में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि बीजेपी के ढेर सारे नेता गद्दारों को गोली मारने के लिए अपने समर्थकों को उकसाने वाले भाषण दिए। लेकिन उनके खिलाफ कोई एक भी केस दर्ज नहीं हुआ।

उन्होंने आगे कहा कि “बीजेपी नेता कपिल मिश्रा की भूमिका आश्चर्यजनक तरीके से पुलिस छान-बीन की थोड़ी भी नजर अपनी ओर नहीं खींच सकी। जबकि वह 23 फरवरी, 2020 को पुलिस के डिप्टी कमिश्नर के साथ नार्थ-ईस्ट दिल्ली में मौजूद थे। और उन्होंने इस बात की धमकी दी थी कि अगर सीएए प्रदर्शनकारियों को हटाया नहीं गया तो उनके समर्थक मामले को अपने हाथ में ले लेंगे। कहा जाता है कि इस भाषण ने अगले तीन दिनों 23 से 26 फरवरी, 2020 तक हिंसा को भड़काने की प्रमुख वजह बना। इसकी बजाय युवा प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया और उन्हें जेल में फेंक दिया गया।”

(इंडियन एक्सप्रेस से कुछ इनपुट लिए गए हैं।)

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