Thursday, December 2, 2021

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एनआईए ने दी सफाई, कहा- लैपटॉप में आपत्तिजनक दस्तावेज प्लांट नहीं किया

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नेशनल इंवेस्‍टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए ने भीमा कोरेगांव मामले में दो साल से अधिक समय से जेल में निरुद्ध रोना विल्सन के लैपटॉप में आपत्तिजनक दस्तावेज प्लांट करने की बात से इनकार करते हुए कहा है कि रोना विल्सन के यहां सारी जप्ती नियमों के तहत की गई है और पुणे एफएसएल की रिपोर्ट में छेड़छाड़ की बात नहीं आई है। दरअसल यह मामला विल्सन और नागपुर के जाने-माने क्रिमिनल वकील सुरेंद्र गाडलिंग द्वारा कथित तौर पर लिखे हुए पत्रों पर आधारित था। उनके कंप्यूटर पर कथित तौर पर कुल 13 ऐसे पत्र पाए गए थे, जिनके आधार पर वकील सुधा भारद्वाज, शिक्षाविद आनंद तेलतुंबड़े कवि वरवर राव जैसे अन्य आरोपियों की इस अपराध में संलिप्तता दिखाई गई।

भीमा कारेगांव मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई जब महाराष्ट्र के तत्‍कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने भी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया था। एनआईए ने ने प्रेस नोट जारी करके अपनी सफाई दी है। जबकि अभी तक किसी ने इस कुकृत्य के लिए एनआईए को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। रोना विल्सन, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा समेत 14 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस मामले में गिरफ़्तार किया जा चुका है। शुरुआत में इस मामले की जांच पुणे पुलिस ने की थी, अब नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) इसकी जांच कर रही है।

अब सवाल है अमेरिकी फोरेंसिक लैब आर्सेनल की इस रिपोर्ट को कानूनी वैधता मिलती है या नहीं लेकिन इतना तो जरूर है कि साजिश की सरकारी कहानी पर गम्भीर सवाल तो खड़ा हो गया है।क्योंकि यदि आर्सेनल की रिपोर्ट सच मानी जाय तो विल्सन सहित सुधा भारद्वाज, शिक्षाविद आनंद तेलतुंबड़े कवि वरवर राव जैसे अन्य आरोपियों को गिरफ्त में लेने की योजना काफी पहले से बन रही थी और भीमा कारेगांव मामले में सम्भाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे को बचाने के लिए अमली जामा पहना दिया गया।इसमें एक पैटर्न भी है जैसे गुजरात की पुलिस मुठभेड़ों के मामले में यही आरोप लगाया जाता था की मुठभेड़ में मारे गए अपराधी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का उद्देश्य लेकर आ रहे थे। इस बार भी कहा गया है कि प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की हत्या की योजना बनाई जा रही थी।

आर्सेनल की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अप्रैल 2018 को विल्सन के घर छापेमारी होने से कुछ समय पहले ही उनके कंप्यूटर से छेड़छाड़ की गई थी।रिपोर्ट दिखाती है कि उनके कंप्यूटर में आखिरी बदलाव 16 अप्रैल 2018 की शाम चार बजकर पचास मिनट पर किए गए थे। इसकी अगली ही सुबह 6 बजे जांच अधिकारी शिवाजी पवार के साथ पुणे पुलिस दिल्ली में मुनिरिका में उनके घर छापा मारने पहुंची थी।

आर्सेनल रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि रोना विल्सन के कंप्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट वर्ड  2007 था। लेकिन कथित तौर पर उनके द्वारा लिखे गए कुछ दस्तावेज़ माइक्रोसॉफ्ट वर्ड  2010 और माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2013 तक के पीडीएफ़ फॉर्मेट में थे। हायर वर्जन का डॉक्यूमेंट लोअर वर्जन में क्रिएट किया जा सकता  है लेकिन लोअर वर्जन में हायर वर्जन का डॉक्यूमेंट क्रिएट नहीं किया जा सकता है। स्पष्ट  है कि रोना विल्सन के कंप्यूटर में वो लेटर ड्राफ्ट नहीं हुए हैं? वे प्लांट किये गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विल्सन का लैपटॉप 13 जून 2016 को किसी के वरवर राव की ईमेल आईडी का इस्तेमाल करते हुए कई संदिग्ध मेल करने के बाद हैक हुआ। राव इस मामले में विल्सन के सह-आरोपी हैं।इस तरह का एक ईमेल एक अन्य व्यक्ति निहाल सिंह राठौड़ को भी भेजा गया था, जो इस मामले में बचाव पक्ष के वकील हैं। राठौड़ वकीलों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर हुए ऐसे दो साइबर हमलों का शिकार हुए हैं। राठौड़ को पेगासस स्पाईवेयर की मदद से निशाना बनाया गया था।दूसरे मामले में राठौड़ उन लोगों में शामिल थे, जिन्हें ईमेल के जरिये एक साइबर अटैक का निशाना बनाया गया।

विल्सन का कंप्यूटर हैक करने का तरीका बताते हुए आर्सेनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि राव के आईडी द्वारा भेजे गए ईमेल में एक अटैचमेंट था और विल्सन से इसे खोलने को कहा गया था।यह ईमेल दोपहर 03.07 पर भेजा गया था जिसे विल्सन ने कुछ ही घंटों में खोल लिया था। शाम 06.16 पर विल्सन ने जवाब दिया कि वे अटैचमेंट खोलने में सफल हुए। रिपोर्ट के अनुसार ठीक इसी समय उनका कंप्यूटर हैक हो चुका था।

आर्सेनल की जांच में सामने आया कि डॉक्यूमेंट को खोलना (Rar आर्काइव फाइल के अंदर another victory.rar नाम की एक और फाइल) उस योजना का हिस्सा था, जिससे नेटवायर रिमोट एक्सेस ट्रोज़न विल्सन के कंप्यूटर में इंस्टॉल हुआ।जहां विल्सन को लगा कि उन्होंने उस ईमेल के जरिये ड्रॉपबॉक्स खोला है, वहीं इस ईमेल से नेटवायर मैलवेयर के जरिये उनका लैपटॉप हैक कर लिया गया। आर्सेनल ने बताया कि उन्होंने अपने एनालिसिस के दौरान कुछ टूल्स डेवलप किए जिनकी मदद से वो विल्सन के कंप्यूटर से इस मैलवेयर को डिक्रिप्ट कर सकें। आर्सेनल ने इस मैलवेयर के 2016 के आखिर से 17 अप्रैल 2018 के बीच के 57 दिन के कुछ लॉग पूरी और कुछ आंशिक रूप से रिकवर किए हैं। लॉग की एक्टिविटी में विल्सन की ब्राउज़िंग हिस्ट्री, पासवर्ड्स, ईमेल लिखना और डॉक्यूमेंट एडिटिंग शामिल है।

आर्सेनल ने इस साइबर हमलावर को उसी मैलवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ा, जो विल्सन के कंप्यूटर में तक़रीबन चार साल के लिए न केवल उनकी जानकारी साझा करने के लिए, बल्कि 22 महीनों तक उनके सह-आरोपियों पर भी हमला करने के उद्देश्य से डाला गया था। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि विभिन्न मैट्रिक्स के आधार पर यह केस सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में आर्सेनल के सामने आए सबसे गंभीर मामलों में से एक है, जहां पहले और आखिरी आपराधिक दस्तावेज की डिलीवरी के बीच एक बड़ी समयावधि है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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