Sunday, November 28, 2021

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अब देश के जवाहर नवोदय विद्यालयों पर पड़ी मोदी सरकार की कुदृष्टि

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021-22 में 100 सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा की थी। लेकिन नया कुछ बनाना तो भाजपा और मोदी सरकार की फितरत में ही नहीं है।

इसीलिए भाजपा सरकार भोपाल, सीहोर, कटनी समेत छत्तीसगढ़ के रायपुर और ओडिशा के बालासोर के जवाहर नवोदय स्कूलों को सैनिक स्कूल में कन्वर्ट करने जा रही है। इसके लिए प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी। केंद्र सरकार की तरफ से इसके लिए मैपिंग का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। जिसके बाद से इन जिलों के नवोदय स्कूलों को सैनिक स्कूल के नाम से जाना जाएगा।

रक्षा मंत्रालय द्वारा 26 फरवरी को नवोदय विद्यालय समिति के डिप्टी कमिश्नर को इस बारे में पत्र भेजा गया था। इस कवायद को दो चरणों में पूरा करने का जिक्र पत्र में किया गया है।

वहीं भोपाल की नवोदय विद्यालय समिति ने 4 मार्च को इस बारे में अपने डिप्टी कमिश्नर को पत्र भेजा है। इसमें कन्वेंशनल सैनिक स्कूल का हवाला दिया है। जिसमें भोपाल सीहोर, कटनी समेत छत्तीसगढ़ के रायपुर व ओडिशा के बालासोर में भी जवाहर नवोदय विद्यालय को सैनिक स्कूल बनाने का जिक्र है।

जुल्म की इंतहां सिर्फ़ इतना ही नहीं है, इन नवोदय स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के एग्जाम में शामिल होना पड़ेगा।

माध्यमिक इंटरमीडिएट शिक्षा में देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में गिने जाते हैं जवाहर नवोदय विद्यालय 

जवाहर नवोदय विद्यालय को देश में माध्यमिक से लेकर इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। जवाहर नवोदय विद्यालयों की शुरुआत देश के प्रत्येक जिले में आवासीय विद्यालयों की अवधारणा ‘नई शिक्षा नीति’ 1986 के अंतर्गत हुई थी। 31.03.2019 की स्थिति के अनुसार देश भर में कुल 661 जवाहर नवोदय विद्यालय हैं। वर्तमान में जवाहर नवोदय विद्यालय 27 राज्यों और 8 संघ शासित राज्यों में संचालित हैं। यह सह-शिक्षा आवासीय विद्यालय हैं, जिन्हें एक स्वायत्त संगठन ‘नवोदय विद्यालय समिति’ के ज़रिए भारत सरकार द्वारा संचालित सम्पूर्ण वित्तीय सहायता प्राप्त है। 

जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रवेश मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का होता है, जिसमें ग्रामीण बच्चों के लिए कम से कम 75% सीटें उपलब्ध हैं। जिले में एससी और एसटी समुदाय के बच्चों के लिए उनकी आबादी के अनुपात में सीटें आरक्षित हैं लेकिन राष्ट्रीय औसत से कम नहीं। 1/3 सीटें छात्राओं द्वारा भरी जाती हैं। 3% सीटें विकलांग बच्चों के लिए हैं। प्रवेश हेतु कक्षा 5 के विद्यार्थियों के लिये प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसके लिए आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है, आवेदक कक्षा 5 का अभ्यर्थी होना चाहिए। प्रत्येक जिले से 80 छात्रों का चयन किया जाता है।

नवोदय विद्यालय में प्रवेश, ‘जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा (JNVST) के माध्यम से कक्षा 6 में की जाती है। इन विद्यालयों में कक्षा 8 तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा है। जबकि गणित और विज्ञान के लिए माध्यम अंग्रेज़ी है, और सामाजिक विज्ञान के लिए माध्यम हिन्दी है। जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल की कक्षा 10 और 12 की परीक्षा में सम्मिलित होते हैं। प्रत्येक नवोदय विद्यालय एक सह-शैक्षणिक आवासीय संस्थान है जो छात्रों को मुफ्त बोर्डिंग और लॉजिंग, मुफ्त स्कूल यूनिफॉर्म, पाठ्य पुस्तकें, स्टेशनरी, और फ्री रेल और बस किराया प्रदान करता है। हालांकि, एक मामूली शुल्क (छूट प्राप्त वर्ग के छात्रों और समस्त छात्राओं को छोड़कर) विद्यालय विकास निधि के रूप में कक्षा- 9 से 12 के छात्रों से प्रति माह 600 / – का शुल्क लिया जाता है। जिन छात्रों के माता-पिता कोई सरकारी नौकरी करते हैं उनसे प्रतिमाह 1500 / का शुल्क लिया जाता है।

1 जुलाई 2019 को मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि देश में विभिन्न राज्यों के 45 ऐसे जिले हैं जहां अब भी जवाहर नवोदय विद्यालय नहीं हैं। 

ग्रामीण इलाकों के होनहार बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए इन 45 जिलों में नवोदय विद्यालय खोले जाएंगे। इनमें यह नियम जारी रहेगा कि हर नवोदय विद्यालय की 75 फीसदी सीटें ग्रामीण इलाकों के होनहार बच्चों से ही भरी जाएंगी। 

लेकिन जैसा कि इस सरकार के साथ समस्या रही है ये सरकार जो कहती है वो हर्गिज भी नहीं करती, और जो देश में श्रेष्ठ संरचना होती है सरकार उसे नष्ट करने के पूरे जतन करती है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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