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दिल्ली दंगों में अब प्रशांत भूषण, सलमान खुर्शीद और कविता कृष्णन का नाम

6 मार्च, 2020 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के नार्कोटिक्स सेल के एसआई अरविंद कुमार द्वारा दर्ज़ कराए गए एफआईआर संख्या 59/2020 के संदर्भ में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का नाम भी सामने आ रहा है। प्रशांत भूषण और सलमान खुर्शीद का नाम केस में जिम्मेदार ठहराए गए दो आरोपियों पूर्व कांग्रेस पार्षद इशऱत जहां और व्यवसायी मोहम्मद खालिद अका खालिद सैफी के ‘डिस्क्लोजर स्टेटमेंट’ में शामिल किया गया है। बता दें कि पहले भी इसी एफआईआर संख्या 59/2020 के तहत कई छात्रों, समाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आरोपित किया गया है। 

कानूनी तौर पर प्रशांत भूषण या सलमान खुर्शीद को इस मामले में अभी आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन जानकारों के मुताबिक यह बात आगे की जांच के लिए उन्हें ज़रूर संदेह के दायरे में लाकर खड़ा कर देती है और भविष्य में उन्हें आईपीसी की धारा 120 (बी) के तहत तथाकथित साजिश में फंसाने के लिए शक़-ओ-शुबह के केंद्र में ला देती है। 

दिल्ली पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किए गए बयान के मुताबिक इशरत जहाँ और खालिद सैफी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खुरेजी स्थित विरोध-प्रदर्शन स्थल पर भड़काऊ भाषण दिया था।  

वहीं इशरत जहां के वकील प्रदीप तेवतिया ने हफपोस्ट को दिये बयान में कहा है कि पुलिस ने झूठे डिस्क्लोजर स्टेटमेंट दाखिल किए हैं। जबकि खालिद सैफी के वकील हर्ष बोरा ने इसे दिल्ली पुलिस का बिल्कुल मनगढंत आरोप बताया है। डिस्क्लोजर स्टेटमेंट गिरफ्तारी के ठीक बाद लिए जाते हैं और इनका सबूत के तौर पर ट्रायल में कोई वैल्यू नहीं है जब तक कि उनकी बुनियाद पर कोई नए सबूत खोजकर सामने नहीं लाए जाते हैं। 

प्रशांत भूषण और सलमान खुर्शीद नरेंद्र मोदी सरकार और उनके हिंदू राष्ट्रवादी भाजपा के आलोचकों में शुमार किए जाते हैं। और उन्होंने भाजपा सरकार द्वारा लाए गए सीएए कानून और एनआरसी का दिसंबर और जनवरी में कड़ा विरोध किया था। और अब दिल्ली पुलिस द्वारा उनके नाम को फरवरी में हुए दिल्ली दंगों की चार्जशीट में शामिल किया गया है। जाहिर है भाजपा सरकार दिल्ली पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल करते हुए अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशान कर रही है। इससे पहले स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव का नाम भी एफआईआर संख्या 50/2020 के तहत ज़ाफराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज़ कराये गये डिस्क्लोजर रिपोर्ट में शामिल किया गया था। 

इसके अलावा एफआईआर संख्या 59/2020 के डिस्क्लोजर रिपोर्ट में भी उनका नाम वकील महमूद प्रचा के साथ शामिल है।  जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व नेता और राज्य सभा सांसद अली अनवर अंसारी, एमबीए छात्र गुलफिशा फातिमा, मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता राहुल राय, कांग्रेस की सदफ जफर, हिमांशु और भीम आर्मी के दिल्ली स्टेट प्रेसिडेंट का नाम भी एफआईआर संख्या 59/2020 में शामिल है।

हर्ष मंदर का नाम दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज़ एफआईआर संख्या 65/2020 के तहत आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या के संदेहास्पदों में शामिल है, पुलिस की क्रोनोलॉजी के मुताबिक 16 दिसंबर, 2019 को हर्ष मंदर ने भाषण दिया था। 13 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल एफिडेविट में जिक्र किया गया है।

योगेंन्द्र यादव और सीपीआईएम नेता सीताराम येचुरी, जेएनयू की अर्थशास्त्री जयति घोष, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता राहुल राय का नाम आरोपित ठहराए गई जेएनयू छात्राओं देवांगना कलिता और नताशा नारवाल के डिस्क्लोजर रिपोर्ट में शामिल किया गया है। बता दें कि दोनो जेएनयू छात्राओं के खिलाफ़ अमन हत्या केस मामले में ज़ाफराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज़ एफआईआर संख्या 50/2020 में चार्जशीट दाखिल किया गया है। 

कलिता और नरवाल के खिलाफ़ दर्ज़ एफआईआर की डिस्क्लोजर रिपोर्ट में ऐपवा सचिव व सीपीआईएमएल सदस्य कविता कृष्णन का नाम भी शामिल है।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता अनिल मित्तल ने एक ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा है कि आरोपितों के डिस्क्लोजर रिपोर्ट को पूरी ईमानदारी से दर्ज़ किया गया है। किसी को भी सिर्फ़ डिस्क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर अभियुक्त नहीं बनाया गया है। आगे सिर्फ पुष्टिकारक प्रमाणों के आधार पर ही लीगल कार्रवाई की गई है। अभी मामला विचाराधीन है।” 

वहीं एफआईआर संख्या 59/2020 की चार्जशीट के संदर्भ में, जिसमें भूषण और खुर्शीद का नाम डिस्क्लोजर रिपोर्ट में शामिल है, दिल्ली पुलिस का कहना है कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग इसका इस्तेमाल लंबे समय से दिल्ली की सबसे भयावह सांप्रदायिक दंगे की योजना बनाने के लिए कर रहे थे। 

एफआईआर में भारत के आतंकवाद-रोधी कानून गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) का दुरुपयोग भी किया गया है। जेएनयू के पूर्व छात्र व कार्यकर्ता उमर खालिद सहित अनेक छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ यूएपीए लगाया गया है। उमर खालिद को तो दिल्ली के कथित दंगों में मुख्य आरोपी बनाया गया है।

दिल्ली दंगे की प्लानिंग के संदर्भ में दर्ज़ एफआईआर संख्या 59/2020 के तहत अब तक 21 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। जिनमें से अधिकांश मुसलमान हैं। बता दें कि दिल्ली के प्रायोजित जनसंहार में 53 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से अधिकांश मुस्लिम समुदाय के लोग थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक दिल्ली दंगों से संबद्ध 750 एफआईआर दर्ज़ किए गए हैं। 

जबकि दूसरी ओर दंगे शुरु होने वाले दिन भड़काऊ भाषण देने वाले भाजपा नेता कपिल मिश्रा और आंदोलनकारियों को गोली मारने का सार्वजनिक रूप से नारा लगाने लगवाने वाले केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के खिलाफ़ एक अदद एफआईआर तक नहीं दर्ज़ की गई है। न ही उनसे एक भी बार पूछताछ की गई है। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on October 4, 2020 1:16 pm

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