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Friday, September 24, 2021

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7 दिसंबर को पुरस्कार वापसी, 8 दिसंबर को भारत बंद, आज फूंकेंगे मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले

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किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। वहीं उससे एक दिन पहले यानि 7 दिसंबर को पुरस्कार वापसी होगी। केंद्र सरकार द्वारा जिन्हें जो पुरस्कार मिला है वो वापस करेंगे। जबकि आद देश भर में नरेंद्र मोदी, गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के पुतले फूंके जाएंगे।

बता दें कि 3 दिसंबर को किसानों और सरकार के मंत्रियों के बीच हुई 8 घंटे की लंबी वार्ता बेनतीजा रही थी और उसी कड़ी में आज 5 दिसंबर को एक बार फिर से सरकार के मंत्री और किसान संगठन आमने-सामने बैठेंगे। किसान संगठनों द्वारा तीन दिन में तीन कार्यक्रम यानि पुरस्कार वापसी, भारत बंद और पुतला दहन को आज होने वाले वार्ता पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं इन कार्यक्रमों का एक पहलू ये भी है कि किसानों को आज होने वाली बैठक के बेनतीजा होने की संभावना ज़्यादा होगी। यानि किसान संगठन इस सरकार से बात से समाधान निकलने की बहुत उम्मीद करके नहीं चल रहे हैं।

इसे किसान संगठनों द्वारा आंदोलन को तेज करने की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। जहां एक तरफ सरकार से बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान कर दिया है। सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए किसानों ने कहा कि कृषि कानून को वापस करा के ही दम लेंगे। आठ दिसंबर को भारत बंद रहेगा, सभी टोल प्लाजा भी बंद करवाएंगे। इसके साथ ही दिल्ली आने वाले सभी रास्ते भी बंद किए जाएंगे। जाहिर है बातचीत के बीच किसान संगठनों के इन कदमों से सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें सरकार से हो रही बातचीत से कोई नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं हैं?

आज जलेगा मोदी, अडानी, अंबानी का पुतला

वहीं आज जब एक ओर सरकार के मंत्रियों और किसान संगठन दिल्ली के विज्ञान भवन में बैठक कर रहे होंगे दूसरी और पूरे देश में नरेंद्र मोदी और कार्पोरेट के पुतले फूंके जा रहे होंगे। इस बाबत कल किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने आज यानि 5 दिसंबर को देश भर में अडानी, अंबानी और नरेंद्र मोदी सरकार का पुतला फूंकने की अपील की थी।

उन्होंन अपील करते हुए कहा था- “देश के अंदर जो आंदोलन चल रहा है वो जनता बनाम कार्पोरेट है। पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर चंद लोगो का कब्ज़ा है। देश भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। इस आंदोलन में हम आप सभी का सहयोग चाहते हैं। जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, अपने गांव मोहल्ले में बैठ हैं हम उन सबका सहयोग चाहते हैं।

इसलिए 5 दिसंबर के लिए हमने एक प्रोग्राम तय किया है, कि सभी भाई अपने अपने गांव में, अपने चौक पर जहां भी हो सकता है वहां नरेंद्र मोदी का, अडानी का, अंबानी जैसे कार्पोरेट का पुतले बनाकर जलाएं और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करें। ताकि इसका प्रभाव और संदेशा जनता की ओर से सरकार में जा सके। तो आज पांच दिसंबर को नरेंद्र मोदी का, अडानी का, अंबानी का पुतला बनाकर अपने गांव मोहल्ले, गली कूचे में फूंके और सरकार व कार्पोरेट के खिलाफ़ इस आंदोलन को समर्थन दें।”

अन्य किसान नेताओं ने भी कहा है कि पांच दिसंबर को किसान देशभर में मोदी सरकार व कॉरपोरेट घरानों का पुलता फूंकेंगे। सात दिसंबर को जिन लोगों को केंद्र सरकार से पुरस्कार मिले हैं, वे उसे वापस कर आंदोलन का समर्थन करेंगे। इसके साथ ही आठ दिसंबर को पूरा भारत बंद रहेगा। इसके बाद टोल प्लाजा को भी एक दिन के लिए फ्री कराया जाएगा।

वहीं बंगाल से आए पूर्व सांसद व ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हनान्न मौला ने मीडिया से कहा कि शनिवार को केंद्र के साथ होने वाली बैठक में कृषि कानूनों में संशोधन पर बात नहीं बनेगी, क्योंकि पूरा कानून सिर से लेकर पैर तक सड़ा हुआ है। केंद्र सरकार को इसे वापस लेना ही होगा।

3 दिसंबर की वार्ता में क्या हासिल हुआ किसानों को

किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने मीडिया से बताया कि गुरुवार 3 दिसंबर को हुई बैठक में केंद्र सरकार ने नए कृषि कानूनों में बिजली व पराली को लेकर किए गए प्रावधानों को वापस लेने व न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाने पर करीब-करीब सहमति दी है। लेकिन, हमने कहा कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों को वापस ले। इससे कम पर किसी भी सूरत में किसान मानने वाले नहीं हैं।

देश भर के किसानों को बुलाया गया दिल्ली

किसान संगठनों ने दिल्ली को घेरने की अपनी रणनीति को और ठोस बनाने के लिए देश भर के किसानों से दिल्ली पहुंचने की अपील की है। किसान नेताओं ने कहा, आज तमिलनाडु और कर्नाटक में किसान भाई प्रदर्शन कर रहे थे उन्हें भी दिल्ली आने के लिए कह दिया गया है। हम पूरे देश से किसानों को दिल्ली बुला रहे हैं। लड़ाई लंबी चलेगी और आर-पार की होगी। हमारे पीछे हटने का तो सवाल ही नहीं है। हमें कॉरपोरेट फार्मिंग किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। हम सरकार कोई कोई समय नहीं दे रहे ना ही चुनौती ना ही चेतावती हम बता रहे हैं कि हमारी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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