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Monday, September 20, 2021

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जन्म दिन पर नरेंद्र मोदी के झूठ के 10 लड्डू!

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17 सितंबर, 2020- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन जब वे 70 साल के हो गये हैं। दीर्घायु होने की कामना के साथ उनसे उम्मीदें और सवाल-जवाब भी देश कर रहा है। कोरोना की महामारी, सीमा पर चीनी चुनौती और गिरती अर्थव्यवस्था के बीच मुश्किल घड़ी भी है और आत्मनिर्भर भारत के लिए कोशिश भी।

संकट की घड़ी में या विपरीत समय आने पर साहस के साथ मुकाबला करना ही योद्धा के लिए उचित माना गया है। अगर ऐसे समय पर झूठ बोला जाता है तो संकट घटता नहीं, बढ़ जाता है। ऐसे ही 10 झूठ का उल्लेख आगे किया जा रहा है जिसमें खुद नरेंद्र मोदी शामिल रहे हैं। 

झूठ नंबर-1

चीनी ने अतिक्रमण नहीं किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर्वदलीय बैठक में: न कोई सीमा में घुसा है, न घुसा हुआ है।

6 अगस्त को रक्षा मंत्री की वेबसाइट पर बताया गया कि पीपी 15, पीपी 17ए और पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर 17-18 मई को चीन ने Transgression किया यानी घुसपैठ की। बाद में वेबसाइट से यह कंटेंट हटा लिया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक टीवी चैनल पर बताया था कि मई के आखिर में बड़ी संख्या में चीनी सैनिक काफी आगे आ गये थे। बाद में आधिकारिक रूप से इसे घुसपैठ नहीं मानने की सलाह दी गयी।

16 सितंबर को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने साफ तौर पर कहा कि पिछले 6 महीने में चीन की ओर से कोई घुसपैठ की घटना नहीं हुई।

ऐसे में सवाल यही है कि बोर्डर पर तनाव क्यों है? सरहद पर जवान शहीद क्यों हुए? दोनों देशों के बीच सैनिक स्तर से लेकर कूटनीतिक स्तर पर वार्ता की जरूरत क्या है? 

झूठ नंबर- 2

21 दिन में कोरोना को हराएंगे

लॉक डाउन की घोषणा करते हुए 21 दिन में कोरोना को परास्त करने का दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था

186 दिन बाद कोरोना की महामारी भयावह रूप में है। 50 लाख से ज्यादा कोरोना मरीज हैं।

झूठ नंबर-3

किसानों की आमदनी दुगुनी करेंगे 

28 फरवरी, 2016 को बरेली की सभा में 2022 तक प्रधानमंत्री ने किसानों की आमदनी डबल करने का वादा किया था।

मार्च, 2017 में नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि इसके लिए कृषि क्षेत्र में 10.25 प्रतिशत की ग्रोथ रेट की जरूरत होगी।

हकीकत यह है कि 2016-2020 के दौरान कृषि क्षेत्र में औसत विकास दर 3 फीसदी के करीब रही है। 2014-15, 2015-16, 2016-17,2017-18, 2018-2019 में विकास दर -0.2%, 0.6%, 6.3%, 5.0% और 2.9% रही है।

झूठ नंबर-4

तेल आयात घटाएंगे

2015 में पीएम मोदी ने कहा था हम तेल का आयात 10 फीसदी कम कर देंगे

झूठ का सच : तेल का आयात 5.5 प्रतिशत बढ़ गया 

2015 में तेल का आयात 78.3%

2019 में तेल का आयात 83.8%

झूठ नंबर-5 

35 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल देंगे

प्रधानमंत्री ने 2014 में सत्ता में आने से पहले 35 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल का वादा किया था। आज पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर तक जा पहुंची है। 

झूठ नंबर- 6

कैशलेस इकॉनोमी की ओर बढ़ेंगे

नोटबंदी के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि वह देश को कैशलेस इकॉनोमी की ओर ले जा रहे हैं।

झूठ का सच : नोटबंदी के बाद अब तक 48.32% करंसी बढ़ चुकी है।

नोटबंदी से पहले अक्टूबर 2016 तक 17.01 लाख करोड़ रुपये की करंसी प्रचलन में। 

नोटबंदी के बाद अप्रैल 2020 के अंत में 25.23 लाख करोड़ रुपये की करंसी प्रचलन में।

झूठ नंबर-7

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से सुरक्षित होंगे किसान

किसान इसे अपने साथ छल समझ रहे हैं। यही वजह है कि लगातार इस योजना से किसान अलग हो रहे हैं। 

10 अगस्त, 2020 तक केवल 1.12 करोड़ किसानों ने PMFBM में रजिस्ट्रेशन कराया। 2019 में 1.87 करोड़ किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।

बीमा कंपनियों का फायदा : 2019-20 में खरीफ-रबी मिलाकर बीमा कंपनियों को 27,298.87 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। 

किसान-सरकार को चपत : किसानों ने 3,786.72 करोड़ चुकाए तो केंद्र सरकार ने 11,275.92 करोड़ और राज्य सरकार ने 12, 236.24 करोड़।

किसान क्रेडिट कार्ड से रकम डेबिट कर ली गयी। जब किसानों ने विरोध किया तो उन पर फार्म भरकर बीमा योजना से हटने का विकल्प दिया गया। 

झूठ नंबर- 8

धारा 370 के झूठे सपने

प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद विकास का युग शुरू होगा।

न मुठभेड़ रुक रही है, न सीमा पर सीज़फायर का उल्लंघन रूक रहा है। आतंकी हमले बढ़ रहे हैं। राजनीतिक अशांति बनी हुई है। विकास ठप पड़े हैं।

झूठ नंबर-9

अर्थव्यवस्था में विकास दर को डबल डिजिट में ले जाएंगे

अर्थव्यवस्था की गति अधिकतम 8.2 फीसदी नोटबंदी से पहले गयी थी, मगर नोटबंदी के बाद लगातार अर्थव्यवस्था गिरती हुई पिछले साल 4.2 फीसदी तक पहुंच गयी। ताजा तिमाही में यह 23.9 फीसदी के स्तर पर जा पहुंची है।

झूठ नंबर-10

हर साल 1 करोड़ रोजगार का वादा

नरेंद्र मोदी ने 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्ता में आने पर वे हर साल 1 करोड़ लोगों को रोजगार देना सुनिश्चित करेंगे।

सच्चाई यह है कि बीते छह साल में भी एक करोड़ नौकरी का आंकड़ा सरकार नहीं दिखा पायी है। उल्टे नौकरियां घटी हैं, रोजगार घटे हैं। कोरोना काल में तो स्थिति यह आ गयी है कि जिनके पास नौकरी थी, वह भी छूट चुकी है। जिनके पास है उनकी तनख्वाह घट चुकी है। बड़े पैमाने पर सरकार रिटायरमेंट स्कीम लेकर आ रही है।

(प्रेम कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल आपको विभिन्न चैनलों की बहसों में देखा जा सकता है।) 

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