Wednesday, December 8, 2021

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किसान आंदोलन के एक साल का सफरनामा

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दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के एक साल पूरा होने से ठीक 6 दिन पहले प्रकाश पर्व (गुरु नानक जयंती) के अवसर पर देशवासियों से क्षमा मांगते हुये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों केंद्रीय कृषि क़ानूनों को रद्द करने की घोषणा कर दी। कल 24 नवंबर को हुई कैबिनेट मीटिंग में तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई। अब 29 नवंबर को शुरु हो रहे शीतकालीन संसद सत्र में कृषि कानून रद्द करने के प्रस्ताव वाले बिल को पेश किया जायेगा।

वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट कहा है कि उनका आंदोलन सिर्फ़ तीन केंद्रीय कृषि क़ानूनों को रद्द कराने तक सीमित नहीं था, और हमारी मुख्य मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ख़रीद की गारंटी क़ानून, किसान दोलन में शहीद हुये 750 किसानों के लिये मुआवजा समेत अन्य कई मांगें है जिस पर हम अब भी क़ायम है।   

गौरतलब है कि तीन केंद्रीय कृषि क़ानूनों को रद्द करवाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ख़रीद की गारंटी देने का क़ानून बनाने की मांग लेकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा 26 नवंबर से दिल्ली में शुरु हुआ किसान आंदोलन 25 नवंबर को अपने एक साल पूरे कर रहा है। किसान सिंघु, टिकरी, कुंडली, शाहजहांपुर बॉर्डर पर विगत एक साल से डेरा डाले हुये हैं। इस दर्म्यान लगभग 671 किसानों ने अपनी शहादत दी है। किसानों ने आंदोलन के लिये ‘ट्रॉली टाइम्स’ नाम से हिंदी अंग्रेजी और पंजाबी में अख़बार निकाला। किसान आंदोलन के एक साल के सफ़र के विभिन्न पड़ावों पर एक नज़र –

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले ‘दिल्ली चलो’ नारे के साथ 25 नवंबर को दिल्ली के लिए निकले तमाम किसान संगठनों के किसान और कृषि मजदूर 26 नवंबर को दिल्ली पहुंचे तो हरियाणा और केंद्र सराकर द्वारा आंसू गैस, वॉटर कैनन, लाठीचार्ज से स्वागत किया गया। उन्हें रोकने के लिये सरकार ने आंसू गैस और वॉटर कैनन से उन पर हमला किया। पुलिस ने लाठी चार्ज किया। जेसीबी मशीनें लगवाकर सड़क और हाईवे खुदवा डाला गया ताकि किसान राजधानी दिल्ली में प्रवेश न कर सकें। सड़कों पर कीलें ठुकवा दी गई। किसानों और दिल्ली के बीच 12 लेयर की बैरिकेडिंग करके कंटीले तार लगवा दिये गये। 

आंदोलन करने दिल्ली पहुंचे किसान संगठनों ने पहले दिन से ही यह स्पष्ट कह दिया था कि वो पूरे साल भर का राशन साथ लेकर दिल्ली आये हैं। उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं है। वहीं किसानों को रोकने में नाकाम हरियाणा सरकार ने 12 हजार किसानों पर जानलेवा हमले समेत विभिन्न धाराओं पर केस दर्ज किया। हरियाणा सरकार की वॉटर कैनन को बंद करने वाले युवक नवदीप सिंह (26) पर अंबाला पुलिस ने आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या का प्रयास करने का चार्ज लगाकर केस दर्ज़ किया साथ ही नवदीप सिंह के पिता जय सिंह और भारतीय किसान यूनियन (BKU) अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढ़ूनी के नाम केस दर्ज़ किया गया।

सरकार और किसान नेताओं में 11 राउंड की बेनतीजा वार्ता

28 नवंबर 2020 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की सीमाओं को खाली करके बुराड़ी के संत निरंकांरी मैदान पर जाने की शर्त पर किसानों के साथ बातचीत करने की पेशकश की। किसानों ने जंतर-मंतर पर धरना देने की मांग करते हुए उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा हम दिल्ली में घिरकर बैठने के बजाय दिल्ली को घेरकर बैठेंगे। 

किसान आंदोलन शुरु होने के बाद 3 दिसंबर से लेकर 22 जनवरी के दर्म्यान (3,5,8,30 दिसंबर तथा 4,8,15,20,22 जनवरी) सरकार के प्रतिनिधि मंत्रियों और संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल 40 किसान संगठनों के नेताओं के बीच 9 बैठकें हुयीं।    

20 जनवरी की बैठक में सरकार ने तीनों कृषि कानूनों पर एक से डेढ़ साल तक अस्थायी रोक लगाने और साझा कमेटी के गठन का प्रस्ताव दिया। ऐसा किसानों के ट्रैक्टर रैली पर सुप्रीम कोर्ट के रुख और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पंजाब, हरियाणा के इतर दूसरे राज्यों में बहस शुरू होने के कारण हुआ। सरकार का प्रपोजल नामंजूर करते हुये किसान संगठनों ने कहा कि कृषि कानून रद्द होने चाहिए, और MSP की गारंटी मिलनी चाहिए। 

सुप्रीमकोर्ट का दख़ल

11 दिसंबर 2020 को भाकियू ने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि किसानों और केंद्र के बीच बातचीत ‘काम कर सकती है’। 12 जनवरी  2021- सर्वोच्च न्यायालय ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर स्टे लगा दिया और सभी हितधारकों को सुनने के बाद विधानों पर सिफारिशें करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन करते हुए समिति से दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा।

671 किसानों की मौत

ट्रॉली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक किसान आंदोलन में अब तक कुल 671 लोगों की मौत हुयी है। यानि रोज़ाना लगभग दो मौत। आज़ादी के बाद किसी अहिंसक और लोकतांत्रिक आंदोलन में संभवतः सबसे ज़्यादा लोगों की जान गई है। इनमें सबसे ज़्यादा मौत प्रतिकूल मौसम के चलते हुयी है। अधिकांश मरने वाले किसान सीमांत किसान या खेतिहर मजदूर थे। और उन पर कर्ज़ भी था। मरने वालों में अधिकांश की उम्र 50 वर्ष के ऊपर थी लेकिन कई युवा किसान 17 से लेकर 40 वर्ष की भी मौत हुयी है। जबकि 37 लोगों ने सुसाइड किया है। वहीं कुछ किसानों की मौत एक्सीडेंट के चलते भी हुआ है।   

5 अप्रैल को किसान आंदोलन में शहीद होने वाले 350 किसानों की स्मृति में संयुक्त किसान मोर्चा ने 23 राज्यों के 2000 गांवों की मिट्टी मंगवाकर शहीद स्मारक बनाया। ये दिल्ली जयपुर हाईवे के खेड़ा-शाहजहांपुर बॉर्डर पर बनाया गया। माटी सत्याग्रह यात्रा 12 मार्च को गुजरात से शुरु हुयी थी। इस स्मारक का डिजाइन अहमदाबाद के लालोंन द्वारा किया गया था। 

किसान आंदोलन में शूटर

22 जनवरी की आखिरी बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान नेताओं को धमकाते हुए कहा था कि वो लोग सरकार के प्रस्ताव (डेढ़ साल तक कृषि क़ानूनों को पेंडिंग रखने) पर सोचें। कृषि क़ानूनों में कोई कमी नहीं है, न ही सरकार कृषि क़ानूनों को वापस लेगी।

सरकार के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद से ही किसान यूनियनों को धमकी भरे फोन आने लगे। क्रांति किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को फोन पर और सोशल मीडिया पर धमकी मिली। 21 जनवरी गुरुवार की रात डॉ दर्शन पाल को एक व्यक्ति ने फोन करके गाली दी और कहा कि किसानों को सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए। शुक्रवार 22 जनवरी की सुबह, जब किसान नेता रुल्दू सिंह मानसा सरकार के साथ बैठक के लिए जा रहे थे, तो दिल्ली पुलिस के एक जवान ने उनकी कार की पिछली विंडस्क्रीन को तोड़ दिया। 22 जनवरी की रात किसान नेताओं ने सिंघु बॉर्डर पर एक शूटर को पकड़कर प्रेस कान्फ्रेंस में उसका बयान दिलवाया और पुलिस को सौंप दिया। शूटर ने मीडिया के सामने बताया था कि उसे 26 की परेड में गड़बड़ी फैलाने और स्टेज पर बैठे चार नेताओं को गोली मारने के लिए उनकी फोटो देकर भेजा गया था। उसने बताया कि हरियाणा पुलिस के राई ताने के एसएचओ ने हमें ये काम सौंपा है। उसने ये भी बताया कि दिल्ली पुलिस के कपड़े में हमारे कई लोग ट्रैक्टर परेड में शामिल होंगे और आगे और पीछे दोनो साइड से हमले करेंगे। उसने ये भी कहा था कि तिरंगा नीचे गिराकर बड़ा बवाल कराने की योजना है।

23 जनवरी को टिकरी बॉर्डर पर किसानों ने एक शूटर पकड़कर पुलिस को सौंपे थे, इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस की वर्दी से भरी एक ट्रक में किसानों ने दिल्ली पुलिस को सौंपने का दावा किया था। 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड से पहले कई बार प्रेस कान्फ्रेंस में किसान नेताओं ने कहा था कि ट्रैक्टर परेड को हिंसक बनाने के लिए सरकार की ओर साजिश की जा रही है। इतना ही नहीं खुद दिल्ली पुलिस की और इंटेलिजेंस की ओर से भी ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा की साजिश की बात कही गई थी। 

ट्रैक्टर परेड और लाल किला हिंसा की पटकथा

गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर सत्ता द्वारा अपनी शक्ति प्रदर्शन के बरक्श आंदोलनकारी किसानों ने तंत्र में गण की दावेदारी का दावा करते हुये दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने की घोषणा की। इसके ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा कार्यक्रम है। आंदोलन के नाम पर देश की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी की इज़ाज़त नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दख़ल से इन्कार के बाद 24 जनवरी 2021- दिल्ली पुलिस ने किसानों को 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की अनुमति दी। साथ ही ट्रैक्टर  मार्च के लिए तीन मार्गों को तय किया।

26 जनवरी 2021 को भाजपाई दीप सिद्धू और लाखा सिधाना की अगुवाई में उपद्रवियों का एक गुट तय रूट और तय समय से अलग लाल किले की ओर निकल गया। उन्होंने पुलिस पर हमला किया, बैरिकेड तोड़ दिए और लाल किला परिसर में प्रवेश कर धार्मिक झंडा भी फहरा दिया। जबकि दिल्ली पुलिस ने नांगलोई, अक्षरधाम, मुकरबा चौक, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, बुराड़ी, आईटीओ में दिल्ली पुलिस किसानों पर लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

लालकिले पर हमला भाजपा के लोगो ने दीप सिद्धू और लक्खा सिधाना की अगुवाई में किया था। दीपसिद्धू भाजपा सांसद व अभिनेता सनी देओल का दाहिना हाथ है जबकि लखा सिधाना इनामी बदमाश। मजे की बात ये है कि 16 जनवरी को एनआईए ने दीप सिद्धू और उसके भाई मनदीप सिद्धू को आंदोलन की विदेशी फंडिंग और खालिस्तान समर्थन के बाबत नोटिस भी भेजा था। 

26 जनवरी की हिंसा के संबंध में कुल 38 प्राथमिकी दर्ज की गई और 84 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 37 किसान नेताओं के खिलाफ़ देशद्रोह की धारा यूएपीए क़ानून के तहत देशद्रोह का केस दर्ज़ किया गया। जबकि 20 किसान नेताओं के खिलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया। दिल्ली पुलिस की एफआईआर में योगेंद्र यादव  और राकेश टिकैट सरवन सिंह पंढेर, सतनाम सिंह पन्नू ,दीप सिद्धू और पंजाब में गैंगस्टर रहे लखबीर सिंह उर्फ़ लक्खा सिधाना का नाम था। 

ट्रैक्टर परेड में हुये हिंसा का पश्चाताप करने के लिये गांधी की पुण्यतिथि पर 30 जनवरी 2021 को किसान संगठनों के नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के बीच एकता की भावना मजबूत करने के लिए सिंघू बॉर्डर से ‘सदभावना रैली’  निकाली। 

टिकैत के आंसू से मिला आंदोलन को जीवन

26 जनवरी की घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकारों विशेषकर उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार ने हमले की नीति अपनाई। 26 जनवरी में लालकिले पर सत्ता द्वारा प्रायोजित हिंसा के बाद किसान यूनियन बैकफुट पर चले गये। दो किसान यूनियन, बीकेयू (भानु) और बी.एम. सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन  दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन से पीछे भी हट गए।

27 जनवरी को आदी रात बागपत हाईवे बड़ौत में किसान आंदोलन पर यूपी पुलिस ने हमला बोल दिया। सोते किसानों पर लाठियां भांजी गई और कुछ ही देर में आंदोलन स्थल को खाली करवा दिया गया। ऐसा ही कुछ दिल्ली–जयपुर हाईवे पर मसानी बैराज पर बैठे किसान आंदोलनकारियों के साथ करके उक्त आंदोलन स्थल को खाली करवा लिया गया। 

इसके बाद 28 जनवरी की दोपहर से ही ग़ाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन की घेरेबंदी बढ़ने लगी। आरएएफ, पीएसी, और यूपी पुलिस की कई बटालियन सैंकड़ों बसों के साथ धरना स्थल की घेरेबंदी कर दी। यूपी पुलिस के अधिकारी किसान मंच पर चढ़ गईं। डीएम ग़ाजियाबाद ने कहा कि आज रात तक हर हाल में ग़ाज़ीपुर बॉर्डर खाली करवाना है। लेकिन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेता राकेश टिकैत के आंसुओं वाले वीडियो और किसान भाइयों से अपने गांव का पानी मँगवाने वाले बयान ने रातों-रात आंदोलन का पूरा माहौल बदल दिया। सारे पुलिस और अर्द्धसैन्यबल सरकार के सिर पर पांव धर के भागे। किसान नेता राकेश टिकैत के मीडिया के आंसुओं ने आंदोलन में जान फूंक दी। जिसके बाद से रातों रात ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों के जत्थों का जुटना शुरू हो गया है। हालात ये है कि गाजीपुर बॉर्डर पर एक बार फिर किसानों का मजमा लगना शुरू हो गया है और दूर-दूर तक एक बार फिर ट्रैक्टर ट्रॉली ही नजर आने लगे। 

भाजपा नेताओं की अगुवाई में किसान आंदोलन पर हमला

28 जनवरी की शाम लोनी विधानसभा के भाजपा विधायक गुर्जर और साहिबाबाद के भाजपा विधायक सुनील शर्मा की अगुवाई में सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता गाज़ीपुर बॉर्डर पहुंचे और किसान आंदोलनकारियों पर हमला कर दिया। उनके टेंट उखाड़े और मार-पीट की। साथ ही देश के गद्दारों को जूते मारों सालों को, दिल्ली का है ऑर्डर खाली करो बॉर्डर, तिरंगे का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान जैसे हिंसक नारे लगाये गये।  

28 जनवरी को ही लगभग 40-50 दिल्ली भाजपा के नेता, कार्यकर्ता और हिंदू सेना संगठन के लोग स्थानीय निवासी बनकर सिंघु बॉर्डर पहुंचकर नारेबाजी की। कुछ ऐसा ही नजारा शाहजहांपुर बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर भी दोहराया गया। 

29 जनवरी को दोपहर लगभग 200 भाजपा कार्यकर्ता और नेता सिंघु बॉर्डर पहुंचे। उस समय सिंघु बॉर्डर पर ठीक बैरिकेड्स के पास जाने कहां से 2 ट्रक बोल्डर एक जगह लाकर गिराये गये थे। उनके हाथों में लाठी डंडे, पत्थर रॉड तलवार झंडे आदि थे। वो लोग तीन लेयर की बैरिकेड्स पार करके सीधे किसानों के टेंट तक जा पहुंचे। उन्होंने किसानों का टेंट उखाड़ा और खूब पत्थरबाजी की। जबकि पुलिस तमाशबीन बनी खड़ी थी। जब किसानों की ओर से प्रतिक्रियाएं शुरु हुईं। और भाजपा कार्यकर्ता और किसान आंदोलनकारी बिल्कुल आमने सामने आ गये तब जाकर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसूगैस के गोले दागे। 

संयुक्त राष्ट्र को संबोधन और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का दख़ल

16 मार्च 2021 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में डॉ दर्शनपाल ने वक्तव्य देकर भारत सरकार द्वारा लाये गये तीन नये कृषि क़ानूनों के प्रति किसानों की चिंता, अहित और असुरक्षाबोध से संयुक्त राष्ट्र को परिचित कराया। उन्होंने अपने वक्तव्य में संयुक्त राज्य के घोषणापत्र का हवाला देते हुए किसानों के अधिकारों व दुनिया भर के छोटे किसानों के हितों की रक्षा की अपील की। 

वहीं किसान आंदोलन के समर्थन में कई अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों ने भी आवाज़ बुलंद की। अंतर्राष्ट्रीय पॉप गायिका रेहाना और पोर्न स्टार मिया ख़लीफ़ा और पर्यावरणविद़ ग्रेटा थर्नबर्ग, अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का भांजी मीना हैरिस और ब्रिटिश सांसद भी भारतीय किसानों के मुद्दें के साथ खड़े हुये।   

किसान आंदोलन के अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनते देख केंद्र सरकार ने पी आर मैनेजमेंट के तहत सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर, विराट कोहली, आजिक्य रहाणे, रवि शास्त्री, अक्षय कुमार,  तापसी पन्नू से अपने पक्ष में ट्वीट करवाया। 

टूलकिट विवाद

जनवरी महीने में किसान आंदोलन के समर्थन में स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने एक डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में आंदोलन कैसे करना है, इसकी जानकारी वाले टूलकिट को साझा किया गया। टूलकिट में किसान आंदोलन को बढ़ाने के लिए हर ज़रूरी कदम के बारे में बताया गया है। ट्वीट में कौन सा हैशटैग लगाना है, क्या करना है, कैसे बचना है, इसकी जानकारी दी गयी थी। किसान आंदोलन के लिए भी इसी तरह का एक टूलकिट इस्तेमाल किया गया था,जो स्विट्जरलैंड की क्लाइमेट ऐक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने साझा किया था। 

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इस मामले में टूलकिट के निर्माताओं के ख़िलाफ़ ‘खालिस्तान-समर्थक’ अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ किया और भारत सरकार के ख़िलाफ़ ‘सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध छेड़ने’ का आरोप लगाया। साइबर सेल के ज्वाइंट कमिश्नर प्रेमनाथ के मुताबिक,’हम सब जानते हैं कि 26 जनवरी को कितने बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। किसान आंदोलन तो 27 नवंबर से चल रहा था। इस टूलकिट के बारे में हमें 4 फरवरी को पता चला, जिसे की खालिस्तानी संगठनों की मदद से तैयार किया गया था।’

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 13 फरवरी को 22 वर्षीय पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया, जहां से उन्हें 5 दिन की रिमांड पर लिया गया। दिल्ली पुलिस का दावा था कि, दिशा रवि ने वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था और उसके जरिए टूलकिट डॉक्यूमेंट एडिट करके वायरल किया। वह टूल किट डॉक्यूमेंट का मसौदा तैयार करने वाले षड्यंत्रकारियों के साथ काम कर रही थीं। इन लोगों ने देश के ख़िलाफ़ बड़ी साजिश तैयार की थी। दिल्ली पुलिस ने कहा रवि, जैकब और शांतनु ने ही वह विवादास्पद टूलकिट तैयार किया था और दूसरों को एडिट करने के लिए इसे साझा किया था। पुलिस के मुताबिक दिशा रवि के सेलफोन से उनके ख़िलाफ़ पुख्ता सबूत मिले हैं। जबकि, वह गूगल डॉक्यूमेंट शांतनु के ईमेल अकाउंट से बनाया गया था।

कार्पोरेट के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन

नये दौर का नया किसान आंदोलन सीधे सीधे सरकार की प्रो-कार्पोरेट पोलिसी के खिलाफ़ टकरा रहा है। 28 अक्टूबर को संयुक्त किसान मोर्चा के ‘रेल रोको’ अपील पर संगरूर के गांव डसका निवासी नौजवान अमृतपाल सिंह संगरूर के रेलवे ट्रैक पर खड़ा हो गया, अडानी सायलो प्लांट गेहूँ भरने जा रही मालगाड़ी को प्लांट के अंदर जाने नहीं दिया।

दशहरा पर किसानों ने नरेंद्र मोदी के साथ अडानी-अंबानी का पुतला फूँका। किसानों ने रिलायंस के पेट्रोल पंप और रिलायंस स्टोर के घेराव किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने जीयो सिम पोर्ट कराने की अपील की जिसका असर यह हुआ कि करोड़ों जियो सिम दूसरे नेटवर्क पर पोर्ट हो गये। टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (ट्राई) को 11 दिसंबर को लिखे पत्र में रिलायंस ने कहा है कि उसके ख़िलाफ़ अफ़वाह फैला रही हैं कि उसे नए कृषि क़ानूनों से फ़ायदा होगा। ट्राई को लिखे खत में रिलायंस जियो ने कहा है कि उसे बड़ी संख्या में अपने नंबर्स को पोर्ट कराने वाली रिक्वेस्ट मिल रही हैं और इनमें सब्सक्राइबर कृषि क़ानूनों को एकमात्र कारण बता रहे हैं जबकि उन्हें हमारी सेवाओं से कोई दिक्कत नहीं है। 

किसानों ने अपने आंदोलन के दौरान इस बात की अपील लोगों से की है कि वे अंबानी-अडानी के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करें।  इसके तहत रिलायंस के पेट्रोल पंप से तेल न डलवाने और जियो सिम को पोर्ट करवाकर कोई और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर की सेवाएं लेने की अपील सिंघु बार्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर, चिल्ला और शाहजहांपुर बॉर्डर से लगातार किया जा रही है। इसके अलावा मॉल, शॉपिंग काम्प्लेक्स में मिलने वाले अडानी-अंबानी के सारे प्रोडक्ट्स का भी बहिष्कार करने की अपील किसानों ने की है। 

किसान आंदोलन के दौरान देश में जीयो टॉवर तोड़े जाने और टॉवर की बिजली काटे जाने की घटनायें हुई। अकेले पंजाब में किसान आंदोलन के बीच अब तक कुल 1500 टावर तोड़े गये। 

22 दिसंबर को मुंबई स्थित कार्पोरेट हेडक्वाटर का घेराव किया। हजारों किसानों इकट्ठा होकर अंबेडकर पार्क से बांद्रा कुर्ला स्थित अबांनी दफ्तर तक मार्च भी निकाला।   

गांधी जयंती से एक दिन पहले किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने किसानों से कार्पोरेट घरानों के सामानों का बहिष्कार करने की अपील की थी। तब से लगातार किसान कार्पोरेट के सामानों का बहिष्कार कर रहे हैं। किसानों का ‘कार्पोरेट सामान बहिष्कार आंदोलन’ गांधी के ‘स्वदेशी आंदोलन’ के तहत विदेशी कपड़ों के बहिष्कार करने की मुहिम से प्रेरित है।

जबकि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में रिलायंस के पेट्रोल पंप, स्टोर और शॉपिग माल्स के सामने किसानों द्वारा लगातार धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। 

किसान आंदोलन में दलित आदिवासी व पिछड़े 

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले चल रहे किसान आंदोलन में भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग उठती आ रही है। सिर्फ़ इतना ही नहीं किसान आंदोलन में हूल क्रांति दिवस, संविधान दिवस भी मनाया गया। संयुक्त किसान मोर्चा बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, सावित्री बाई फुले और सर छोटू राम, सिदो कान्हू जैसे दलित बहुजन आदिवासी नायक नायिकाओं पर भी बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर चुका है। और तो और गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने सभी किसानों से अपने घरों में बाबा साहेब और सर छोटू राम की तस्वीरें लगाने की भी अपील किया था।

स्कूल का खुलना और शिफ्ट होना

22 जनवरी से ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल बच्चों को पढ़ाने के लिए निर्देश सिंह ने ‘सावित्री बाई फुले पाठशाला’ शुरु किया। इस पाठशाला में भाकियू नेता राकेश टिकैत ने भी बच्चों की क्लास लिया। इस पाठशाला में किसानों के बच्चों के साथ साथ कूड़ा बीनने वाले बच्चे भी पढ़ते थे। लेकिन मांओं के साथ किसानों के बच्चों के अपने गांव लौट जाने के बाद किसान आंदोलन में शामिल लोगों ने पाठशाला संचालिका को तरह तरह से प्रताड़ित करके पाठशाला दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिये विवश कर दिया। निर्देश सिंह बताती हैं उन्होंने इसके बाबत भाकियू नेता राकेश टिकैत से भी शिक़ायत की थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। जबकि उस पाठशाला में एक एक छोटी सी लाइब्रेरी भी थी जिसमें शाम को 6 बजे से रात 11 बजे तक संविधान के मौलिक अधिकार और संविधान की प्रस्तावना पर लेक्चर होता था।

निर्देश सिंह, नौदीप कौर, शिव कुमार जैसे दलित एक्टिविस्टों ने किसान आंदोलन को हरियाणा और पंजाब से निकालकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के दूर दराज के जिलों तक फैला दिया है। इसी बात से घबड़ाकर केंद्र सरकार ने पहले नौदीप कौर और शिव कुमार को पकड़कर जेल में डाल दिया और उन्हें बर्बरतम शारीरिक मानसिक यातनायें दी। 

लखीमपुर खीरी जनसंहार

आंदोलन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने अपील किया कि देश भर के किसान अपने अपने इलाके के सत्ताधारी भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं, मंत्रियों विधायकों सांसदों का घेराव करके उनका विरोध करें, उन्हें काला झंडा दिखायें। इसी कड़ी में पंजाब, हरियाणा उत्तर प्रदेश में कई भाजपा नेताओं को किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।  25 सितंबर को संपूर्णानगर क्षेत्र में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी का आगमन होने पर किसानों ने गदनियां चौराहे और महंगापुर गुरुद्वारा के पास काले झंडे दिखाये। 

संपूर्णानगर में किसान रैली को संबोधित करते हुये अजय मिश्रा टेनी ने काला झंडा दिखाने वाले किसानों को धमकी देते हुये कहा कि ‘हम आप को सुधार देंगे 2 मिनट के अंदर.. मैं केवल मंत्री नहीं हूं, सांसद विधायक नहीं हूं। सांसद बनने से पहले जो मेरे विषय में जानते होंगे उनको यह भी मालूम होगा कि मैं किसी चुनौती से भागता नहीं हूं और जिस दिन मैंने उस चुनौती को स्वीकार करके काम करना शुरू कर दिया उस दिन बलिया नहीं लखीमपुर तक छोड़ना पड़ जाएगा यह याद रखना.।

इतना ही नहीं इसके बाद 26 सितंबर को महंगापुर में एक मुक़दमा अमनीत सिंह औऱ दो अन्य व गदनिया में महेंद्र सिंह समेत 40-50 अज्ञात पर मुक़दमा दर्ज़ करवाया गया। और अगल दिन पुलिस उनके घरों में दबिश देकर महिलाओं को प्रताड़ित की।             

इसके बाद 3 अक्टूबर को केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी अपने गांव में एक कार्यक्रम कर रहे थे जिसमें शामिल होने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या शामिल होने आ रहे थे। टेनी की धमकी और पुलिसिया कार्रवाई से गुस्साये किसानों ने विरोध करने की योजना के तहत तिकुनिया पहुंचे। जिससे प्रशासन ने रूट डायवर्ट कर दिया। किसान वापिस लौट रहे थे तभी पीछे से गाड़ियां चढ़ाकर उन्हें कुचलकर मार दिया गया। इस घटना में दलजीत सिंह (32), गुरविंदर सिंह (20), लवप्रीत सिंह (30) और नक्षत्र सिंह (65)  और एक स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप (28) की भी मौत हो गई।  इस घटना में अजय मिश्रा टेनी के ड्राईवर हरिओम (35) और दो भाजपा कार्यकर्ता श्याम सुंदर (40) और शुभम मिश्रा (30) और हो गई थी।

60 चश्मदीदों कोर्ट में ने आशीष मिश्रा को मौके पर देखने की गवाही दी है। जांच के लिये गठित एसआईटी ने प्रदर्शनकारी किसानों पर रूट डायवर्जन के बावजूद पीछे से गाड़ी चढ़ाने की घटना को सोची समझी साजिश माना है। 

वहीं लखीमपुर हिंसा मामले में फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में अंकित दास की रिपीटर गन, पिस्टल और आशीष मिश्रा की राइफल और रिवॉल्वर से फॉयरिंग की पुष्टि हुयी है।

वहीं इससे पहले 21 फरवरी को नये कृषि कानूनों के फायदे गिनाने शामली पहुंचे केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। शामली के भैंसवाल में संजीव बालियान और भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते लोग नजर आये।

इसके अगले दिन पश्चिम यूपी मुज़फ्फ़रनगर के शोरम की ऐतिहासिक चौपाल पर किसानों को समझाने गए केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का विरोध करने पर उनके साथ मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने विरोध करने वाले किसानों के साथ मार-पीट की थी।

10 जनवरी 2021 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की पहले से तय किसान पंचायत बैठक किसानों के विरोध-प्रदर्शन की वजह से रद्द करनी पड़ी थी। 

24 दिसंबर 2020 हरियाणा के जींद जिले के उचाना में किसानों ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आने से पहले बनाए गए हेलीपैड को फावड़े से खोद डाला था इतना ही नहीं किसानों ने दुष्यंत चौटाला गो बैक के नारे भी लगाये थे।

3 अक्टूबर 2021 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ में प्रगतिशील किसानों की बैठक में कहा कि उत्तर-पश्चिम हरियाणा के हर जिले में किसानों के खिलाफ डंडे उठाने वाले वालंटियर खड़े करने चाहिए।

वहीं 28 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री खट्‌टर करनाल में भाजपा की संगठनात्मक बैठक ले रहे थे। मीटिंग के स्थान से कुछ दूरी पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात करनाल के तत्कालीन SDM आयुष सिन्हा ने पुलिसवालों को किसानों के सिर फोड़ने का विवादित आदेश दिया था। 

सिंघु बॉर्डर पर हत्या

15 अक्टूबर शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर पर  मंच के पास 35 वर्षीय दलित शख्स लखबीर सिंह की हत्या कर दी गई थी, जिसके शव से हाथ को अलग करके बैरिकेड पर लटका दिया गया था। लखबीर सिंह पंजाब के तरन-तारन जिले के चीमा खुर्द गांव का रहने वाला था। उसके माता-पिता की पहले ही मौत  हो चुकी है, जबकि उसकी तीन बेटियां भी हैं, जो कि अपनी मां के साथ रहती हैं। लखबीर सिंह कुछ वक्त से निहंगों के साथ ही रहकर सेवादारी कर रहा था।

बाद में निहंग समूह निर्वेर खालसा-उड़ना दल ने दलित युवक लखबीर की हत्या की जिम्मेदारी ली। निहंग सरवजीत सिंह ने दावा किया कि उसने ही हत्या की थी।

लखबीर सिंह की हत्या के बाद संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा गया कि उन्होंने कई मौकों पर दिल्ली और हरियाणा की पुलिस को निहंग सिखों को लेकर हरियाणा की पुलिस को निहंग सिखों को लेकर अलर्ट किया था। यह भी बता दिया गया था कि निहंग उनके मोर्चे का हिस्सा नहीं हैं।

अपनी प्रेस रिलीज में मोर्चा ने कहा कि – कई बार निहंगों से वह जगह खाली करने को कहा गया था। उनसे पवित्र ग्रंथ (जिसकी बेअदबी की कोशिश के आरोप मृतक पर लगे) को वहां प्रदर्शन वाली जगह से हटाने को कहा गया था। संयुक्त किसान मोर्चा ने आगे कहा कि मृतक लखबीर सिंह और निहंग, दोनों से ही उनका कोई संबंध नहीं है। 

देश के पांच प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने कृषि क़ानून रद्द करने की घोषणा की है। लेकिन एक सवाल अब भी अनुत्तरित है कि किसान आंदोलन के एक साल में जिन 654 किसान परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है उनकी भरपाई कौन करेगा?    

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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