Mon. Feb 24th, 2020

एक ही जमात के हिस्से बन गए हैं दिल्ली के पुलिस वाले और राजधानी के शोहदे

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जामिया में प्रदर्शन के दौरान घायल छात्रा।

नई दिल्ली। दिल्ली के गार्गी कॉलेज में छात्राओं के साथ बदसलूकी का मसला आज संसद में भी गूंजा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस मुद्दे को सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में गुंडों के एक समूह ने छात्राओं के साथ बदतमीजी की है। सरकार ने उस पर अभी तक क्या कदम उठाया है? इसका जवाब देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि घटना की जानकारी सरकार को है और हमलावर छात्र नहीं थे बल्कि वे बाहरी तत्व थे। और कॉलेज प्रशासन से जानकारी ली गयी है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि निशंक जब यह जवाब दे रहे थे तो उनके पीछे बैठे बीजेपी सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह और एक दूसरे सांसद संजीव बलियान मुस्कराते हुए एक दूसरे से बात कर रहे थे। देश की राजधानी में घटी इस बीभत्स घटना पर सरकार से जिस संजीदगी की उम्मीद की जानी चाहिए थी वह कहीं दूर-दूर तक नहीं दिख रही थी।

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दरअसल यह कोई अकेली और अलग-थलग घटना नहीं है। गार्गी कॉलेज में छात्राओं के ऊपर यौन हमला करने वाले कोई और नहीं बल्कि उसी जमात के सदस्य हैं जिसकी इस समय केंद्र में सत्ता है। बताया जा रहा है कि छह फरवरी को घटी इस घटना में हमलावर पास ही सीएए के समर्थन में आयोजित रैली से लौट रहे थे। तभी रास्ते में उन्होंने गार्गी कैंपस में धावा बोल दिया। इसमें कई अधेड़ उम्र के लोग भी शामिल थे। और फिर उन्होंने पूरे कैंपस में जो तांडव किया वह शायद ही दिल्ली के किसी कॉलेज में कभी सुनने को मिला हो। एक-एक कर उन लोगों ने छात्राओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कैंपस का आलम कुछ ऐसा था जैसे भेड़ियों ने हमला कर दिया हो और चीतलें छुपने के लिए जगह तलाश रहे हों। लेकिन यहां तो लड़कियों को छुपने भी नहीं दिया गया।

उन्हें उनके शौचालयों में घुसकर प्रताड़ित किया गया। रिपोर्ट तो यहां तक है कि इन शोहदों ने खड़े होकर छात्राओं के सामने हस्तमैथुन तक किया। अब राजधानी के किसी पॉश इलाके के उच्च शिक्षण संस्थान में इससे ज्यादा गिरी हरकत और क्या हो सकती है। बताया जा रहा है कि ये सभी दीवारों पर लगे कटीले तारों को भी फांद कर परिसर में घुसे थे। इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस के जवान गेट पर तैनात थे लेकिन उन्होंने उनके खिलाफ कार्रवाई करना भी जरूर नहीं समझा।

आज जब घटना के तकरीबन चार दिन बाद मामला प्रकाश में आया है। और लड़कियों ने परिसर में प्रदर्शन किया है। महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी दौरा कर छात्राओं से उनका हाल-चाल जाना है और घटना के बारे में विस्तार से समझने की कोशिश की है। साथ ही मामले की पुलिस में एफआईआर भी हो गयी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी? क्या बीजेपी के उन समर्थकों के खिलाफ पुलिस जाने की हिम्मत कर सकेगी जिनको जगह-जगह पार्टी के कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बात किसको नहीं पता है कि इन्हीं तत्वों को बीजेपी जॉंम्बी की तरह इस्तेमाल कर रही है। लिहाजा इस मामले का हस्र भी जेएनयू जैसा नहीं होगा इसकी क्या गारंटी है।

जेएनयू की घटना को तकरीबन एक महीना दस दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक मामले में एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। जबकि सारी चीजें अब पब्लिक डोमेन में आ गयी हैं। नकाब के पीछे छुपे उन चेहरों को पहचान लिया गया है। लेकिन चूंकि वे सभी सत्ता पक्ष के साथ जुड़े है लिहाजा उन पर हाथ रखने की दिल्ली पुलिस हिम्मत भी नहीं कर पा रही है। ऐसे में गार्गी कॉलेज में भी हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई होगी यह किसी का सपना ही हो सकता है। क्योंकि इसके हकीकत में बदलने की गुंजाइश बहुत कम है।

ऊपर से इस कार्रवाई की उम्मीद उऩ पुलिस कर्मियों से करना जो इस समय महिलाओं की सरेराह इज्जत उतारने का कोई मौका नहीं चूक रहे/रही हैं। कहीं और जाने की जरूरत नहीं है आज ही जामिया की छात्राओं के साथ दिल्ली की सड़कों पर जो हुआ है उसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलेगी। बताया जा रहा है कि संसद मार्च के लिए जा रही छात्राओं के साथ पुलिस बेहद बदतमीजी से पेश आयी है। उसने न केवल उनकी पिटाई की बल्कि तकरीबन 10 छात्राओं के प्राइवेट पार्टों को निशाना बना कर हमला किया गया। जिससे उन सभी को गहरी अंदरूनी चोटे आयी हैं। यह सब कुछ खुलेआम बीच सड़क पर हुआ है। और यह बात केवल छात्राओं ने नहीं कही है बल्कि डॉक्टरों ने इसकी पुष्टि की है। एक डॉक्टर ने इंडिया टुडे की रिपोर्टर को बताया कि ’10 से ज्यादा छात्राओं के प्राइवेट पार्टों पर हमला किया गया है। चोट बेहद गहरी है। और कुछ को इस तरह से मारा गया है कि हमें उन्हें अल शिफा में शिफ्ट करना पड़ा है। क्योंकि उनकी चोट बेहद गंभीर है।’

डॉक्टरों ने बताया कि कुछ छात्रों के सीने में अंदरूनी चोटें भी आयी हैं क्योंकि उनके सीने में लाठियों से मारा गया है।

अस्पताल में भर्ती एक छात्रा ने बताया कि एक महिला पुलिस ने उसका बुर्का हटा दिया और उसके बाद लाठी से उसके प्राइवेट पार्ट पर चोट पहुंचायी। उसने बताया कि ‘पुलिस ने अपने बूटों से मेरे प्राइवेट पार्ट पर चोट मारी। एक महिला पुलिसकर्मी ने मेरा बुर्का उतार दिया और फिर लाठी से मेरे प्राइवेट पार्ट पर हमला बोल दिया।’ 

अब इन पुलिस वालों से किसी के खिलाफ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में न्याय करने की उम्मीद करना बिल्कुल बेमानी है। जो खुलेआम खुद सड़कों पर इस तरह की हरकतों को अंजाम दे रहे हैं उनसे कैसे उसके खिलाफ खड़े होने की उम्मीद की जा सकती है। सच्चाई यह है कि पुलिसकर्मी और हमलावर शोहदे अब एक ही जमात के हिस्से बन गए हैं। अनायास नहीं जब भी इस तरह का कोई मौका आ रहा है तो पुलिस वाले उनको बचाते दिख रहे हैं और वो खुद भी पुलिस के संरक्षण में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। शाहीन बाग में हुई कई फायरिंग की घटनाओं में यह बात बिल्कुल साफ-साफ नजर आयी।

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