पीटीआई भी हो गयी अब राष्ट्रद्रोही! प्रसार भारती ने कहा-राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है कवरेज, भेजा नोटिस

Estimated read time 1 min read

नई दिल्ली। मीडिया पर शिकंजे की जो कसर बाकी थी अब उसे पीटीआई को अपने कब्जे में लेने की कोशिश के जरिये पूरा किया जा रहा है। प्रसार भारती ने कहा है कि पीटीआई की कवरेज राष्ट्रीय हितों के हिसाब से नहीं है लिहाजा वह उसके साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करेगी। बताया जा रहा है कि पीटीआई द्वारा भारत स्थित चीनी राजदूत के किए गए एक साक्षात्कार से प्रसार भारती हत्थे से उखड़ गयी है। इस न्यूज कवरेज को लेकर उसका कहना है कि यह राष्ट्रीय हितों और भारतीय भौगोलिक अखंडता को नजरंदाज करने वाला है।

प्रसार भारती न्यूज सर्विस के हेड समीर कुमार ने पीटीआई के चीफ मार्केटिंग अफसर को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा है। शनिवार को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने कहा है कि पीटीआई द्वारा की जा रही न्यूज़ रिपोर्टिंग राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है।

पत्र कहता है कि “पीटीआई के पूरे रवैये को समग्रता में ध्यान में रखते हुए प्रसार भारती पीटीआई के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा की जरूरत महसूस करता है और इस सिलसिले में जल्द ही एक फैसले से (आपको) अवगत कराया जाएगा।”   

इंडियन एक्सप्रेस ने जब पीटीआई से इस सिलसिले में संपर्क किया तो उसका कहना था कि “इस दोपहर (कल) हम लोगों को प्रसार भारती से एक पत्र हासिल हुआ है। हम इसकी जांच कर रहे हैं और तथ्यों के साथ एक प्रक्रिया में हम इसका जवाब देंगे।”

यह पूरा मामला भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव और गतिरोध के बाद सामने आया है। आप को बता दें कि इस झड़प में अब तक 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो चुकी है।

पत्र में कहा गया है कि “इसमें इस बात का भी जिक्र किया गया है कि पीटीआई को एक नहीं कई बार पब्लिक ब्रॉडकास्टर द्वारा उसकी संपादकीय कमियों के लिए अलर्ट किया गया है। क्योंकि झूठी खबरों का प्रसारण सार्वजनिक हितों को चोट पहुंचा रहा है।”

आल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन को संचालित करने वाली प्रसार भारती एक स्वायत्त संस्था है जिसका मालिकाना हक सरकार के पास है। 2013 से प्रसार भारती पीटीआई को उसकी सेवा के लिए सालाना 9.15 करोड़ रुपये देती है। हालांकि 2017 से इस सार्वजनिक प्रसारणकर्ता ने अपने 25 फीसदी भुगतान को रोक रखा है और वह कीमत पर फिर से उसके साथ बातचीत करना चाहती है।

चीन के राजदूत सुन वेइडांग का पीटीआई द्वारा लिया गया साक्षात्कार भारत स्थित चीनी दूतावास की वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ था। इसमें केवल तीन सवाल थे और फिर उनके जवाब थे।

साक्षात्कार में सुन ने एलएसी पर गतिरोध के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था। और जब विवाद के हल के बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी चीन पर नहीं है।

साक्षात्कार जिसको लेकर बवाल हुआ।

उसी से जुड़ी बीजिंग से एक रिपोर्ट में पीटीआई ने कहा कि उसने एलएसी पर चीनी हमले और ढांचे के निर्माण के बारे के सुन से सवाल किया था लेकिन राजदूत ने उनके उत्तर नहीं दिए।

संयोग से पीटीआई के साथ हुए इस साक्षात्कार में यह चिन्हित किया गया कि पहली बार कोई एक बीजिंग का अधिकारी इस बात को रिकार्ड पर दर्ज कराता है कि 15 जून को हुई गलवान घाटी हिंसा में चीनी पक्ष की तरफ से भी मौतें हुई थीं।

पीटीआई का रजिस्ट्रेशन 1947 में हुआ था और इसने अपना कामकाज 1949 में शुरू किया था। मार्च 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक इसके 5416 शेयर का देश-दुनिया के 99 मीडिया आर्गेनाइजेशन के पास मालिकाना हैा। पीटीआई के बोर्ड के सदस्यों की संख्या 16 है। जिसमें चार स्वतंत्र निदेशक हैं और बोर्ड का चेयरपर्सन हर साल बदलता रहता है। मौजूदा समय में पंजाब केसरी के सीईओ और एडिटर इन चीफ इसके चेयरमैन हैं। यह देश की सबसे बड़ी एजेंसी है जो मीडिया समूहों को सब्सक्रिप्शन वितरित करने के जरिये अपनी कमाई करती है।

आपको बता दें कि इसके पहले इमरजेंसी के दौरान पीटीआई को शंट करने की कोशिश की गयी थी। जब 1976 में आल इंडिया रेडियो की तरफ से उसी तरह की पीटीआई को नोटिस दी गयी थी।  

(ज्यादातर इनपुट इंडियन एक्सप्रेस से लिए गए हैं।)

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours