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अर्णब और कंगना के खिलाफ महाराष्ट्र के दोनों सदनों में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में रिपब्लिक टीवी के चीफ अर्णब गोस्वामी और अभिनेत्री कंगना राणावत के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया गया है। गोस्वामी पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी के मुखिया शरद पवार के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है जबकि कंगना पर मुंबई की तुलना पाक अधिकृत कश्मीर से करने को मुद्दा बनाया गया है।

असेंबली में अर्णब के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश करते हुए शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाइक ने उन पर अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी मुखिया शरद पवार पर आधारहीन टिप्पणी करने की बात कही। उन्होंने कहा कि टीवी बहसों के दौरान गोस्वामी लगातार मंत्रियों, लोकसभा और विधानसभा सदस्यों का अपमान कर रहे हैं। और सुशांत सिंह राजपूत केस में उन्होंने बहुत सारे लोगों के खिलाफ बिल्कुल तथ्यहीन आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि “स्वतंत्र मीडिया के नाम पर वह चीफ मिनिस्टर, पवार साहेब और दूसरे चुने गए प्रतिनिधियों की छवि को दूषित कर रहे हैं। हम इसकी निंदा करते हैं और इस हाउस से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं।”

विपक्ष की बीजेपी बेंच से जोरदार विरोध के बीच संसदीय मामलों के मंत्री परब ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और स्पीकर से उसे स्वीकार करने की गुजारिश की। परब ने कहा कि “जब कोई प्रधानमंत्री को निशाना बनाता है तो आप नाराज हो जाते हैं। तब आप क्यों नहीं उसी तरह से महसूस करते हैं जब कोई चीफ मिनिस्टर को निशाना बनाता है।”

एनसीपी नेता छगन भुजबल और समाजवादी पार्टी के अबु आज़मी ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। भुजबल ने कहा कि “हालांकि हमारे लोकतंत्र में हर कोई अपना विचार रखने के लिए स्वतंत्र है लेकिन उसमें कुछ शालीनता होनी चाहिए।”

सदन का संचालन कर रहे डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवल ने रूलिंग दी कि सरनाइक के प्रस्ताव पर विधायी नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सरनाइक इस मसले पर गृहमंत्री का बयान चाहते थे।

इस सुझाव का विरोध करते हुए विपक्ष के नेता देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि मंगलवार सत्र का आखिरी दिन था और सप्लीमेंट्री मांगों समेत ढेर सारे महत्वपूर्ण काम बचे हुए थे  इसके अलावा महामारी भी है जिस पर विचार होना चाहिए था। इसके साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर मीडिया को लेकर  दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि सरकार मीडिया में विरोध की आवाज का गला घोंटना चाहती है।

इस दौरान सदन की कार्यवाही 10-10 मिनट के लिए तीन बार स्थगित हुई। इसके अलावा आधा-आधा घंटे के लिए दो बार सदन को स्थगित करना पड़ा। क्योंकि बीजेपी के नेता प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। और वो लगातार नारेबाजी कर रहे थे।

बाद में बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए सरनाइक ने दावा किया कि चेयर ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। यहां तक कि जिरवल की आखिरी रूलिंग मामले पर विचार करने वाली थी। जिसे विधानसभा के सचिवालय ने दर्ज किया है।

बहस के दौरान अभिनेत्री कंगना राणावत की मुंबई पुलिस के खिलाफ की गयी टिप्पणी भी सामने आयी। गृहमंत्री अनिल देशमुख ने निंदा करते हुए टिप्पणी को पुलिस और सूबे का अपमान करार दिया।

उसी तरह का एक प्रस्ताव शिव सेना के विधायक मनीषा कयांदे द्वारा स्वामी के खिलाफ विधान परिषद में भी पेश किया गया। जबकि कांग्रेस के अशोक जगताप ने मुंबई को बदनाम करने के खिलाफ कंगना के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया।

महाराष्ट्र विधान परिषद के चेयरमैन रामराजे नाइक निम्बालकर ने दोनों प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि “हमने विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। किसी कमेटी की गैरमौजूदगी में इस पर मैं ही फैसला करूंगा।”

राणावत ने यह कहते हुए कि वह शहर में असहज महसूस करती हैं, मुंबई की पाक अधिकृत कश्मीर से तुलना की थी। और इसके बाद उनकी शिवसेना नेता संजय राउत के साथ मौखिक बहस शुरू हो गयी थी।

(इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर आधारित।)

This post was last modified on September 9, 2020 12:31 pm

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Published by
Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi