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दक्षिण अफ्रीका: पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की गिरफ्तारी के खिलाफ हिंसा में 72 की मौत, चौतरफा अराजकता का माहौल

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई हिंसा में 72 लोगों की मौत हो गयी है जबकि हजारों लोग घायल और गिरफ्तार किये गये हैं। हिंसा सबसे पहले जैकब जुमा के गृह-राज्य क्वाजूलू-नेटल में शुरू हुई थी और अब देश के सबसे बड़े शहर जोहानिसबर्ग से होती हुई तटीय शहर डरबन तक पहुंच चुकी है। विरोध प्रदर्शनों के तौर पर शुरू हुई यह हिंसा अब लूटपाट और आगजनी में बदल चुकी है। दक्षिण अफ्रीका की पुलिस भी लूटपाट करने में शामिल है। और पुलिस द्वारा लूटपाट के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। 

वहीं राष्ट्रपति सिरिल रैमफोसा के सुर में सुर मिलाते हुए पुलिस मंत्री भेकी सेले ने कहा, “लोगों के निजी हालात या नाखुशी की कोई भी हद हमारे लोगों को किसी को लूटने का अधिकार नहीं देती।” हालांकि उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री नोजीवीवे मापिसा-नकाकुला ने कहा कि उन्हें फिलहाल आपातकाल लगाने की ज़रूरत नहीं लगती। 

जबकि हिंसा के चलते दक्षिण अफ्रीका की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है। अस्पतालों में ऑक्सीजन व ज़रूरी जीवनरक्षक दवाईयां खत्म हो गयी हैं। पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल नहीं हैं, एटीएम खाली पड़े हैं। 

दक्षिण अफ्रीकी पुलिस (SAPS) ने कहा है कि कम से कम 72 लोगों की जान जा चुकी है और 1,234 लोग गिरफ्तार किये गये हैं। दो और प्रांतों में हिंसा फैलने की खबरों के बीच पुलिस का कहना है कि “पुलिस कर्मी खतरे के तौर पर चिन्हित इलाकों में गश्त कर रहे हैं ताकि मौके का फायदा उठाकर हो रहीं आपराधिक गतिविधियों को रोका जा सके।” सेना को भी सड़कों पर उतार दिया गया है ताकि हिंसा को रोका जा सके। 

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि सरकार हिंसा रोकने के लिए काम कर रही है, जो सबसे पहले जैकब जुमा के गृह-राज्य क्वाजूलू-नेटल में शुरू हुई थी और अब देश के सबसे बड़े शहर जोहानिसबर्ग से होती हुई तटीय शहर डरबन तक पहुंच चुकी है। विरोध प्रदर्शनों के तौर पर शुरू हुई यह हिंसा अब लूटपाट और आगजनी में बदल चुकी है। 

बता दें कि साल 2009 से 2018 तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रहे जैकब जुमा के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार के मामले में जांच कर रहे एक न्यायिक आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं होने के बाद अदालत की अवमानना के मामले में जुमा इस समय एस्टकोर्ट करेक्शनल सेंटर में बंद हैं। पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को 15 महीने की जेल की सजा सुनाई गयी जिसके बाद उन्होंने बुधवार को पुलिस को अपनी गिरफ्तारी दी। हालांकि 79 वर्षीय नेता ने भ्रष्टाचार के आरोपों को ख़ारिज़ किया है। 

दक्षिण अफ्रीका में पूर्व राष्‍ट्रपति जैकब जुमा के समर्थन में भीषण दंगे हो रहे हैं और हिंसा भड़क उठी है। ये दंगाई जुमा को कोर्ट की अवमानना करने के आरोप में जेल भेजे जाने का विरोध कर रहे हैं। हालात को बेकाबू होता देख दक्षिण अफ्रीका की सेना ने जोहानिसबर्ग शहर समेत दो प्रांतों में बड़ी तादाद में सैनिकों को तैनात कर दिया है। यह दंगे ऐसे समय पर हो रहे हैं जब सुप्रीम कोर्ट ने जुमा के 15 महीने की जेल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है।

पुलिस ने बताया कि इस हिंसा में अब तक 72 लोगों की मौत हो गई है और 1200 से ज्‍यादा लोगों को अरेस्‍ट किया गया है। हर तरफ हिंसा के माहौल को देखते हुए गौटेंग और क्वाजुलू-नताल प्रांत में सेना को तैनात किया गया है ताकि दंगे को रोका जा सके। क्वाजुलू-नताल जुमा का गृह प्रांत है। जुमा की गिरफ्तारी के बाद देशभर में उनके समर्थकों ने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिये। उन्होंने टायर जलाकर और अन्य अवरोधक डालकर रास्तों को बाधित कर दिया। दंगाइयों की हिंसक भीड़ ने वाहनों को जलाया और दुकानों को लूट लिया।

एसएएनडीएफ ने एक बयान में कहा है कि उसने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद के लिए मिले अनुरोध के बाद तैनाती कर दी है। वहीं दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने देश के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की सजा के विरोध में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांतों में पिछले कुछ दिनों से चल रहे हिंसक विरोध-प्रदर्शनों की निंदा की है। रामाफोसा ने कहा, ‘राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं और सामान एवं सेवाओं की आवाजाही धीमी पड़ने से हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।”

जलते शॉपिंग मॉल, लुटती दुकानें और पुलिस के साथ झड़पते लोग। पिछले दो दिनों से दक्षिण अफ्रीका के कई शहरों में ऐसा मंजर था, जैसा पिछले कई सालों में नहीं हुआ था। पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई हिंसा बद से बद्तर होती जा रही है। 

लेकिन जो हिंसा हुई है, वह सिर्फ जुमा की गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ नहीं है।  रंगभेद की नीति खत्म होने के 27 साल बाद भी देश में जारी असमानता और गरीबी के कारण लोगों के अंदर पल रहा गुस्सा फूट रहा है। कोविड-19 के कारण लगाई गई पाबंदियों के बाद आर्थिक और सामाजिक मुश्किलें और बढ़ी हैं और गरीबी भी फैली है। 

जैकब जुमा पर चल रहे मुक़दमों को दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीति के बाद देश में कानून के राज की स्थिति को संभालने के मानक के तौर पर देखा जा रहा है। इसीलिए, पिछले दो हफ्ते से जारी हिंसा को 1994 में आई आजादी के बाद अल्पसंख्यकों की बढ़ी उम्मीदों के ना पूरे होने से जोड़कर देखा जा सकता है। कोविड-19 महामारी के चलते दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था इस वक्त संघर्ष कर रही है और अब भी देश में बहुत सी पाबंदियां लागू हैं। बेरोज़गारी के बढ़ने के कारण लोगों में गुस्सा और बेचैनी बढ़ रही है। 2021 की पहली तिमाही में बेरोज़गारी की दर 32.6 प्रतिशत के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।) 

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