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राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को 2 करोड़ किसानों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राज्य सभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता गुलाम नबी आज़ाद और लोकसभा में संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर उन्हें कृषि क़ानून के विरोध में दो करोड़ किसानों के हस्ताक्षर वाले पत्रों के गट्ठर सौंपे और कृषि क़ानून को रद्द करने की गुजारिश की। लगभग दो करोड़ किसानों के हस्ताक्षर वाले पत्रों के गट्ठर को दो मिनी ट्रकों में भरकर ले जाया गया था।

मोदी के खिलाफ़ खड़े होने पर मोहन भागवत भी आतंकवादी बताए जाएंगे

राष्ट्रपति को दो करोड़ किसानों के हस्ताक्षर वाले पत्र सौंपकर लौटने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि “अगर संघ प्रमुख भागवत किसी दिन मोदी के खिलाफ खड़े हो गए, तो उन्हें भी आतंकवादी बता दिया जाएगा।”

उन्होंने मीडिया से कहा कि “हम तीन लोग राष्ट्रपति के पास गए। हम करोड़ों किसानों के हस्ताक्षर लेकर गए। हम किसानों की आवाज़ राष्ट्रपति तक ले गए हैं। सर्दी का मौसम है और पूरा देश देख रहा है कि किसान दुख में है, दर्द में है और मर रहा है। पीएम को सुनना पड़ेगा। मैं एडवांस में बोल देता हूं। मैंने कोरोना पर बोला था कि नुकसान होने जा रहा है। आज फिर बोल रहा हूं कि किसान और मजदूर के सामने कोई ताक़त नहीं चलेगी। इससे बीजेपी आरएसएस नहीं, देश को नुकसान होने जा रहा है।”

राहुल गांधी ने कृषि क़ानून को किसान विरोधी बताते हुए आगे कहा, “यह किसान विरोधी कानून है। इससे किसान और मजूदरों को जबर्दस्त नुकसान होने वाला है। सरकार ने कहा था कि कानून किसान के फायदे के लिए है। लेकिन किसान इस कानून के खिलाफ खड़ा है। सरकार को यह नहीं सोचना चाहिए कि किसान और मजदूर घर चले जाएंगे। नहीं जाएंगे। जब तक कानून वापस नहीं लिया जाएगा। संसद का जॉइंट सेशन बुलाइए और कानून को वापस लीजिए। हम किसानों के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा “भारत ख़तरनाक रास्ते पर चल रहा है। हिरासत में लिया जाना, पीटना इस सरकार के लिए एक आदर्श है। भारत में लोकतंत्र नहीं है। यह कल्पना में है, वास्तविकता में नहीं।”

बता दें कि आज सुबह करीब 10.45 बजे विजय चौक से लेकर राष्ट्रपति भवन तक कांग्रेस नेता मार्च करने वाले थे। मार्च में राहुल गांधी के नेतृत्व में अन्य कांग्रेसी सांसद भी हिस्सा लेने के लिए निकले थे। लेकिन नए कृषि क़ानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में कांग्रेस के राष्ट्रपति भवन तक मार्च को दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ़ रोक दिया बल्कि प्रियंका गांधी समेत तमाम कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार भी कर लिया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दो करोड़ किसानों के हस्ताक्षर के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च का ऐलान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इज़ाज़त नहीं दी और कांग्रेस मुख्यालय के बाहर धारा 144 लगा दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इसके बाद करीब आधे घंटे तक कांग्रेस मुख्यालय के लॉन में बैठकर मार्च की रणनीति बनाई। जब प्रियंका गांधी जबरन सड़क पर उतर आईं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मार्च निकालने की कोशिश करने लगीं। इसके बाद पुलिस ने उन्हें और बाकी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस प्रियंका को मंदिर मार्ग थाने ले गई जहां से करीब आधे घंटे बाद प्रियंका गांधी को रिहा कर दिया गया। हालांकि इसके बाद दिल्ली पुलिस ने केवल तीन कांग्रेस नेताओं को ही राष्ट्रपति से मुलाकात की इज़ाज़त दी।

अगर सरकार उन्हें देशद्रोही कह रही है तो सरकार पापी है

गिरफ्तारी के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा- “हम लोकतंत्र में रह रहे हैं और ये चुने गए सांसद हैं। उन्हें राष्ट्रपति से मिलने का अधिकार है, उन्हें अनुमति मिलनी चाहिए। सरकार को क्या दिक्कत है? बॉर्डर पर खड़े लाखों किसानों की आवाज़ सरकार क्यों नहीं सुन रही है। किसानों के लिए जिस तरह के नामों का इस्तेमाल किया गया, वह पाप है।”

वहीं दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने ट्वीट करके कहा “राहुल गांधी से नरेंद्र मोदी सरकार इतनी डरती क्यों है? किसानों की आवाज सुनने में इनको इतनी घबराहट क्यों होती है?”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 24, 2020 2:02 pm

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