Sunday, November 27, 2022

रवीश को मिला मैगसेसे अवार्ड

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नई दिल्ली। पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखने वाले रवीश कुमार को एशिया के नोबल पुरस्कार मैगसेसे से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें 2019 के लिए दिया गया है। रवीश इस समय एनडीटीवी में मैनेजिंग एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। रवीश कुमार को ये सम्मान हिंदी टीवी पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए मिला है। बता दें कि रैमन मैगसेसे पुरस्कार एशिया के व्यक्तियों और संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमन मैगसेसे की याद में दिया जाता है।

पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है।” रैमन मैगसेसे अवार्ड फाउंडेशन ने इस संबंध में कहा, “रवीश कुमार का समाचार कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ आम लोगों की वास्तविक जीवन से जुड़ी समस्याओं से संबंधित है।” अवॉर्ड संस्था ने कहा, “यदि आप लोगों की आवाज बन गए हैं, तो आप एक पत्रकार हैं।”

सम्मान पत्र में रवीश कुमार को गंभीर, तीक्ष्ण बुद्धि और गहरी जानकारी रखने वाला एंकर बताया गया है। साथ ही उन्हें प्रोफेशनल, मूल्य आधारित, संतुलित और तत्थों पर आधारित रिपोर्टिंग करने वाला करार दिया गया है।

सम्मान पत्र में कहा गया है कि रवीश को पुरस्कार को 2019 के रमन मैगेसेसे पुरस्कार के चयन के लिए बोर्ड आफ ट्रस्टी उनकी अडिग प्रोफेशनल प्रतिबद्धता, उच्च मानकों वाली नैतिक पत्रकारिता, सत्य के लिए खड़े होने का उनका नैतिक साहस, ईमानदारी और स्वतंत्रता और इस बात की सैद्धांतिक समझ कि वह बेआवाजों की सम्मानीय आवाज बन रहे हैं, साहस के साथ सच बोलने के साथ ही सत्ता के सामने विनम्रता, जिसे पत्रकारिता अपने महान लक्ष्य लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के लिए पूरा करती है, को चिन्हित करता है।   

बता दें कि रवीश कुमार ने एनडीटीवी में चिट्ठी छांटने से काम शुरू किया था। बाद में रवीश की रिपोर्ट से उन्हें नई पहचान मिली और उस खास रिपोर्ट के जरिए वो आम लोगों की आवाज बने। पत्रकारिता के क्षेत्र में रवीश दिनों-दिन नए आयाम छूते गए।

रवीश कुमार के अलावा वर्ष 2019 रैमॉन मैगसेसे अवार्ड के चार अन्य विजेताओं में म्यांमार से को स्वे विन, थाईलैंड से अंगखाना नीलापजीत, फिलीपींस से रेमुंडो पुजांते कैयाब और दक्षिण कोरिया से किम जोंग हैं।

रवीश कुमार जो 1996 से एडीटीवी में हैं उन्हें कई बार सीधा-सपाट और सच बोलने के लिए धमकियां मिली हैं।

बिहार के मोतिहारी में पैदा हुए रवीश कुमार ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है।

(कुछ इनपुट एनडीटीवी से लिए गए हैं।)

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