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सिवान की ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा-जदयू गठबंधन में बगावत से बिगड़ सकती है जीत की गणित

पटना। लंबे समय से जेल में बंद राजद के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के साथ भाकपा माले के टकराव को लेकर राज्य की राजनीति में यह जिला हमेशा सुर्खियों में रहा है। लेकिन पहली बार ये धुर विरोधी चुनावी मैदान में एक साथ हैं। भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को रोकने के लिए दोनों दलों की यह एका दिख रही है। ऐसे में जिले की आठ सीटों में से पांच पर भाजपा गठबंधन को अपना कब्जा बरकरार रखना आसान नहीं होगा। जिले की अधिकांश सीटों पर भाजपा-जदयू के नेताओं के बगावती सुर से सत्ताधारी दलों का राजनीतिक समीकरण बिगड़ता दिख रहा है।

सिवान सदर सीट से चार बार भाजपा के विधायक रहे व्यास देव प्रसाद का पार्टी ने टिकट काटकर पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। ओमप्रकाश की उम्मीदवारी तय होते ही व्यास देव समर्थकों ने बैठक कर अपने नेता को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय लिया है। बगावत का यह सुर यहीं खत्म नहीं होता। कहा जा रहा है कि भाजपा नेता व जिले में आरएसएस का बड़े चेहरा माने जाने वाले देवेंद्र गुप्ता ने अपने समर्थकों के साथ बैठक कर चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है। उधर, लोकसभा चुनाव में ओम प्रकाश यादव के अपना टिकट कटने पर जताई गई नाराजगी का इस बार सांसद कविता सिंह के समर्थकों द्वारा बदला लेने की चर्चा भी जोरों पर है।

जिले की बड़हरिया सीट जदयू के लिए सबसे अधिक सुरक्षित मानी जाती रही है । यहां के विधायक श्याम बहादुर सिंह लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। इनकी जीत राजग गठबंधन में बगावत के चलते इस बार आसान नहीं होगी। भाजपा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे अनिल गिरी ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इसके अलावा कद्दावर नेता गजाधर सिंह व विवेक सिंह की दावेदारी होने से जदयू के विधायक के जीत की राह और कठिन हो जाएगी।

जीरादेई सीट से जदयू के निवर्तमान विधायक रमेश सिंह कुशवाहा का टिकट काटकर नेतृत्व ने इस बार मैरवा प्रखंड प्रमुख श्रीमती कमला सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इससे नाराज विधायक रमेश सिंह कुशवाहा का बागी होना तय माना जा रहा है। राजग के अंदर इस फूट का लाभ भाकपा माले के उम्मीदवार अमरजीत कुशवाहा को मिल सकता है। राजद व भाकपा माले के चुनावी गठबंधन के चलते बड़े सामाजिक आधार के वोट एक साथ जुड़ने पर माले के लिए यह सीट जीतना आसान हो सकता है।

पिछले विधानसभा चुनाव में रघुनाथपुर सीट पर राजद-जदयू गठबंधन के चलते आरजेडी के हरिशंकर यादव की जीत हुई थी। इस बार ये दोनों दल एक दूसरे से जुदा हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में यह सीट जदयू की झोली में चले जाने से पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश्वर चौहान को टिकट मिलने से भाजपा के एक खेमे में गहरी नाराजगी है।पूर्व एमएलसी व भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे मनोज सिंह के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। मनोज सिंह के समर्थकों का कहना है कि पिछले चुनाव में हमारे नेता दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार या सीट भाजपा को मिलनी चाहिए थी। ऐसे में राजग में फूट व सामाजिक समीकरण के लिहाज से राजद के लिए जिले की सबसे मजबूत सीट पर एक बार फिर जीत की उम्मीद को लेकर पार्टी कार्यकर्ता उत्साहित हैं।

जिले की एकमात्र सुरक्षित सीट दरौली से मौजूदा समय में भाकपा माले के सत्यदेव राम विधायक हैं। जहां से भाजपा के टिकट पर पिछली बार तत्कालीन विधायक रामायण मांझी उम्मीदवार रहे। इस बार भी गठबंधन में यह सीट भाजपा की झोली में है। जहां से उम्मीदवार की घोषणा होना अभी बाकी है।

दरौंदा सीट के लिए दो साल में दूसरी बार चुनाव हो रहा है। यहां हुए उपचुनाव में भाजपा नेता करणजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल किए थे। हालांकि चुनाव के बाद ही फिर एक बार वह भाजपा में शामिल हो गए। एक बार फिर भाजपा ने व्यास सिंह को उम्मीदवार बनाया है। उल्लेखनीय है कि सिवान सांसद कविता सिंह के पति अजय सिंह दरौंदा सीट से उप चुनाव लड़े थे। इस बार भी उम्मीदवारी के लिए एड़ी चोटी एक किए हुए थे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी होने के चलते इनके समर्थक टिकट मिलने की उम्मीद लगाए थे। लेकिन गठबंधन में यह सीट भाजपा के खाते में चले जाने से अजय समर्थकों के मंसूबों पर पानी फिर गया। हालांकि नेतृत्व के निर्णय के बावजूद अजय समर्थक चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं। अजय सिंह के नेतृत्व में समर्थकों ने जुलूस निकालकर ‘भाजपा से बैर नहीं, व्यास तेरी खैर नहीं ‘ जैसे नारे लगाकर चुनाव मैदान में बगावती तेवर अपनाने का अघोषित ऐलान कर दिया है।

महाराजगंज सीट पर भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में फूट साफ नजर आ रहा है। जदयू ने एक बार फिर विधायक देवनारायण साह को उम्मीदवार बनाया है। उनके उम्मीदवारी की घोषणा से नाराज भाजपा के पूर्व विधायक व आरएसएस के समर्पित कैडर माने जाने वाले डॉक्टर देव रंजन कुमार ने लोजपा से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। यह सीट महागठबंधन में कांग्रेस के कोटे में गई है। जिसके प्रत्याशी के नाम की घोषणा अभी बाकी है। फिलहाल देव रंजन की बगावत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए भारी पड़ सकती है।

गोरयाकोठी सीट से राजद के सत्यदेव सिंह विधायक हैं। भाजपा से देवेश कांत सिंह प्रमुख दावेदार हैं। फिलहाल दोनों दलों के प्रत्याशियों के नामों की घोषणा न होने से राजनीतिक परिदृश्य साफ नहीं है।

फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं के बगावती सुर ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है जिले की आठ सीटों में से पांच पर कब्जा बरकरार रखना इस बार आसान नहीं होगा।

(जितेंद्र उपाध्याय स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल पटना में रहते हैं।)

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This post was last modified on October 8, 2020 1:08 pm

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