Thursday, March 23, 2023

मेरे और वरुण के बीच खड़ी है आरएसएस की दीवार: राहुल गांधी

प्रदीप सिंह
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दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

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राहुल गांधी ने पहली बार अपने चचेरे भाई एवं भाजपा सांसद वरुण गांधी को लेकर सार्वजनिक रूप से मुंह खोला है। उन्होंने वरुण गांधी के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों पर एक तरह से विराम लगा दिया है। राहुल ने कहा कि, ‘मैं जरूर वरुण से प्यार से मिल सकता हूं… गले लग सकता हूं। मगर मैं उस विचारधारा ( संघ की विचारधारा) को कभी भी स्वीकार नहीं कर सकता हूं।’ वरुण गांधी के बहाने राहुल गांधी ने संघ की वैचारिकी पर आधारित देश की वर्तमान राजनीति पर भी तीखा हमला किया है और कांग्रेस की आगामी राजनीति का खुलासा कर दिया है।

मंगलवार यानि 17 जनवरी को राहुल गांधी ने पंजाब में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल पर कि क्या उनके चचेरे भाई एवं भाजपा सांसद वरुण गांधी भारत जोड़ो यात्रा और कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं? राहुल गांधी ने इस एक सवाल का जो जवाब दिया वह वरुण गांधी के साथ ही देश की राजनीति के सामने यक्ष प्रश्न बन गया है।

इस समय देश में वैचारिक लड़ाई चलने की बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वरुण गांधी चूंकि बीजेपी में हैं। शायद वे अगर यहां चलेंगे तो उनको दिक्कत हो जाएगी। राहुल ने कहा कि, ‘मेरी विचारधारा उनकी विचारधारा से नहीं मिलती है। मैं कभी आरएसएस के ऑफिस में नहीं जा सकता। उसके लिए आपको पहले मेरा गला काटना पड़ेगा।’

वरुण गांधी की राजनीति और व्यक्तिगत समझ पर सवालिया निशान लगाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि, ‘मेरा जो परिवार है उसकी एक अलग विचारधारा है। वरुण ने दूसरी विचारधारा को अपनाया। जिसे मैं कभी स्वीकार नहीं कर सकता हूं।’ राहुल ने कहा कि, ‘मैं जरूर वरुण से प्यार से मिल सकता हूं… गले लग सकता हूं। मगर मैं उस विचारधारा को कभी भी स्वीकार नहीं कर सकता हूं।’

राहुल गांधी ने इस दौरान कहा, ‘सालों पहले मैंने फिरोज (वरुण) से कहा कि… उसने मुझसे कहा कि आरएसएस देश में बहुत अच्छा काम कर रहा है। मैंने कहा, देखिए आप अपने परिवार की हिस्ट्री को थोड़ा पढ़िए और समझिए, क्योंकि जो आपने मुझसे बोला है, अगर आपने अपने परिवार की विचारधारा समझी होती तो आप मुझसे ये कभी नहीं बोल सकते।’

राहुल गांधी ने कहा, ‘लेकिन कोई नफरत जैसी बात नही है।’ राहुल ने कहा कि वरुण गांधी ने एक समय शायद आज भी उस विचारधारा को अपनाया और अपना बनाया तो मैं उस बात को स्वीकार नहीं कर सकता।

दरअसल, लंबे समय से वरुण गांधी भाजपा से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। समय-समय पर वह मोदी सरकार की नीतियों पर हमला भी करते रहते हैं। उनके कांग्रेस में जाने की अटकलें भी लगती रहती हैं। कुछ दिनों पहले वरुण गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह कह रहे हैं कि, ‘मैं न‌ कांग्रेस के खिलाफ हूं। न ही मैं पं. जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ हूं।’

इस वीडियो के आने के बाद एक बार फिर वरुण गांधी के कांग्रेस में जाने की चर्चा तेज हो गई। लेकिन अब राहुल गांधी ने वरुण गांधी के साथ ही देश के अन्य दलों और नेताओं के समक्ष यह सवाल उठा दिया है कि वह वैचारिक रूप से कहां खड़े हैं?

राहुल गांधी की नजर में मौजूदा दौर की लड़ाई केवल सत्ता की नहीं है, मौजूदा लड़ाई सत्ता परिवर्तन से कहीं ज्यादा वैचारिक है। अपने विरोधी को वैचारिक धरातल पर परास्त किए बिना, उसे राजनीतिक रूप से हराया नहीं जा सकता है। इस तरह राहुल गांधी किसी के पार्टी में शामिल होने, न होने से ज्यादा महत्व विचारधारा को दे रहे हैं।

राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि हमारी भारत जोड़ो यात्रा का मकसद देश में महंगाई बेरोजगारी को उखाड़ फेंकना है। देश के संस्थानों पर आज की तारीख में आरएसएस और बीजेपी का पूरी तरह से कंट्रोल है। केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। वहीं बीजेपी पर पूंजीपतियों के लिए काम करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश के एक फीसद अमीरों के पास देश का 40 फीसद धन है।

भारत जोड़ो यात्रा आज पठानकोट से हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करेगी। भारत जोड़ो यात्रा अब अपने अंतिम दौर में है। राहुल गांधी 31 जनवरी को जम्मू के श्रीनगर में यात्रा का समापन करेंगे। 7 सितंबर, 2022 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुए भारत जोड़ो यात्रा के उद्देश्य को लेकर चर्चा होती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों, मीडिया और बुद्धिजीवियों से लेकर राजनीतिक दलों में इस यात्रा के मकसद को लेकर चर्चा होती रही, सबसे अधिक सत्तारूढ़ भाजपा के नेता और प्रवक्ताओं ने भारत जोड़ो यात्रा को लेकर सवाल उठाया। भाजपा की चिंता का विषय यह था कि कहीं राहुल गांधी को इस यात्रा में इतना समर्थन न मिल जाए कि वह भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों की जनविरोधी नीतियों को जनता के बीच ले जाने में सफल हो जाएं।

केंद्र सरकार और भाजपा के नेता भारत जोड़ो यात्रा के उद्देश्य के साथ ही इसके नाम पर भी सवाल पर भी सवाल उठाया। लेकिन राहुल गांधी, यात्रा में शामिल भारत यात्री और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर मौन रहे। अब भारत जोड़ो यात्रा का उद्देश्य साफ जाहिर हो गया है। लंबे से समय से सत्ता और सुविधा की राजनीति में उलझे राजनीति दलों और राजनेताओं के समक्ष राहुल गांधी ने वैचारिक और नैतिक चुनौती पेश कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में यात्रा के उद्देश्य और कांग्रेस और अपने भविष्य की राजनीतिक मॉडल का संकेत भी दे दिया है।

(प्रदीप सिंह जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।)

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