Wednesday, December 8, 2021

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मोर्चे ने ‘आपके नाम किसानों का संदेश’ शीर्षक से पीएम को लिखा खुला पत्र, कहा- अब एमएसपी समेत बाकी मांगों को पूरी करने की बारी

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(एसकेएम ने आज बैठक के बाद पीएम मोदी को खुला पत्र लिखा है। जिसमें उसने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के पीएम के फैसले का स्वागत किया है। इसके साथ ही उसने एमएसपी समेत किसानों की दूसरी लंबित मांगों को पूरा करने की अपील की है। पेश है मोर्चे का पत्र-संपादक)

21 नवंबर 2021

श्री नरेंद्र मोदी,
प्रधानमंत्री,
भारत सरकार,
नई दिल्ली.

विषय: राष्ट्र के नाम आपका संदेश और आपके नाम किसानों का संदेश

प्रधानमंत्री जी,

देश के करोड़ों किसानों ने 19 नवंबर 2021 की सुबह राष्ट्र के नाम आपका संदेश सुना। हमने गौर किया कि 11 राउंड वार्ता के बाद आपने द्विपक्षीय समाधान की बजाय एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना, लेकिन हमें खुशी है कि आपने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आपकी सरकार इस वचन को जल्द से जल्द और पूरी तरह निभायेगी।

प्रधानमंत्री जी, आप भली-भांति जानते हैं कि तीन काले कानूनों को रद्द करना इस आंदोलन की एकमात्र मांग नहीं है। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के साथ वार्ता की शुरुआत से ही तीन और मांगे उठाई थी:

  1. खेती की संपूर्ण लागत पर आधारित (C2+50%) न्यूनतम समर्थन मूल्य को सभी कृषि उपज के ऊपर, सभी किसानों का कानूनी हक बना दिया जाय, ताकि देश के हर किसान को अपनी पूरी फसल पर कम से कम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी हो सके। (स्वयं आपकी अध्यक्षता में बनी समिति ने 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को यह सिफारिश दी थी और आपकी सरकार ने संसद में भी इसके बारे में घोषणा भी की थी)
  2. सरकार द्वारा प्रस्तावित “विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020/2021” का ड्राफ्ट वापस लिया जाए (वार्ता के दौरान सरकार ने वादा किया था कि इसे वापस लिया जाएगा, लेकिन फिर वादाखिलाफी करते हुए इसे संसद की कार्यसूची में शामिल किया गया था)
  3. “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021” में किसानों को सजा देने के प्रावधान हटाए जाए ( इस साल सरकार ने कुछ किसान विरोधी प्रावधान तो हटा दिए लेकिन सेक्शन 15 के माध्यम से फिर किसान को सजा की गुंजाइश बना दी गई है)

आपके संबोधन में इन बड़ी मांगों पर ठोस घोषणा ना होने से किसानों को निराशा हुई है। किसान ने उम्मीद लगाई थी की इस ऐतिहासिक आंदोलन से न सिर्फ तीन कानूनों की बला टलेगी, बल्कि उसे अपनी मेहनत के दाम की कानूनी गारंटी भी मिलेगी।

प्रधानमंत्री जी, पिछले एक वर्ष में इस ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान कुछ और मुद्दे भी उठे हैं जिनका तत्काल निपटारा करना अनिवार्य है:

  1. दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और अनेक राज्यों में हजारों किसानों को इस आंदोलन के दौरान (जून 2020 से अब तक) सैकड़ों मुकदमो में फंसाया गया हैI इन केसों को तत्काल वापस लिया जाए।
  2. लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधार और सेक्शन 120B के अभियुक्त अजय मिश्रा टेनी आज भी खुले घूम रहे हैं और आपके मंत्रिमंडल में मंत्री बने हुए हैं। वह आपके और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंच भी साझा कर रहे हैंI उन्हें बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए।
  3. इस आंदोलन के दौरान अब तक लगभग 700 किसान शहादत दे चुके हैं। उनके परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था हो। शहीद किसानों स्मृति में एक शहीद स्मारक बनाने के लिए सिंधू बॉर्डर पर जमीन दी जाय।

प्रधानमंत्री जी, आपने किसानों से अपील की है कि अब हम घर वापस चले जाए। हम आपको यकीन दिलाना चाहते हैं कि हमें सड़क पर बैठने का शौक नहीं है। हम भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द इन बाकी मुद्दों का निपटारा कर हम अपने घर, परिवार और खेती बाड़ी में वापस लौटे। अगर आप भी यही चाहते हैं तो सरकार उपरोक्त छह मुद्दों पर अविलंब संयुक्त किसान मोर्चा के साथ वार्ता शुरू करे। तब तक संयुक्त किसान मोर्चा अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक इस आंदोलन को जारी रखेगा।

आपका शुभेच्छु,
संयुक्त किसान मोर्चा

इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने आज सिंघु मोर्चा के किसान आंदोलन कार्यालय में बैठक की। 19 नवंबर को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा, किसानों के नाम पर लेकिन वास्तव में कृषि और खाद्य निगमों को मुनाफाखोरी में मदद करने के लिए बनाए गए, 3 काले कृषि कानूनों को निरस्त करने के उनकी सरकार के फैसले की हुई घोषणा के बाद यह पहली बैठक थी।

एसकेएम की बैठक में एक साल के अभूतपूर्व संघर्ष के बाद भारत के सभी किसानों और श्रमिकों को उनकी ऐतिहासिक जीत के लिए हार्दिक बधाई दी गई। एसकेएम ने योजनानुसार सभी घोषित कार्यक्रमों को जारी रखने का भी निर्णय लिया। अगली बैठक 27 नवंबर 2021 को होगी, जिसमें घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी।

एसकेएम ने सभी नागरिकों से अपील किया है कि वे कल 22 नवंबर को लखनऊ किसान महापंचायत; 24 नवंबर को सर छोटू राम की जयंती पर किसान मजदूर संघर्ष दिवस; 26 नवंबर को “दिल्ली बॉर्डर मोर्चा पे चलो” और दिल्ली से दूर के राज्यों में सभी राज्य स्तरीय किसान-मजदूरों का विरोध प्रदर्शन; 29 नवंबर को संसद चलो आदि कार्यक्रमों में भाग लें ।

किसान मोर्चे का कहना था कि करीब एक साल से शांतिपूर्ण और चट्टानी संकल्प के साथ हमने आस्था के साथ तपस्या की है । ये अन्नदाता अपनी तपस्या से ऐतिहासिक आंदोलन को पहली ऐतिहासिक जीत के शिखर पर ले गए हैं और इसे लगातार पूर्ण जीत की ओर ले जा रहे हैं जो वास्तव में लोकतंत्र की जीत होगी। यह जीत किसी के घमंड या अहंकार की नहीं, बल्कि लाखों उपेक्षित और हाशिए पर पड़े भारतीयों के जीवन और आजीविका की बात है।

मोर्चे का कहना था कि जहां नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार किसान आंदोलन के लगभग 700 बहादुर किसानों द्वारा किए गए शौर्यपूर्ण बलिदान को स्वीकार नहीं कर रही है, तेलंगाना सरकार अब शहीदों के परिजनों को सहायता प्रदान करने के लिए आगे बढ़ी है। प्रत्येक शहीद परिवार को 3 लाख रुपये के समर्थन की घोषणा करते हुए, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने यह भी मांग की कि भारत सरकार प्रत्येक किसान परिवार के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा दे और सभी मामलों को बिना शर्त वापस ले ले। एसकेएम शहीदों के परिवारों को दी जाने वाली इस अनुग्रह सहायता के लिए तेलंगाना सरकार को शहीदों की सूची प्रदान करेगा।

हरियाणा में, जब राज्य के कृषि मंत्री जेपी दलाल एक कोर्ट परिसर के उद्घाटन समारोह के लिए तोशाम पहुंचे, तो किसान बड़ी संख्या में काले झंडे लेकर विरोध में जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, और मंत्री के कार्यक्रम के बाद ही रिहा किया गया। यह सिर्फ पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में ही नहीं है कि भाजपा नेताओं को नियमित रूप से काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में चुनावी गति तेज होने के साथ ही पूर्वी यूपी में महाराजगंज के विधायक जय मंगल कनौजिया को कल स्थानीय नागरिकों के गुस्से का सामना करना पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों ने उनके समर्थकों का जोरदार विरोध किया जिससे विधायक और समर्थकों को गांव छोड़ दिया।

कल पंजाब स्थित महिला सामूहिक के राष्ट्रीय सम्मेलन में, “किसानों के संघर्ष और पृथ्वी लोकतंत्र” पर केंद्रित कार्यक्रम के साथ वक्ताओं ने चल रहे आंदोलन में महिला किसानों के ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला, और महिला शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

जारीकर्ता –

बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा (कक्का जी), युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव

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