गुंडे हरियाणा चुनाव प्रचार में गयी महिला सामाजिक कार्यकर्ता के कपड़े फाड़ते रहे और पुलिस देखती रही! सुनिये पूरी आपबीती

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नई दिल्ली। हरियाणा में बीजेपी की मनोहर लाल खट्टर सरकार किस तरह से चली है। उसका और उसकी पुलिस का महिलाओं के प्रति क्या रवैया रहा है। वह भिवानी में घटी एक घटना से बिल्कुल स्पष्ट तरीके से समझा जा सकता है। अभी जबकि आचार संहिता लागू है और सब कुछ चुनाव आयोग के हाथ में है बावजूद इसके हरियाणा सरकार, उसके मंत्री ही नहीं बल्कि उनके आदमियों का भी दबदबा कितना बना हुआ है। वह भी ये घटना बयान करती है।

दरअसल डॉ. सरिता सामाजिक कार्यकर्ता हैं और चुनाव प्रचार के सिलसिले में वह हरियाणा के भिवानी गयी थीं। रात होने पर उन्होंने किसी होटल में रुक जाने का फैसला किया। रोहतक प्रवेश द्वार पर स्थित गॉड (कुछ ऐसा ही नाम) नाम के एक होटल में जब उन्होंने कमरा बुक कराकर अंदर प्रवेश किया तो उन्हें न तो कमरा पसंद आया और न ही वहां का माहौल। लिहाजा उन्होंने तत्काल होटल छोड़ने का फैसला लिया। पहले तो होटल प्रबंधन से जुड़े लोग उनसे नाराज हुए और फिर उनके साथ तू-तू, मैं-मैं, की भाषा के साथ झगड़े पर उतर आए। इस खबर के साथ जुड़े वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि डॉ. सरिता कितनी परेशान हैं। वह रो-रो कर अपनी आपबीती बता रही हैं।

उन्होंने बताया कि अभी वह होटल से बाहर निकल ही रही थीं कि तभी होटल मालिक के दो गुर्गों ने उनके साथ हाथापाई के साथ ही उनके कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। वह किसी तरीके से उनके चंगुल से बच कर निकलीं और पुलिस को बुलाने जा रही थीं कि उन्हें उसकी पैट्रोलिंग गाड़ी सामने दिख गयी। उनका कहना था कि पुलिस पूरी वारदात को देख रही थी लेकिन वह मौन साधे रही। उसने कोई हस्तक्षेप करना भी जरूरी नहीं समझा। डॉ. सरिता ने बताया कि स्कूटी पर सवार युवक उन्हें परेशान करने के बाद पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी के पास खड़ा हो गया। बावजूद इसके पुलिस ने उसको नहीं पकड़ा।

डॉ. सरिता का कहना है कि दरअसल होटल का मालिक कोई बड़ा आदमी है। यह बात होटल में हरियाणा के ढेर सारे मौजूदा और पुराने मंत्रियों और नेताओं के साथ टंगी उसकी तस्वीर से स्पष्ट हो जाता है। उनकी मानें तो यही कारण था जिसके चलते हरियाणा पुलिस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर रही थी। तीन मिनट से ज्यादा के इस वीडियो में वह साफ-साफ कह रही हैं कि उनके जैसे जागरूक और पढ़ी-लिखी महिला के साथ अगर इस तरह की बदतमीजी हो सकती है तो बाकी महिलाओं के साथ क्या हो सकता है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

डॉ.सरिता के साथ घटी यह घटना पूरे हरियाणा के प्रशासन और पुलिस पर सवालिया निशान खड़ा कर देता है। इसके साथ ही इस समय चुनाव आयोग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरे मामले का संज्ञान ले और इस मामले में लापरवाही बरतने वाले सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करे।

दिलचस्प बात यह है कि पुलिस उनका एफआईआर भी दर्ज करने के लिए तैयार नहीं थी। वह वीडियो में बार-बार प्रशासन को गुहार लगाते देखी जा सकती हैं जिसमें वह होटल का सीसीटीवी फुटेज निकालने और एफआईआर दर्ज करने की बात कह रही हैं। लेकिन पुलिस है कि वह अपनी जगह से हिलने का नाम ही नहीं ले रही है।

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