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गांधी जयंती पर सोनिया ने बोला केंद्र पर हमला, कहा- अन्नदाता किसान को खून के आंसू रुला रही है मोदी सरकार

(कांग्रेस ने केंद्र द्वारा हाल में पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया है। कानून के स्तर पर उसने इन केंद्रीय कानूनों को पलटने के लिए कांग्रेस और गैर भाजपा शासित राज्यों के लिए ड्रॉफ्ट विधेयक तैयार कर लिया है तो सड़क की लड़ाई को उसने अगले चरण में ले जाने की भी तैयारी कर ली है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पंजाब से ‘किसान यात्रा’ निकालने वाले हैं। इसी कड़ी में आज गांधी जयंती के भी मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने दिए गए संदेश में किसानों की लड़ाई को उसके लक्ष्य तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। पेश है उनका पूरा वक्तव्य-संपादक)

मेरे प्यारे कांग्रेस के साथियों व किसान-मजदूर भाईयों और बहनों,

आज किसानों, मज़दूरों और मेहनतकशों के सबसे बड़े हमदर्द, महात्मा गांधी जी की जयंती है। गांधी जी कहते थे कि भारत की आत्मा भारत के गांव, खेत और खलिहान में बसती है। आज ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देने वाले हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती भी है।

लेकिन आज देश का किसान और खेत मजदूर कृषि विरोधी तीनों काले कानूनों के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन कर रहा है। अपना खून पसीना देकर देश के लिए अनाज उगाने वाले अन्नदाता किसान को मोदी सरकार खून के आंसू रुला रही है।

कोरोना महामारी के दौरान हम सबने सरकार से मांग की थी कि हर जरूरतमंद देशवासी को मुफ़्त में अनाज मिलना चाहिए। तो क्या हमारे किसान भाइयों के बग़ैर ये संभव था कि हम करोड़ों लोगों के लिए दो वक्त के भोजन का प्रबंध कर सकते थे!

आज देश के प्रधान मंत्री हमारे अन्नदाता किसानों पर घोर अन्याय कर रहे हैं। उनके साथ नाइंसाफी कर रहे हैं, जो किसानों के लिए कानून बनाए गए, उनके बारे में उनसे सलाह मशविरा तक नहीं किया गया। बात तक नहीं की गई, यही नहीं उनके हितों को नज़रअंदाज करके सिर्फ चंद दोस्तों से बात करके किसान विरोधी तीन काले कानून बना दिए गए।

जब संसद में भी क़ानून बनाते वक्त किसान की आवाज़ नहीं सुनी गई, तो वे अपनी बात शांतिपूर्वक रखने के लिए महात्मा गाँधी जी के रास्ते पर चलते हुए मजबूरी में सड़कों पर आए। लोकतंत्र विरोधी, जन विरोधी सरकार द्वारा उनकी बात सुनना तो दूर, उन पर लाठियाँ बरसाईं गयी।

भाइयों और बहनों, हमारे किसान और खेत मजदूर भाई-बहन आखिर चाहते क्या हैं, सिर्फ इन कानूनों में अपनी मेहनत की उपज का सही दाम चाहते हैं और ये उनका बुनियादी अधिकार है।

आज जब अनाज मंडियां खत्म कर दी जाएँगी, जमाखोरों को अनाज जमा करने की खुली छूट दी जाएगी और किसान भाइयों की ज़मीनें खेती के लिए पूँजीपतियों को सौंप दी जाएँगी, तो करोड़ों छोटे किसानों की रक्षा कौन करेगा?

किसानों के साथ ही खेत-मज़दूरों और बटाईदारों का भविष्य जुड़ा है। अनाज मंडियों में काम करने वाले छोटे दुकानदारों और मंडी मजदूरों का क्या होगा? उनके अधिकारों की रक्षा कौन करेगा ? क्या मोदी सरकार ने इस बारे सोचा है?

कांग्रेस पार्टी ने हमेशा हर क़ानून जन सहमति से ही बनाया है। कानून बनाने से पहले लोगों के हितों को सबसे ऊपर रखा है, लोकतंत्र के मायने भी यही हैं कि देश के हर निर्णय में देशवासियों की सहमति हो। लेकिन क्या मोदी सरकार इसे मानती है?

शायद मोदी सरकार को याद नहीं है की वो किसानों के हक के ‘भूमि के उचित मुआवजा कानून’ को आर्डिनेंस के माध्यम से भी बदल नहीं पाई थी। तीन काले कानूनों के खिलाफ भी कांग्रेस पार्टी संघर्ष करती रहेगी। आज हमारे कार्यकर्ता हर विधानसभा क्षेत्र में किसान और मजदूर के पक्ष में आंदोलन कर रहे हैं। मैं दावे के साथ कहना चाहती हूँ कि किसान और कांग्रेस का यह आंदोलन सफल होगा और किसान भाईयों की जीत होगी।

This post was last modified on October 4, 2020 12:06 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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