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सोनिया ने दिया कोरोना पर कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों को निर्देश, कहा- टेस्टिंग, खोज और टीकाकरण होना चाहिए मूलमंत्र

(कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है और उन्हें जरूरी निर्देश दिए हैं। जिसमें उन्होंने टेस्टिंग के साथ ही टीकाकरण अभियान को तेज करने की बात कही है। पेश है उनके द्वारा दिए गए निर्देश-संपादक)

कोविड-19 से मुकाबला करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा के लिए आयोजित कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कांग्रेस गठबंधन की प्रदेश सरकारों में कांग्रेस के मंत्रियों की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा दी गई टिप्पणियाँ-

सभी मुख्यमंत्रीगण, राहुल जी और मेरे सहयोगियों का स्वागत है।

कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ रहा है और ऐसे में मुख्य विपक्षी दल के रुप में हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम इससे संबंधित मुद्दों को उठाएं और सरकार को प्रचार के हथकंडों से हटकर जनहित में काम करने के लिए मजबूर करें, इसलिए इस विषय में पारदर्शिता की जरूरत है। सरकारों को राज्यों में संक्रमित लोगों और इसके कारण होने वाली मौतों के वास्तविक आंकड़े पेश करने चाहिए; फिर चाहे वे कांग्रेस शासित प्रदेश हों अथवा अन्य प्रदेश।

सबसे पहले और सर्वाधिक रुप से हमें भारत में टीकाकरण अभियान पर ध्यान केन्द्रित करना होगा; उसके बाद ही टीकों के निर्यात अथवा इसे उपहार स्वरुप अन्य देशों को भेजने पर विचार करना चाहिए। हमें सभी कानूनों और कोविड संबंधी नियमों को, बिना किसी अपवाद के, अनुपालन करते हुए एक जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार पर जोर देना चाहिए।

संघीय व्यवस्था का सम्मान करते हुए राज्यों से सहयोग और बदले में हमारे लिए रचनात्मक होना और महामारी से लड़ने के प्रयासों में सरकार से सहयोग करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हम सब इस लड़ाई में एकजुट हैं।

मोदी सरकार ने महामारी के दौरान स्थिति का कुप्रबंधन किया- टीके का निर्यात करके भारत में टीके की कमी होने दी। चुनावों और धार्मिक आयोजनों सबंधी सामूहिक समारोहों में बड़े पैमाने पर लोगों के जमा होने से कोविड संक्रमण में तेजी आई है, जिसके लिए हम सभी कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। हमें इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने और राष्ट्रहित को स्वहित से ऊपर रखने की आवश्यकता है।

हमारे राज्यों में हमें यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि महामारी नियंत्रण से बाहर न हो जाए और बड़े पैमाने पर परीक्षण (Test) सुनिश्चित हों और अस्थाई सुविधाओं सहित पर्याप्त सुविधाएँ संस्थापित की जाएं। प्रतिबंधों के सख्त और कठोर होने के कारण आर्थिक गतिविधियों में आने वाले अवरोध से प्रभावित होने वाले लोगों की सहायता के लिए भी हर सम्भव प्रयास करने होंगे।

क्या टीका पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है?

क्या केन्द्र सरकार का रवैया सहयोगात्मक रहा है?

महामारी बढ़ने पर हमारे राज्य ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कर रहे हैं?

लॉकडाउन के बारे में आपका क्या विचार है?

आर्थिक दुष्परिणाम के बारे में आपकी क्या राय है?

आपके राज्य में स्थिति कितनी खराब है?

क्या चुनावी रैलियों सहित सार्वजनिक समारोहों को रद्द नहीं किया जाना चाहिए?

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों की मदद करने और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न पैकेजों की घोषणा की गई थी। इन पैकेजों का क्या प्रभाव पड़ा है और चल रहे संकट से निपटने के लिए सरकार को और क्या कदम उठाने  चाहिए? क्या आपको आर्थिक सुधार की दर उस स्तर पर दिख रही है, जैसा की आधिकारिक तौर पर दावा किया जा रहा है?

कोविड पर हमारी चर्चा के संदर्भ में मैं किसान आंदोलन के संबंध में नवीनतम स्थिति से भी अवगत होना चाहूंगी, जो लगभग पाँच महीनों से चल रहा है। कांग्रेस शासित राज्यों ने अपने कानून तो पारित किए हैं लेकिन इन्हें राष्ट्रपति की सहमति नहीं मिली है। हमें इस दिशा में और क्या करना चाहिए, हालांकि इस समस्या के समाधान की कुंजी तो केंद्र सरकार के पास है, जिसने यह समस्या मूल रुप से पैदा की है।

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This post was last modified on April 10, 2021 5:42 pm

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