केंद्र पर जमकर बरसा सुप्रीम कोर्ट, कहा- कोविड टीकों का पूरा ब्यौरा दो

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उच्चतम न्यायालय  ने केंद्र सरकार से कोवैक्सिन, कोविशील्ड और स्पुतनिक वी सहित अब तक के सभी कोविड-19 टीकों के सरकार के खरीद इतिहास पर पूरा डेटा प्रस्तुत करने को कहा है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एलएन राव और जस्टिस एसआर भट्ट की पीठ ने कोरोना महामारी के दौरान दवा, ऑक्सीजन और वैक्सिनेशन के मामले में बुधवार को केंद्र से अहम सवाल पूछे हैं। पीठ ने कहा कि वैक्सिनेशन के लिए आपने 35 हजार करोड़ का बजट रखा है, अब तक इसे कहां खर्च किया। पीठ ने केंद्र से वैक्सीन का हिसाब भी मांगा और ये भी पूछा कि ब्लैक फंगस इन्फेक्शन की दवा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। 31 मई को पारित आदेश को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 2 जून को अपलोड किया गया है ।

पीठ ने कोरोना टीकाकरण पर केंद्र सरकार की नीति को मनमाना बताया है। पीठ ने कहा है कि केंद्र ने 45 से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त टीका दिया। लेकिन 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों के लिए राज्य सरकार और निजी अस्पताल को खरीद के लिए कहा। यह नीति तर्क की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। कोर्ट ने केंद्र से वैक्सिनेशन नीति पर स्पष्टता देने के लिए कहा है। साथ ही राज्यों से भी पूछा है कि क्या वह नागरिकों को मुफ्त टीका लगवा रहे हैं?

पीठ ने केंद्र सरकार को यह बताने को कहा है कि वैक्सिनेशन का फंड कैसे खर्च किया? वैक्सिनेशन सबसे जरूरी चीज है। केंद्र सरकार के सामने ये अकेली सबसे बड़ा काम है। केंद्र ने इस साल वैक्सिनेशन के लिए 35 हजार करोड़ का बजट रखा है। केंद्र यह स्पष्ट करे कि अब तक ये फंड किस तरह से खर्च किया गया है। यह भी बताए कि 18-44 आयुवालों के मुफ्त टीकाकरण के लिए इसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।

पीठ ने पूछा है कि पहले, दूसरे और तीसरे चरण में कितने लोग वैक्सीन लगवाने के लिए एलिजबल थे और इनमें से अब तक कितने प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इनमें सिंगल डोज और डबल डोज दोनों शामिल कीजिए। इनमें ग्रामीण इलाकों और शहरी इलाकों में कितनी आबादी को वैक्सीन लगी, इसका आंकड़ा भी दीजिए।

पीठ ने  वैक्सीन का हिसाब-किताब मांगते हुए पूछा है कि कोवीशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक-V की अब तक कितनी वैक्सीन खरीदी गई है। वैक्सीन के ऑर्डर की डेट बताइए, कितनी मात्रा में वैक्सीन का ऑर्डर किया है और कब तक इसकी सप्लाई होगी, ये भी बताइए।

पीठ ने केंद्र के इस दावे पर कि इस साल के अंत तक देश की सारी वैक्सिनेशन योग्य आबादी को टीका लग जाएगा,केंद्र सरकार से पूछा है कि सरकार कब और किस तरह पहले, दूसरे और तीसरे चरण में बची हुई जनता को वैक्सिनेट करना चाहती है। पीठ ने कहा है कि कोविड वैक्सिनेशन पॉलिसी पर केंद्र की सोच को दर्शाने वाले सभी जरूरी दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे जाएं।

पीठ ने कहा है कि केंद्र ने कहा था कि राज्य सरकारें अपनी आबादी को मुफ्त टीका लगवा सकती हैं। ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो जाता है कि राज्य सरकारें इस संबंध में कोर्ट के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करें कि वो ऐसा करने जा रही हैं या नहीं। अगर राज्य अपनी जनता के फ्री वैक्सिनेशन के लिए राजी होते हैं तो ये मूल्यों का मामला बन जाता है। ऐसे में राज्यों के जवाब में उनकी इस पॉलिसी को बताया जाना चाहिए ताकि उनके राज्य की जनता को ये भरोसा हो सके कि वैक्सिनेशन सेंटर पर उन्हें फ्री वैक्सिनेशन का अधिकार मिलेगा। राज्य हमें दो हफ्ते में इस बारे में अपनी स्थिति बताएं और अपनी-अपनी पॉलिसी रखें।

पीठ ने 18-44 आयुवर्ग के वैक्सिनेशन पर तल्ख टिप्पणियां की हैं। पीठ ने कहा है कि वैक्सिनेशन के शुरुआती दो फेज में केंद्र ने सभी को मुफ्त टीका उपलब्ध कराया। जब 18 से 44 साल के एज ग्रुप की बारी आई तो केंद्र ने वैक्सिनेशन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों पर डाल दी। उनसे ही इस एज ग्रुप के टीकाकरण के लिए भुगतान करने को कहा गया। केंद्र का यह आदेश पहली नजर में ही मनमाना और तर्कहीन नजर आता है। पीठ ने उन रिपोर्ट्स का हवाला भी दिया, जिसमें यह बताया गया था कि 18 से 44 साल के लोग न केवल कोरोना संक्रमित हुए, बल्कि उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भी रहना पड़ा। कई मामलों में इस एज ग्रुप के लोगों की मौत भी हो गई।

पीठ ने कहा है कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और प्राइवेट हॉस्पिटल्स को 50% वैक्सीन पहले से तय कीमतों पर मिलती है। केंद्र तर्क देता है कि ज्यादा प्राइवेट मैन्युफैक्चर्स को मैदान में उतारने के लिए प्राइसिंग पॉलिसी को लागू किया गया है। जब पहले से तय कीमतों पर मोलभाव करने के लिए केवल दो मैन्युफैक्चरर्स हैं तो इस तर्क को कितना टिकाऊ माना जाए। दूसरी तरफ केंद्र ये कह रहा है कि उसे वैक्सीन सस्ती कीमतों पर इसलिए मिल रही है, क्योंकि वो ज्यादा मात्रा में ऑर्डर कर रहा है। इस पर तो सवाल उठता है कि फिर वो हर महीने 100 फीसद डोजेज क्यों नहीं खरीद लेता है।

इसके अलावा पीठ ने म्यूकोरमाइकोसिस के इलाज पर भी जवाब मांगा है। केंद्र से कहा है कि वह इस बारे में लिए गए कदम की जानकारी दे। 32 पन्ने के विस्तृत आदेश में पीठ ने सरकार की वैक्सिनेशन नीति पर कई सवाल उठाए हैं। यह भी कहा है कि केंद्र इस नीति को तय करने से जुड़े सभी दस्तावेज और फ़ाइल नोटिंग भी कोर्ट को सौंपे।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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