Sat. Apr 4th, 2020

शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया मध्यस्थ, अगली सुनवाई सोमवार को

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शाहीन बाग में धरनारत महिलाएं।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले में कहा है कि प्रदर्शन करना लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी को ऐसा करने से नहीं रोका जा सकता है। लेकिन यात्रियों की असुविधा का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा है कि आंदोलन को किसी दूसरी जगह पर शिफ्ट करने पर विचार करना चाहिए। मामले में कोर्ट ने एडवोकेट संजय हेगड़े को प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के लिए मध्यस्थ के तौर पर नियुक्त किया है। इस काम में वकील सुधा रामचंद्रन उनकी मदद करेंगी। इसके अलावा याचिका में प्रदर्शनकारियों के पक्ष की भूमिका निभा रहे पूर्वी सीआईसी कमिश्नर वजाहत हबीबुल्लाह इसमें उनकी मदद करेंगे। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एसके कौल ने कहा कि “ हम यह नहीं कह रहे हैं कि लोगों को अपने मामले उठाने का अधिकार नहीं है। सवाल यह है कि विरोध कहां होना चाहिए? क्योंकि आज अगर इस कानून के खिलाफ हो रहा है तो कल किसी दूसरे कानून के खिलाफ भी इसी तरह से हो सकता है।”

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अपनी पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि विरोध-प्रदर्शन उसके लिए किसी निश्चित जगह पर होना चाहिए। प्रदर्शनकारी किसी सार्वजनिक सड़क को बाधित नहीं कर सकते हैं और न ही दूसरों को असुविधा पहुंचा सकते हैं।

जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि “आप सार्वजनिक सड़क को बाधित नहीं कर सकते हैं। इस तरह के किसी इलाके में अनिश्चितकाल के लिए विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकता है। अगर आप विरोध करना चाहते हैं तो उसके लिए कोई चिन्हित इलाका होना चाहिए।”

“आप लोगों के लिए असुविधा नहीं खड़ी कर सकते हैं”।

जस्टिस कौल ने कहा कि संसद से एक कानून पारित हुआ है और उसे सु्प्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है। यह बिल्कुल हो सकता है कि कुछ लोग उसका विरोध कर रहे हों। प्रदर्शन को कई दिन हो गए हैं…..एक कोई खास इलाका होना चाहिए जहां आप प्रदर्शन कर सकें। वरना लोग कहीं भी जाएंगे और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर देंगे। आगे उन्होंने कहा कि प्रदर्शन लोगों के हितों की कीमतों पर नहीं हो सकता है।

कोर्ट में यह याचिका एडवोकेट अमित साहनी और दिल्ली बीजेपी के नेता नंद किशोर गर्ग ने दायर की है। इन सभी ने ट्रैफिक की परेशानी को ही प्रमुख मुद्दा बनाया है।

इस पर गर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट शशांक देव सुधि ने कोर्ट से अंतरिम आदेश जारी करने की गुजारिश की जिसे कोर्ट ने जारी करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि “अगर आपने अब तक 50 दिनों तक इंतजार किया है तो कुछ और दिनों तक भी इंतजार कर सकते हैं।”

इसके पहले साहनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी लेकिन हाईकोर्ट ने मामले में कोई आदेश देने की जगह उसे दिल्ली पुलिस के ऊपर छोड़ दिया था।

गौरतलब है कि सैकड़ों की तादाद में महिलाएं और बच्चे शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बीच कल वाराणसी में पीएम मोदी ने यह कह कर कि नागरिकता कानून देश के हित में है लिहाजा उसे वापस नहीं लिया जाएगा एक बार फिर लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।

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