सुप्रीम कोर्ट ने दी अर्णब को गिरफ्तारी से तीन हफ़्ते की मोहलत

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दिल्ली/ रायपुर। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी पर तीन हफ़्ते के लिए रोक लगा दी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में एफआईआर दर्ज होने के बाद अर्णब ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। आपको बता दें कि अकेले छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में 101 एफआईआर दर्ज कराए गए हैं। और इसी तरह से देश के अलग-अलग हिस्सों में एफआईआर दर्ज हुआ है। इसके साथ ही अर्णब पर धार्मिक, साम्प्रदायिक भावनाएं भड़काने की इन्हीं शिकायतों के आधार पर कांग्रेस नेताओं ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की संयुक्त बेंच ने मामले की वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिये सुनवाई की। याचिका के ज़रिये अर्णब के वकील प्रज्ञा बघेल गोस्वामी ने कोर्ट से अपने मुवक्किल के ख़िलाफ़ किसी तरह की जबरन कार्यवाही पर रोक लगाने की अपील की थी।

अर्णब के पक्ष से जिरह करते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी शिकायतें दर्ज की गयी हैं। और ये सभी एफआईआर प्रेस को घेरने की कोशिश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि एक तरह के काम के लिए इतने सारे एफआईआर एक साथ नहीं किए जा सकते हैं।

पालघर मसले पर टेलीविजन बहस का हवाला देते हुए रोहतगी ने कहा कि जब एक राजनीतिक बहस होगी तो वहाँ इस तरह की गरमा गरमी होना स्वाभाविक है। लिहाज़ा उकसावे वाले सवाल भी होंगे। अगर साधु मारे गए हैं और इसको लेकर हिंदू समुदाय में विक्षोभ है तब आप कोई सवाल क्यों नहीं खड़े कर रहे हैं?

इसके साथ ही रोहतगी ने अर्णब और उनकी पत्नी पर किए गए “जानलेवा हमले’ का भी मामला उठाया।  

हालाँकि प्रतिपक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने टेलीविजन बहस के दौरान अर्णब द्वारा कही गयी उन कुछ टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि “आप हिंदू समुदाय को अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ खड़ा कर सांप्रदायिक हिंसा को भड़काना चाहते हैं।” उन्होंने इस बात को बोलने की स्वतंत्रता के दायरे में रखने पर अचरज ज़ाहिर किया।

हालाँकि इसके पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को नोटिस जारी कर दिया था। और उन्हें 5 मई को प्रातः 11:00 बजे थाना सिविल लाइन में उपस्थित होने का आदेश दिया था। पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को यह नोटिस राजधानी के सिविल लाइन थाना में उनके खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों को लेकर जारी किया है। अर्णब गोस्वामी को भेजे गए नोटिस में पुलिस ने उन्हें राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संबंध में उनके चैनल में दिखाई खबर से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी और सुसंगत दस्तावेज साथ लाने के लिए कहा है। 

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने बताया कि अर्णब द्वारा सांप्रदायिकता और नफरत फैलाने की इस कोशिश के खिलाफ पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी गहरी नाराजगी है।

बुधवार को राजधानी रायपुर समेत सभी पांचों संभागों में अर्णब की गिरफ्तारी की मांग को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। त्रिवेदी ने बताया कि राजधानी रायपुर, रायगढ़ व राजनांदगांव में में दो-दो, गरियाबंद और धमतरी में 6-6, दुर्ग में 12, महासमुंद में 7, बलौदाबाजार-भाटापारा में 4, बालोद में 5, जांजगीर-चांपा में 8, जशपुर में 7, कांकेर में 6 और सुकमा में 5 एफआईआर दर्ज कराई गई है। त्रिवेदी ने बताया कि सभी थानों में अर्णब के खिलाफ धारा 153 ए, 295 ए और 505 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

इसके साथ ही अर्णब गोस्वामी के खिलाफ राजस्थान, मध्य-प्रदेश, जम्मू एंड कश्मीर और तेलंगाना में भी एफआईआर दर्ज करायी गयी है।

एफआईआर में अर्णब गोस्वामी के अपने शो में कही गयी बातों का ज़िक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि “सोनिया गांधी चुप क्यों हैं, बहुत से मीडिया भी चुप हैं, भारत में 80 फ़ीसदी हिंदू हैं। ऐसे में हत्या के समय इटली वाली सोनिया चुप है। क्या अगर मौलवी या पादरी की हत्या होती तो सोनिया चुप रहती? अभी देश में हंगामा कर देती। सोनिया गांधी उर्फ़ अल्बो मानिया चुप है। क्या ऐसे में हिंदुओं को चुप रहना चाहिए? तुम इटली वाली सोनिया गांधी इटली में रिपोर्ट भेजेगी कि देखो मैंने महाराष्ट्र में सरकार बनाकर हिंदू संतों की हत्या करवाई।

सोनिया गांधी पर टीवी कार्यक्रम के दौरान दिए गए अर्णब गोस्वामी के इस बयान की कई नेताओं ने आलोचना की।

(जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रायपुर से रिपोर्ट।)

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