Sunday, May 29, 2022

धर्म संसद में चव्हाणके के हेट स्पीच को क्लीनचिट देने पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस की फजीहत

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उच्चतम न्यायालय में दिल्ली पुलिस की फजीहत जारी है। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को दिल्ली धर्म संसद से संबंधित कथित अभद्र भाषा मामले में एक नया हलफनामा दायर करने पर सहमति व्यक्त की, जब सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से सवाल किया कि क्या किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इस हलफनामे को दाखिल करने से पहले अन्य पहलुओं की बारीकियों को समझा है और अपना दिमाग लगाया था। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने पूछा कि क्या हलफनामा दाखिल करने वाले संबंधित अधिकारी ने इस पर कोई विचार किया है या केवल जांच रिपोर्ट को फिर से पेश किया है। इसके एक दिन पहले जस्टिस नागेश्वर राव की पीठ के समक्ष जहांगीरपुरी में कोर्ट के आदेश के बाद भी ध्वस्तीकरण जारी रखने पर दिल्ली पुलिस की फजीहत हुई थी।

पीठ ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि हम यह जानना चाहते हैं कि वरिष्ठ अधिकारी इस हलफनामे को दाखिल करने से पहले अन्य पहलुओं की बारीकियों को समझ गए हैं। क्या उन्होंने केवल जांच रिपोर्ट को दोबारा पेश किया है या अपना दिमाग लगाया है? क्या आप इस पर फिर से विचार करना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने जवाब दिया कि हमें फिर से देखना होगा और एक नया हलफनामा दाखिल करना होगा। “ऐसा करो,” पीठ ने कहा और मामले को 9 मई को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट किया। पीठ ने कहा कि नया हलफनामा 4 मई तक दाखिल करना है।

पीठ ने दिल्ली पुलिस की ओर से दायर उस हलफनामे पर असंतोष व्यक्त किया, जिसमें कहा गया था कि घटना में चव्हाणके के भाषण के खिलाफ कई व्यक्तियों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के आधार पर, उसने भाषणों के वीडियो क्लिप की गहन जांच” की और पाया कि किसी विशेष समुदाय के खिलाफ किसी शब्द का उपयोग नहीं किया गया था। दिल्ली पुलिस ने हरिद्वार धर्म संसद और हिंदू युवा वाहिनी कार्यक्रम में वक्ताओं के खिलाफ आपराधिक कानून कार्रवाई की मांग करने वाली एक जनहित याचिका के जवाब में दायर अपने जवाबी हलफनामे में कहा था कि वीडियो और अन्य सामग्री की गहन जांच में पाया गया कि किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई हेट स्पीच नहीं दी गई थी। इसलिए, कथित वीडियो क्लिप की जांच और मूल्यांकन के बाद, यह निष्कर्ष निकला कि कथित भाषण में किसी विशेष समुदाय के खिलाफ कोई हेट स्पीच नहीं थी।

इसी महीने 14 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि वीडियो की सामग्री की गहन जांच और मूल्यांकन के बाद, पुलिस को शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार वीडियो में कोई सामग्री नहीं मिली। दिल्ली की घटना के वीडियो क्लिप में, किसी विशेष समुदाय के खिलाफ कोई बयान नहीं है। इसलिए, जांच के बाद और कथित वीडियो क्लिप के मूल्यांकन के बाद, यह निष्कर्ष निकाला गया कि कथित हेट स्पीच में किसी विशेष समुदाय के खिलाफ किसी भी तरह के घृणास्पद शब्दों का खुलासा नहीं किया गया था। इसलिए, पुलिस ने कहा कि उसने शिकायतों को बंद कर दिया है, क्योंकि यह निष्कर्ष निकाला गया है कि पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता के लिए कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनाया गया था।

दक्षिण पूर्वी दिल्ली की पुलिस उपायुक्त, ईशा पांडे आईपीएस द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया था कि कोई भी शब्द जो घटनाओं के दौरान किसी भी तरह से बोले गए थे, जो भी भारतीय मुसलमानों को इलाका हड़पने वाले और भूमि, आजीविका और हिंदू महिलाओं के शिकारियों के रूप में वर्णित करते हैं और कुछ भी ऐसा नहीं कहा गया जो किसी भी धर्म के बीच वैमनस्य का माहौल पैदा कर सके। ऐसे शब्दों का कोई उपयोग नहीं है जिनका अर्थ मुसलमानों के नरसंहार के खुले आह्वान के रूप में या इस तरह व्याख्या की जा सकती है। यह भी कहा गया था कि युवा वाहिनी में एकत्र हुए व्यक्ति अपने समुदाय की नैतिकता को बचाने के उद्देश्य से जुटे थे।

पिछले साल दिसंबर में दिल्ली धर्म संसद के दौरान कोई हेट स्पीच नहीं दी गई थी। धर्म संसद में कथित तौर पर हेट स्पीच मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी शुक्रवार को दिल्ली पुलिस को बेहतर हलफनामा दायर करने का आदेश दिया। दरअसल दिल्ली में 19 दिसंबर को हुए हिंदू युवा वाहिनी द्वारा आयोजित धर्म संसद कार्यक्रम पर पुलिस द्वारा दाखिल जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने सफाई मांगी है। पुलिस ने हाल ही में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि वहां कोई नफरत भरी बात नहीं कही गई थी। हिंदू समुदाय के हित की बात हुई थी। जिस पर उच्चतम न्यायालय ने हैरानी जताते हुए पूछा कि यह सब इंस्पेक्टर रैंक के जांच अधिकारी का स्टैंड है या डीसीपी का।

हलफनामे में कहा गया था कि दो व्यक्तियों, एसक्यूआर इलियास और फैसल अहमद ने कथित हेट स्पीच की शिकायत दर्ज कराई थी। इन दोनों ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि पिछले साल दिसंबर में गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास बनारसीदास चांदीवाला सभागार में हिंदू युवा वाहिनी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हेट स्पीच के जरिए लोगों की भावनाओं को भड़काया गया था। इससे इलाके में दहशत फैल गई। इस शिकायत के बाद जब पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू की। पुलिस की ओर से धर्म संसद के वीडियो व अन्य सामग्रियों की गहन जांच में पाया गया कि किसी विशेष समुदाय के खिलाफ हेट स्पीच नहीं दी गई थी। इसलिए पुलिस ने सभी शिकायतों की जांच पूरी की और इन्हें निराधार पाया गया। इस वजह से और आगे की कार्रवाई को रोक दिया गया।

पीठ पत्रकार कुरबान अली और वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश (पटना हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश) द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें धर्म संसद में कथित मुस्लिम विरोधी भड़काऊ भाषणों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी। दिसंबर 2021 में क्रमशः हरिद्वार और दिल्ली में हिंदू युवा वाहिनी की बैठक हुई।

शुरुआत में, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि दिल्ली पुलिस ने समुदाय की नैतिकता को बचाने के उपाय के रूप में हत्या के आह्वान को सही ठहराने की कोशिश की है। सिब्बल ने कहा कि वे कहते हैं कि वे मारने के लिए तैयार हैं। पुलिस का कहना है कि यह समुदाय की नैतिकता को बचाने के लिए है। आपको संवैधानिक रूप से तय करना होगा कि नैतिकता क्या है। सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर जवाब में भाषण की प्रतिलिपि दी गई है और पीठ से इसे पढ़ने का अनुरोध किया गया है।

जस्टिस खानविलकर ने पूछा कि क्या किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है? क्या हलफनामे में ऐसा रुख अपनाया जा सकता है। क्या आप इस पर दोबारा गौर करना चाहते हैं? दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि मामले की फिर से जांच की जाएगी। एएसजी ने कहा कि हम इस पर फिर से विचार करेंगे और एक नया हलफनामा दाखिल करेंगे।

पीठ ने आज उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जुड़े मामलों पर भी विचार किया। पिछले हफ्ते, कोर्ट ने हरिद्वार भाषण मामलों की जांच पर उत्तराखंड सरकार से स्टैटस रिपोर्ट मांगी थी। उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि मामलों की जांच पूरी कर ली गई है और चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। उत्तराखंड के वकील ने याचिकाकर्ताओं के अधिकार क्षेत्र पर भी आपत्ति जताई।

12 जनवरी को कोर्ट ने हरिद्वार और दिल्ली में हुए धर्म संसद में दिए गए भड़काऊ भाषणों के मामले पर नोटिस जारी किया था। मामले में उच्चतम न्यायालय के नोटिस के बाद उत्तराखंड और दिल्ली पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए यति नरसिंहानंद समेत कई लोगों की गिरफ्तारी की थी।

उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार में हुए कार्यक्रम के बारे में कोर्ट को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। सभी आरोपियों के ऊपर कानूनसम्मत कार्रवाई की गई है। उत्तराखंड के वकील ने याचिकाकर्ता का मामले से सीधा संबंध न होने की बात कही, लेकिन पीठ ने इसे सुनने से मना कर दिया। पीठ ने कहा कि उत्तराखंड का मामला भी 9 मई को सुना जाएगा। इस बीच वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सेना के 3 सेवानिवृत्त अधिकारियों की तरफ से इसी मसले पर दाखिल याचिका का उल्लेख किया। पीठ ने दिल्ली और उत्तराखंड पुलिस की तरफ से दाखिल हलफनामे श्याम दीवान को भी सौंपने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि दीवान को भी अगली तारीख पर सुना जाएगा।

कपिल सिब्बल ने कहा कि 9 मई को मुख्य मामले की सुनवाई पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन 17 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में जो धर्म संसद हुई है, उस पर तुरंत सुनवाई होनी चाहिए। सिब्बल ने बताया कि 13 अप्रैल को कोर्ट ने अगली सुनवाई में हिमाचल के वकील को मौजूद रहने के लिए कहा था, लेकिन आज कोई नहीं आया है। वरिष्ठ वकील ने कहा कि इस कार्यक्रम से जुड़ी कुछ चिंताजनक बातें हैं, जिन्हें कोर्ट में रखा जाना जरूरी है। पीठ ने कहा कि वह हिमाचल प्रदेश को लेकर दायर आवेदन पर 26 अप्रैल को सुनवाई करेंगे।

 (वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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