Saturday, October 16, 2021

Add News

लखीमपुर की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, आज सुनवाई

ज़रूर पढ़े

लखीमपुर की घटना पर उच्चतम न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। लखीमपुर में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को लेकर लगातार मांग उठ रही है। लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में आठ लोगों की जान चली गई थी। केस का टाइटल ‘लखीमपुर खीरी में हिंसा के चलते जान का नुकसान’ है। मीडिया रिपोर्टस और चिट्ठी पर सुप्रीम कोर्ट ने यह संज्ञान लिया है।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने बुधवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले का हवाला देते हुए कहा था कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कदम उठाना चाहिए। इसके अलावा इस घटना को लेकर उच्चतम न्यायालय को मंगलवार को एक पत्र लिखकर तीन अक्टूबर की इस घटना के मामले में शीर्ष अदालत की निगरानी में उच्चस्तरीय न्यायिक जांच का अनुरोध भी किया गया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने एक ट्वीट में हैरानी जताते हुए कहा कि, लोग मारे जा रहे हैं, कुचले जा रहे हैं, लेकिन सर्वोच्च अदालत संज्ञान नहीं ले रहा। उन्होंने देश की सबसे बड़ी अदालत से इस मामले में कार्रवाई के लिए अनुरोध किया है। कपिल सिब्बल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि एक समय था जब, उच्चतम न्यायालय, यूट्यूब और सोशल मीडिया के नहीं होने पर भी प्रिंट मीडिया में छपी खबरों के आधार पर ही स्वत: संज्ञान लेता था। सुप्रीम कोर्ट ने बेजुबानों की भी आवाज सुनी। वहीं आज जब हमारे नागरिक कुचले जा रहे हैं और, उन्हें मारा जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध है कि इसे संज्ञान में ले।

दो अधिवक्ताओं ने पत्र लिखकर प्रधान न्यायाधीश एन वी रमना से अनुरोध किया है कि इसे जनहित याचिका के रूप में लिया जाए ताकि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जा सके। इसमें गृह मंत्रालय और पुलिस को मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने तथा घटना में कथित रूप से शामिल लोगों को दंडित करने की भी मांग की गयी है। अधिवक्ताओं शिव कुमार त्रिपाठी और सी एस पांडा के लिखे पत्र में अदालत की निगरानी में उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की गयी है और एक निश्चित समय में इसमें सीबीआई को भी शामिल करने का अनुरोध किया गया है।

लखीमपुर खीरी में बीते रविवार को हुई हिंसा में चार किसानों सहित 9 लोगों की जान गई है। किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद से पीड़‍ितों के लिए लगातार न्‍याय की मांग उठ रही है। यूपी सरकार ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज किया है। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है, जिस पर अपने वाहन से भीड़ को कुचलने का आरोप है। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने आरोपों से इनकार किया है।

दो दिन पहले किसानों की एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने बड़ी टिप्पणी की थी। पीठ ने कहा था कि जब ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती हैं, तो कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता है। प्रदर्शनकारी दावा तो करते हैं कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, लेकिन जब वहां हिंसा होती है तो कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होता। वहीं केंद्र की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए किसानों के विरोध-प्रदर्शन पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है।

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी में रविवार को हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। हजारों की संख्या में किसान यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में केंद्रीय मंत्रियों का विरोध करने के लिए जमा हुए थे। किसान नेताओं ने आरोप लगाया था कि मंत्री के बेटे के काफिले में शामिल वाहनों ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुचला। इसके बाद हिंसा भड़क उठी और 4 किसानों के अलावा काफिले में शामिल चार अन्य लोग भी मारे गए थे। यूपी पुलिस ने लखीमपुर हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत 14 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।धारा 302, 120बी और अन्य धाराओं में यह केस दर्ज किया गया है।

लखीमपुर में हुई हिंसा को करीब चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। पुलिस ने ना तो अभी तक किसी को गिरफ्तार किया है, और ना ही मुख्य आरोपी से पूछताछ की गई है। जबकि किसानों ने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसमें बाकायदा आरोपी को नामजद किया गया है। तिकुनिया बवाल मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के न बाद भी नामजद अभियुक्त आशीष मिश्र की गिरफ्तारी न होने से पुलिस बैकफुट पर है। विपक्ष समेत किसान नेता उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

रविवार की दोपहर तिकुनिया में हुए बवाल में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद भाजपा सरकार विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी की मांग और उनके बेटे आशीष मिश्र की गिरफ्तारी की मांग कर रही हैं। इस मामले में आशीष मिश्र के ऊपर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा दर्ज होने के तीन दिन बाद भी उनकी गिरफ्तारी न होने पर पुलिस प्रशासन भी विपक्ष के निशाने पर है। उस पर सत्ता के दबाव में काम करने और केंद्रीय मंत्री को बचाने के आरोप लग रहे हैं। मृतक किसानों के परिजन और सरकार के बीच मध्यस्थता कराने वाले भाकियू नेता राकेश टिकैत ने भी समझौते के बाद मंत्रिमंडल से टेनी की बर्खास्तगी और उनके बेटे की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अक्टूबर कोलखनऊ आये थे, सबको उम्मीद थी कि हर छोटी चीज पर नजर रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखीमपुर कांड पर कुछ बोलेंगे, लेकिन उन्होंने भी कुछ नहीं कहा।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

पत्रकार के लिए किसी की गोद जरूरी है या फिर अपनी नज़र? विशेष संदर्भ सिंघु घटना

सिंघु बॉर्डर पर एक दलित शख्स की हत्या की घटना को बहुतेरे लोग गुरु ग्रन्थ साहब की बेअदबी से...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.