तालिबानों की कौंसिल कर सकती है अफगानिस्तान पर शासन, अखुंदजादा होंगे उसके चीफ!

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नई दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान की शासन व्यवस्था को लेकर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है। लेकिन इस बीच समूह के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया है कि इस्लामिक समूह कौंसिल के जरिये शासन व्यवस्था के संचालन पर विचार कर रहा है। आंदोलन के सुप्रीम नेता हैब्तुल्लाह अखुंदजादा उसके प्रभारी होंगे।

इसके अलावा तालिबान अफगान सैन्य बलों के पूर्व पायलटों और सैनिकों से भी संपर्क कर रहा है। और उनसे उनकी सरकार में शामिल होने की अपील करेगा। यह बात निर्णय लेने वाले समूह के हिस्से के सदस्य के तौर पर जाने जाने वाले वहीदुल्लाह हाशिमी ने बतायी। हालांकि समूह का यह प्रयास कितना सफल होगा अभी उसे देखना होगा।

पिछले 20 सालों में हजारों सैनिक तालिबान के हाथों मारे गए हैं। हाल के दिनों में समूह ने अमेरिकी प्रशिक्षित पायलटों को अपना निशाना बनाया था क्योंकि वो बेहद अगुआ भूमिका में थे।

हालांकि कहा जा रहा है कि सत्ता का ढांचा 1996 से 2001 के दौरान चले तालिबानी शासन की तरह ही होगा। उस समय मुल्ला उमर उसके सुप्रीम नेता हुआ करते थे और देश के रोज ब रोज की शासन व्यवस्था कौंसिल के हाथों में थी। अखुंदजादा कौंसिल के हेड की भूमिका में रहेंगे। जो अपने तरीके से देश के राष्ट्रपति के बराबर का ओहदा होगा। ऐसा हाशिमी ने बताया।

अंग्रेजी में रायटर्स को दिए बयान में हाशिमी ने कहा कि “ऐसा भी हो सकता है कि उनका (अखुंदजादा का) डिप्टी ‘राष्ट्रपति’ की भूमिका निभाए।”

तालिबान के सुप्रीम नेता के पास तीन डिप्टी हैं। मुल्ला उमर के बेटे मौलवी याकूब, बेहद मजबूत हक्कानी नेटवर्क के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी और अब्दुल गनी बारादर जो दोहा में तालिबान के राजनीतिक दफ्तर का नेतृत्व करते हैं। और समूह के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

तालिबान अफगानिस्तान को कैसे संचालित करेंगे इसको लेकर बहुत सारी चीजें अभी तय की जानी बाकी है। लेकिन हाशिमी का कहना है कि अफगानिस्तान लोकतंत्र नहीं होगा। उन्होंने कहा कि “वहां कोई भी लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं होगी क्योंकि इसका हमारे देश में कोई आधार नहीं है।”

“हमें यह बहस करने की जरूरत नहीं है कि अफगानिस्तान में किस तरह की राजनीतिक व्यवस्था को लागू करनी चाहिए क्योंकि यह पहले से ही साफ है। यह शरिया कानून है और यह वही है”।

हाशिमी ने बताया कि वह इस सप्ताह में एक बैठक में हिस्सा लेने वाले हैं जिसमें तालिबान का नेतृत्व शासन के मसले पर बातचीत करेगा।

अपदस्थ सरकार के लिए लड़ाई लड़ने वाले सैनिकों और पायलटों को भर्ती करने के मुद्दे पर हाशिमी ने कहा कि तालिबान एक नया राष्ट्रीय सुरक्षा बल तैयार करना चाहता है जिसमें उसके खुद के सदस्य शामिल होंगे इसके साथ ही इच्छुक सैनिक भी उसमें शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उनमें से ज्यादातर को तुर्की, जर्मनी और इंग्लैंड में प्रशिक्षण मिला है। इसलिए हम उन्हें उनकी अपनी पोजीशन लेने के लिए बात करेंगे।

“निश्चित तौर पर सेना में सुधार के लिहाज से हम कुछ बदलाव करेंगे लेकिन अभी भी हमें उनकी जरूरत है और उन्हें शामिल होने के लिए बुलाएंगे।”

हाशिमी ने कहा कि तालिबान को खासकर पायलटों की जरूरत है। क्योंकि उनके पास कोई नहीं है। जबकि उन्होंने अफगानिस्तान की विभिन्न एयरफील्ड्स में तमाम हेलीकाप्टर और विमानों को पकड़ा है। और यह सब कुछ विदेशियों से लड़ाई के क्रम में उन्होंने हासिल किया है।

उन्होंने बताया कि हम कई पायलटों के साथ संपर्क में हैं।

और हमने उनसे आगे बढ़कर ज्वाइन करने, अपने भाइयों और अपनी सरकार के साथ काम करने के लिए कहा है। उनमें से कई से हम लोगों ने बात की है और दूसरों को आमंत्रित करने के लिए उनके नंबरों की तलाश में हैं।

उन्होंने कहा कि तालिबान पड़ोसी देशों से उन विमानों को लौटाने की अपेक्षा करता है जो उनके इलाकों में उतरे हैं। उनका इशारा उन 22 सैनिक विमानों, 24 हेलिकाप्टरों और सैकड़ों अफगान सैनिकों की तरफ था जो सप्ताह के आखिर में उजबेकिस्तान भाग गए थे।

(ज्यादातर इनपुट इंडियन एक्सप्रेस से लिए गए हैं।)

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