उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में एमएलए सेंगर समेत छह को 10 साल की सज़ा

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नई दिल्ली। निलंबित बीजेपी एमएलए कुलदीप सिंह सेंगर और छह दूसरे लोगों को उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में कोर्ट ने 10 साल की सज़ा सुनायी है। सज़ा पाने वालों में उसके भाई और दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

फ़ैसला सुनाते हुए डिस्ट्रिक्ट जज धर्मेश कुमार ने कहा कि परिस्थितियां और मामले की सच्चाई को देखते हुए आरोपी किसी भी तरह के दया के पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि “इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता है कि क़ानून के शासन को तोड़ा गया है। अशोक सिंह भदौरिया, केपी सिंह और कुलदीप सिंह सेंगर सरकारी कर्मचारी हैं उनसे क़ानून के पालन की आशा की जाती है। सच्चाई यह है कि उनको (पिता) पीटा गया, परेड कराया गया और अंत में उनकी मौत हो गयी। यह किसी भी तरह की उदारता बरतने वाला केस नहीं है।”

इसके अलावा कोर्ट ने सेंगर और उसके भाई अतुल सिंह पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी किया।

सज़ा की घोषणा के बाद एसएचओ अशोक सिंह भदौरिया ने जज से दया की अपील की। उन्होंने कहा कि “मेरे बच्चों की क्या गलती है। मैं केवल अपना काम कर रहा था। मेरा सेंगर से कुछ लेना-देना नहीं है। यह मौत के समान है। कृपया मुझ पर दया कीजिए।” 

आरोपियों को सज़ा सुनाते हुए जज ने कहा कि घटनाओं का क्रम बग़ैर किसी संदेह के इस बात को स्पष्ट कर देता है कि कुलदीप सेंगर के संरक्षण में उसके ज़मीनी कार्यकर्ताओं – विनीत मिश्रा, बिरेंदर सिंह और शशि प्रताप सिंह (और शायद कुछ और जिनकी पहचान नहीं की जा सकी)- ने पीड़ित को पैरों से मारा और फिर लगातार उसकी राइफ़ल के कुंदों से पीटाई की।

हालाँकि कोर्ट ने दूसरे आऱोपियों कांस्टेबल आमिर खान, शैलेंद्र सिंह, राम शरण सिंह और शरदवीर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए छोड़ दिया।

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