गैर बीजेपी फेडरल फ्रंट की तलाश में आज पवार के घर पर होगा नेताओं का जमावड़ा

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नई दिल्ली। देश में एक संभावित फेडरल फ्रंट बनाने के लिए एनसीपी मुखिया शरद पवार आज एक बैठक कर रहे हैं। राष्ट्र मंच के बैनर के तहत होने वाली इस बैठक में विपक्षी दलों के नेता और कुछ बुद्धिजीवी भाग से सकते हैं। पवार के इस फैसले को भविष्य की राजनीति में संभावनाओं की तलाश के लिहाज से पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि राष्ट्र मंच को यशवंत सिन्हा और शत्रुघन सिन्हा ने 2018 में एक राजनीतिक एक्शन ग्रुप के तौर पर खड़ा किया था। और बीच-बीच में कभी-कभी उसकी बैठकें होती रहती थीं। लेकिन आज की बैठक में उन नेताओं को बुलाया गया है जिनका इससे पहले कोई रिश्ता नहीं था।

यह पहली बार है जब पवार कोई बैठक बुला रहे हैं। उनका यह फैसला राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ पखवाड़े में हुई दूसरी बैठक के बाद लिया गया। पवार के इस फैसले को ममता बनर्जी के उस आह्वान से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने बीजेपी के खिलाफ एक फेडरल फ्रंट खड़ा करने की बात कही है।

यशवंत सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा कि “जहां तक विपक्षी एकता का सवाल है तो निश्चित तौर पर मेरा यह मानना है हमें किसी बेस्ट के होने का इंतजार नहीं करना चाहिए और उससे शुरू कर देना चाहिए जो इसका इच्छुक है। यह चाहत रखने वालों का एक गठबंधन होगा।”

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और शत्रुघन सिन्हा, पूर्व मंत्री और पत्रकार अरुण शौरी, आप सांसद संजय सिंह, एनसीपी एमपी मजीद मेमन, एसपी नेता घनश्याम तिवारी, पूर्व जेडीयू नेता पवन वर्मा और गैर राजनीतिक शख्सियतों में पूर्व राजदूत केसी सिंह और प्रोफेसर अरुण कुमार पिछले दिनों हुई राष्ट्र मंच की बैठकों में शामिल होते रहे हैं।

लेकिन इस बार आरजेडी नेता और राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा और सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी तथा सीपीआई महासचिव डी राजा को भी आमंत्रित किया गया है। हालांकि बताया जा रहा है कि मनीष तिवारी और शत्रुघन सिन्हा दोनों कांग्रेस नेता इस बात अनुपस्थित रहेंगे। तिवारी ने कहा कि वह इस समय अपने पंजाब के लोकसभा क्षेत्र में हैं।

आरजेडी नेता मनोज कुमार झा ने बताया कि उन्हें निमंत्रण मिला है लेकिन बैठक में हिस्सा लेने की स्थिति नहीं हैं क्योंकि उन्हें मंगलवार को बिहार जाना है। दोनों वामपंथी नेता शायद ही इसमें हिस्सा लें।

राजा ने कहा कि “हम नहीं जानते कि दलों के मुखिया या फिर राजनीतिक पार्टियों के औपचारिक प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेंगे……बैठक का रूप और एजेंडा क्या है…..कुछ भी साफ नहीं है….इस पर हम कल (आज) सुबह फैसला लेंगे।”

यशवंत सिन्हा ने कहा कि हालांकि बैठक राष्ट्रमंच द्वारा आयोजित की गयी है और एनसीपी नेता मेमन ने इस सिलसिले में पवार को सूचना दी है। उन्होंने कहा कि “संयोग से पवार दिल्ली में हैं। उन्होंने सलाह दिया कि वह राष्ट्रमंच की बैठक में भाग लेना पसंद करेंगे……अपने घर पर…..हमने उनके बुलावे को स्वीकार कर लिया।”

बीजेपी विरोधी फ्रंट के उभरने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “मैं किसी चीज की भविष्यवाणी नहीं कर सकता हूं….हम निश्चित तौर पर 2024 में सत्तारूढ़ निजाम से कड़ा मुकाबला करेंगे।”

यह पूछे जाने पर कि कौन इस तरह के मोर्चे का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि “मैं उस ट्रैप में फंसना नहीं चाहता हूं। किसने 1977 के आंदोलन का नेतृत्व किया……प्रधानमंत्री का प्रत्याशी कौन था। यह सब जाल है जिसमें लोग फंस जाते हैं…..अगर आप भारत में चुनावी राजनीति का व्यवहार देखें तो कई बार बीजेपी समेत राजनीतिक दलों ने अपने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के चेहरे घोषित कर चुनाव लड़े हैं……बहुत बार उन्होंने किसी चेहरे को आगे नहीं किया है……उसके बाद भी चुनाव वे लड़े हैं। हमें देखना चाहिए कि 2024 अभी तीन साल दूर है……पुल के नीचे अभी बहुत पानी बहना शेष है।”  

मुंबई में एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि बैठक का लक्ष्य विपक्ष के एक संयुक्त मोर्चे को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि “पवार साहब ने इसके पहले विपक्ष के संयुक्त मोर्चे को सामने लाने की घोषणा की थी। इस काम की कल (आज) से शुरुआत हो रही है।”

मलिक ने कहा कि आने वाले संसदीय सत्र को लेकर और देश की राजनीतिक परिस्थिति पर एक बातचीत होगी। मंगलवार को ही एनसीपी की दिल्ली में राष्ट्रीय एक्जीक्यूटिव की बैठक भी होगी।

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