संसद में गूंजा उन्नाव हादसा; अखिलेश ने जतायी हत्या की आशंका, डीजीपी ने कहा- परिजन चाहें तो सीबीआई को सौंपा जा सकता है मामला

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उन्नाव हादसे की तस्वीर।

नई दिल्ली। उन्नाव गैंगरेप पीड़िता सड़क हादसा मामले में यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि अगर पीड़ितों के परिजन चाहेंगे तो मामले को सीबीआई सौंप दिया जाएगा। इस बीच, समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने इसे हत्या की आशंका करार देते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कांग्रेस ने भी सीबीआई जांच की मांग की है। अखिलेश ने आज इस मामले को लोकसभा में उठाया। इसके पहले विपक्षी दलों ने संसद में उन्नाव मसले पर स्थनग प्रस्ताव की नोटिस दी थी।

आज सुबह संवाददाताओं से बात करते हुए डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि “हम निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच संचालित करेंगे। प्राथमिक जांच यह बताती है कि ट्रक की स्पीड बहुत ज्यादा होने के चलते यह शुद्ध रूप से दुर्घटना का मामला लगता है। ट्रक चालक और मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। अगर परिवार सीबीआई जांच की मांग करता है तो हम लोग मामले को सीबीआई को सौंप देंगे।”

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साथ ही उन्होंने कहा कि पीड़िता की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है। गाड़ी में जगह की कमी होने के चलते पीड़िता ने उन्हें कल रायबरेली जाने से रोक दिया था।

मामले पर बोलते हुए लखनऊ क्षेत्र के एडीजी राजीव कृष्णन ने कहा था कि सुरक्षाकर्मी पीड़िता के साथ क्यों नहीं थे इसकी जांच की जा रही है। गौरतलब है कि पीड़िता को एक गनर और दो महिला पुलिस मुहैया करायी गयी थी। ऐसे में तीन-तीन सुरक्षा कर्मियों में से एक का भी उसके साथ न होना कई सवाल खड़े करता है।

घायलों की हालत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “डाक्टरों ने हमें बताया है कि उन्हें (पीड़िता और उसके वकील) लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। उनकी कुछ हड्डियों में फ्रैक्चर हो गया है। उनमें से एक के सिर में चोट लगी है।”

हालांकि उन्होंने भी प्राथमिक जांच में सुरक्षाकर्मियों के साथ न होने के पीछे कार में जगह न होने को प्रमुख कारण बताया है।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  ने हत्या की आशंका जताई है। उन्होंने कहा है कि उन्नाव की रेप पीड़िता के साथ रायबरेली जाते हुए हुआ हादसा गम्भीर घटना है जिसके पीछे उसकी हत्या की आशंका भी हो सकती है। इसके साथ ही अखिलेश ने कहा कि  घायलों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी।’

वहीं, कांग्रेस की विधायक आराधना मिश्रा ने कहा कि ‘उन्नाव रेप पीड़िता की आज संदिग्ध परिस्थितियों में एक्सीडेंट हुआ है, उसके परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई है। कांग्रेस पार्टी मामले की जांच की मांग कर रही है। मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।’

उधर, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने बताया है कि उन्होंने इस मसले पर बातचीत करने के लिए राज्यसभा सभापति को स्थगन प्रस्ताव की नोटिस दिया है।

लोकसभा में कांग्रेस की तरफ से नोटिस दी गयी है। विपक्षी दल चाहते हैं कि इस समले पर सदन में बातचीत हो।

महिला संगठनों ने भी इसके खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। एपवा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रति राव ने एक बयान जारी कर इसे हादसा नहीं हत्या करार दिया है। उन्होंने मोदी-शाह-योगी शासन को बलात्कार पीड़ितों के लिए आपातकाल करार दिया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि व्यापम घोटाले, आसाराम बलात्कार कांड और राम रहीम बलात्कार कांड, और गुजरात के हरेन पांड्या और सोहराबुद्दीन हत्याकांडों और कौसर बी बलात्कार-हत्या कांड में भी इसी तरह से सिलसिलेवार तरीके से गवाहों की, और यहां तक कि जज की या तो हत्या या संदेहास्पद मौतें हुईं। यही भाजपा मॉडल है। यही मोदी-शाह का गुजरात माॅडल था, जो आज उत्तर प्रदेश, और पूरे देश पर काबिज है। 

भाजपा बलात्कारियों के लिए जुलूस निकालती है। ऐसा मालूम होता है कि उसके राज में उसके नेताओं के खिलाफ बलात्कार/हत्या का आरोप लगाना या गवाह होना, मौत को बुलावा देना है। बिहार में भी बच्चियों के साथ बलात्कार मामलों में पीड़ित गायब हो जा रहे हैं। ‘बेटी बचाओ’ नहीं, बेटी डराओ की मुहिम चला रही हैं भाजपा सरकारें। भाजपा शासन, महिलाओं और बच्चियों के लिए आपातकाल है। इस आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाओ! 

गौरतलब है कि गैंगरेप पीड़िता अपने परिजनों और वकील के साथ उन्नाव से रायबरेली जेल में बंद में अपने चाचा से मिलने जा रही थी। लेकिन तभी रास्ते में संबंधित ट्रक ने बिल्कुल सामने से आकर टक्कर मार दी। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गयी। और पीड़िता और उसके वकील को गंभीर रूप से घायलावस्था में लखनऊ के ट्रौमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।

आपको बता दें कि उन्नाव से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत उसके आदमियों पर पीड़िता के साथ गैंग रेप का आरोप है। कुलदीप सिंह इस समय जेल में है।

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