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खास रिपोर्ट: योगी राज में दलितों का यातनागृह बन गया है उत्तर प्रदेश

लॉकडाउन में सब कुछ बंद था, नहीं बंद था तो दलित समुदाय का उत्पीड़न। दलित उत्पीड़न की घटनाएं कोरोना काल में बढ़ती हुई दिखती हैं। तमिलनाड़ु में तो ये पांच गुना बढ़ती दिखती है जबकि हरियाणा में दलित उत्पीड़न के मामले बढ़ते हुए दिखे। लेकिन उत्तर प्रदेश जहां ठाकुर मुख्यमंत्री के सत्तासीन होने के चलते सत्तावादी वर्ग के लिए लॉकडाउन तो ‘जातिवादी नाक’ के लिए चुनौती बने लोगों को निपटाने का बढ़िया अवसर लेकर आया। जौनपुर, अमरोहा के अलावा आजमगढ़, बांदा, मेरठ, कानपुर देहात में भी हुई है।

8 जून को बिजनौर के हल्दौर गांव में नरदेव सिंह नामक एक 55 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर दी गई। मारे गए नरदेव के परिजनों का आरोप है कि गांव के ही यदुवीर सिंह उर्फ भूरे, ईश्वर उर्फ काले निवासी लाडनपुर, निपेन्द्र व उदित निवासी खासपुरा तथा दो अन्य लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला। जबकि अभियुक्त पक्ष का कहना है कि नरदेव की मौत आम के पेड़ से गिरने की वजह से हुई।

स्थानीय लोग इस हत्या के पीछे भूमि विवाद बता रहे हैं जबकि पुलिस सभी पहलुओं की जाँच कर रही है। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

बिजनौर के सीओ सिटी कुलदीप सिंह कहते हैं, “अभी जाँच चल रही है। जाँच से पहले कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी। मृतक नरदेव पक्ष के ख़िलाफ़ भी रिपोर्ट दर्ज की गई है जबकि मृतक के पुत्र मुनीष और पत्नी विमला देवी की शिकायत पर पुलिस ने छह लोगों पर ग़ैर-इरादतन हत्या समेत कई अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है।”

राजधानी लखनऊ में दलित उत्पीड़न चरम पर है

उत्पीड़क सिर्फ़ सवर्ण वर्ग के लोग ही नहीं हैं पुलिस भी उत्पीड़ित कर रही है। ऐसे ही एक मामले में लखनऊ के मड़ियाँव थाने में दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया। जब पति और पत्नी के बीच मामूली झगड़ा होने पर पत्नी ने 112 नंबर पर कॉल कर दिया। पुलिस आई और थाना मड़ियाव, नौबस्ता के वेदप्रकाश को पकड़कर थाने ले गई। पीड़ित के मुताबिक केके मिश्रा, केडी सिंह पकड़कर ले गए और जमकर पट्टे से पिटाई की, दरोगा राहुल तिवारी ने गालियां दी और मारा और जातिसूचक गालियां दीं। पीड़ित का आरोप है कि बाद में उसकी मां से 15000 रुपए लेकर ही छोड़ा। मामला 27 मई का है।

13 जून को लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में थाना निगोहा गांव उतरावां व भुलई खेड़ा में मामूली कहा सुनी के बाद सत्ता वर्ग के 30-40 ठाकुरों ने 3 दलित युवकों पर धारदार हथियारों से हमला करके उन्हें लहूलुहान कर दिया।

इस घटना में लक्ष्य टीम सक्रिय हुई और गांव का दौरा किया। लक्ष्य कमांडर संघमित्रा गौतम ने बताया कि पीड़ित परिवार गुंडों के अत्याचार से सहमा है। आगे की कार्रवाई करवाने से भी घबरा रहा है। दिक्कत वही कि फिर से गांव में इन्हीं जातीय गुंडों के बीच में रहना है। निगोहा थाने के SHO का कहना है FIR दर्ज कर ली गई है। इस मामले में केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी अभी तक खानापूर्ति के लिए कर ली गई है।

10 जून को लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र के बरौली गांव में चोरी के आरोप में दलित वर्ग के तीन युवकों का हाथ बांधकर मारा पीटा जातिसूचक गालियां दी और फिर सिर मुंडवा कर मुंह काला करके जूते की माला पहनाकर घुमाय़ा गया। इस अमानवीय कृत्य के सामने आने पर योगी राज के प्रशासन की मुस्तैदी देखिए कि पीड़ितों को ही जेल में डाल दिया गया।

जानकारी के मुताबिक़ तीनों दलित युवक कथित तौर पर एक ब्राह्मण परिवार के घर से पंखा चोरी करते हुए देखे गए थे। इनके पकड़े जाने पर गांव के कुछ लोग वहां इकट्ठा हो गए और फिर तीनों को खुले आम पीटा गया और अपमानित किया गया। उन्हें अपमानित करने के लिए उनका मुंडन कर गले में जूते टांग कर गांव में घुमाया गया।

पुलिस का कहना है कि उन्हें अपमानित करने वाले दो दोषियों के खिलाफ आईपीसी (IPC) और एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस बाकी आरोपियों की पहचान वीडियो एवं फोटो के आधार पर कर रही है और आरोपियों पर केस दर्ज कर कार्यवाही करेगी। इन दलित युवकों के खिलाफ भी चोरी का केस दर्ज किया गया है।

योगी का गढ़ गोरखपुर दलितों के लिए काल बना

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के गगहा थाना के ग्राम सभा पकड़ी में गोला थाने का हिस्ट्रीसिटर वशिष्ठ शुक्ला उर्फ़ शेरू अपने भाई समेत मनरेगा में काम करने जा रहे मज़दूर आनंद प्रकाश हरिजन को गाली देते हुए हत्या करने की धमकी देता है और बाद में असलहा लेकर घर पर जा कर पूरी बस्ती को गाली देता है।

13 जून को यूपी गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र के पोखरी गांव में राजपूत जाति से आने वाले पोखरी गांव के सुरेंद्र चंद, शैलेन्द्र चंद, शेरू चंद, पिंटू चंद के नेतृत्व में आस पास के कई गांव के राजपूत बिरादरी के लगभग 25/30 की संख्या में अपराधियों ने दलित टोले पर हथियारों से लैस होकर हमला बोल दिया। अपराधियों ने दलित टोले के रामगती, पुत्र गब्बू, उम्र 55 वर्ष, अभिषेक, अतुल, पुत्र रामगति, पुत्री अंकिता पत्नी मीरा, रामसिंगार, संतोष, तथा एक गर्भवती महिला सहित कई लोगों पर जानलेवा हमला किया, तथा घर के बाहर खड़ी 4 मोटरसाइकिल, एक इलेक्ट्रॉनिक ऑटो को भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया, दबंगों ने पशुओं तक को भी नहीं बख्शा। दरवाजे पर बधी गाय, भैंस को भी बुरी तरह से मारा पीटा। भैंस जो आठ माह के गर्भ से थी, दबंगों के हमले में उसका गर्भपात हो गया।

इंकलाबी नौजवान सभा की जांच टीम का कहना है कि गांव के प्रधान शैलेंद्र चंद्र और कोटेदार सुरेश चंद्र के बीच पहले से विवाद चल रहा है। दोनों ही राजपूत जाति से हैं। ग्राम प्रधान शैलेंद्र मनरेगा के तहत रोड बनवा रहे थे। 29 अप्रैल को दलित टोले के रामगति रोड बनाने के काम में मजदूरी कर रहे थे तभी कोटेदार सुरेश चंद्र आए और कहा कि मेरे खेत से रोड पर मिट्टी नहीं फेंकी जाएगी। रामगति ने कोटेदार से ​कहा कि मैं तो मजदूरी कर रहा हूं, आप ग्राम प्रधान से कहिए। इतना सुनते ही कोटेदार सुरेश चंद्र ने दलित रामगति को गालियां देनी शुरू कर दी और काम बंद करा दिया। गाली-गलौज किये जाने से नाराज रामगति ग्राम प्रधान के साथ थाने चले गये, मगर थानेदार ने मुकदमा नहीं लिखा और समझौता करने को कहा।

जांच टीम का कहना है कि दलितों और राजपूतों में चल रही ये तनातनी 12 जून को और बढ़ गई। दरअसल गांव में काली मेला लगा था। मेले में राजपूत जाति के लड़के दलित युवकों को गालियां बकने लगे। जिसके बाद झगड़ा हुआ और राजपूत जाति के लड़कों को संख्या कम होने के कारण वहां से भागना पड़ा। लेकिन इसी दिन शाम को राजपूत जाति के कुछ लड़के पकड़ी चौराहे पर दलित रामगति के बेटे के अंडे के ठेले के पास पहुंचते हैं और उसे मारने लगते हैं। लेकिन यहां भी दलित जाति के नौजवान जुट जाते हैं और राजपूत लड़कों को भागना पड़ता है।

दलितों से लड़ाई में दो बार भागने के बाद राजपूतों ने इसे इज्ज़त का सवाल बना लिया। और दलितों पर हमले की तैयारी बनाई। जांच टीम का कहना है कि जाति की इज्ज़त का मामला बनते ही ग्राम प्रधान और कोटेदार एक हो गए। और दोनों ने मिलकर कई गावों से राजपूत लड़कों को बुलाया और दलित टोले पर हमला कर दिया।

13 जून को ही गोरखपुर के ग्राम भौवापार, थाना बेलीपार, में अपनी गली में मछली मारने का विरोध करने पर दलित समुदाय के लोगों पर सवर्ण समुदाय के लोगों द्वारा जानलेवा हमला किया गया। मुकदमा दर्ज हुआ, 3 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं। घटना के बाद मुलाहिजा और इलाज करा कर लौट रहे लोगों को फिर से घेरकर मारने की कोशिश हुई। इस दौरान दो पुलिसकर्मी इनके साथ मौजूद थे, लेकिन हमलावरों का मनोबल इतना बढ़ा था कि पुलिस को और ज्यादा फोर्स बुलानी पड़ी तब जाकर घायल अस्पताल पहुंच पाए। पुलिस कह रही है कि मुकदमा लिख गया है लेकिन पीड़ितों को अभी तक एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है, यह सब लोग दहशत में जी रहे हैं।

अमरोहा में दलित युवक के मंदिर जाने पर हत्या

उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले की हसनपुर तहसील स्थित डोमखेड़ा के रहने वाले ओमप्रकाश के सोलह वर्षीय बेटे विकास की बीते छह जून की मध्य रात्रि घर पर ही गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था और तीन लोग गिरफ़्तार कर लिए थे। उस रात को याद करके विकास के पिता ओमप्रकाश बताते हैं- “विकास चारपाई पर सो रहा था। रात में गोली की तेज़ आवाज़ से मेरी आंख खुली। मैंने देखा तो होराम, लाला, रोशन और राजवीर वहां खड़े थे। उन लोगों ने विकास को गोली मार दी थी और मेरे वहां पहुंचने पर कहने लगे कि अगला नंबर तुम्हारा है।” ओमप्रकाश के चचेरे भाई और चश्मदीद मोतीराम कहते हैं कि गोली की आवाज़ सुनकर जब हम जागे और वहां पहुंचे तो वो लोग हमें धमकाते हुए चले गए कि चुप हो जाओ, नहीं तो तुम्हें भी मार डालेंगे।

अमरोहा प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई गई है बावजूद इसके चौहान यानी ठाकुर बाहुल्य इस गांव के बीचोंबीच घर होने के चलते पीड़ित परिवार बेहद ख़ौफ़ में है और गांव की जमीन जायदाद बेचकर कहीं और चले जाने की बात कह रहा है। मरहूम के पिता ओमप्रकाश कहते हैं, “साहब हम बहुत ख़ौफ़ में हैं। वो लोग कह रहे हैं कि अभी बेटे को मारा है, अगला नंबर तुम्हारा है। अब यहां हमें डर लगता है। यही हाल रहा तो हम गांव छोड़कर कहीं और जा बसेंगे।”

ओमप्रकाश कहते हैं, “लोग कह रहे हैं कि मेरे बटे की हत्या पैसों के विवाद को लेकर हुई है, लेकिन सच यह है कि विकास गांव के शिव मंदिर में पूजा करने गया था। दबंगों ने उसे मंदिर में प्रवेश करने से रोका। विवाद बढ़ा और बाद में विकास की हत्या कर दी गई। जिन लोगों ने उसे मारा है उन्होंने 31 मई को ही विकास को मारने की धमकी दी थी।

बता दें कि डोमखेड़ा गांव की आबादी क़रीब आठ सौ है जिसमें 30-35 परिवार दलितों के हैं और गांव में चौहानों की आबादी सबसे ज़्यादा है। ओमप्रकाश ने 31 मई को हुए कथित विवाद के बाद पुलिस में शिकायत की थी कि उन लोगों को मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है, लेकिन पुलिस ने उस शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया। अब विकास की हत्या हो जाने के बाद इस अनदेखी पर हसनपुर थाने के एक दारोग़ा को लाइन हाज़िर कर दिया गया है।

जबकि अभियुक्त पक्ष के लोग इस बात से साफ़ इनकार कर रहे हैं और पुलिस-प्रशासन भी यह मानने को तैयार नहीं है। अमरोहा के पुलिस अधीक्षक डॉक्टर विपिन ताड़ा, विकास की हत्या की वजह पैसों के लेन-देन को बताते हैं।

जौनपुर की घटना आरएसएस-भाजपा के नफ़रती सांप्रदायिक एजेंडे के अनुकूल

उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले के भदेठी गांव में 9 जून मंगलवार शाम को कुछ दलित और मुस्लिम समुदाय के लड़के भैंस-बकरियां चरा रहे थे, तभी उनके बीच कहा-सुनी हो गई। शुरू में ग्राम प्रधान ने बीच-बचाव करके मामले को शांत करवाया। बाद में रात को मुस्लिम पक्ष के लोग दलित बस्ती में लौटे और दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी हुई। इसके बाद ही दलितों के घर में आग लगा दी गई जिसमें 10 घर जलकर खाक हो गए। आरोपी पक्ष के 37 लोग गिरफ्तार हुए हैं। बाकियों की तलाश जारी है। गिरफ्तार किए गए लोगों में समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता जावेद सिद्दीकी और नूर आलम के भी नाम हैं। सराय ख्वाजा पुलिस स्टेशन के SHO संजीव मिश्रा को हटा दिया गया है और पुलिस लाइन से अटैच किया गया है।

मुस्लिम नाम आते ही जैसे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का सांप्रदायिक दिमाग झट से कार्य करने लगता है तभी तो आनन-फानन में आरोपियों पर रासुका और गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश दे दिए गए। जबकि उत्तर प्रदेश में दर्जनों घटनाओं में सवर्ण वर्ग के लोगों द्वारा दलितों पर जानलेवा हमला तक किया गया लेकिन कहीं न रासुका लगा, न कोई कार्रवाई ही हुई।

जौनपुर घटना के मसले पर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर का बयान राजनीतिक सामाजिक रूप से काफी परिपक्व बयान है।

जौनपुर घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश

जौनपुर में हुआ दलित-मुस्लिम टकराव पूरी तरह से आरएसएस भाजपा के एजेंडे के मुफीद है। यही कारण है कि इस मामले में झट से आरोपियों पर रासुका लगाने और पीड़ितों को मुआवजा देने की घोषणा की गई। साथ ही एनआरसी-सीएए विरोधी आंदोलन के समय बनी दलित-मुस्लिम एकता को तोड़ने के एजेंडे के तहत पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।

भाजपा के प्रोपोगैंडा सेल सरगना अमित मालवीय ने इस मसले में एक वीडियो पोस्ट करके इसे सांप्रदायिकता के तहत सोशल मीडिया में चलाया।

वहीं दक्षिणपंथी प्रोपोगैंडा को नेशनल टीवी पर आगे बढ़ाने वाले कथित हिंदू शूरवीर रोहित सरदाना ने भी ट्वीट करके बुद्धिजीवियों और अंबेडकरवादियों को घेरने की कोशिश की।

इस पूरे मसले को पूंजीवादी हिंदी मीडिया ने भी सत्ता के पक्ष में भुनाने की कोशिश की।

नवभारत टाइम्स अपनी एक रिपोर्ट में विपक्ष पर सवाल उठा रहा है। ग़ज़ब की पत्रकारिता है भाई जिसमें सत्ता के बजाय विपक्ष की जवाबदेही तय की जा रही है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on June 22, 2020 1:58 pm

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