Sun. Jun 7th, 2020

भारत में कोरोना को अल्पसंख्यकों के मत्थे मढ़ने पर अमेरिका ने जताया कड़ा एतराज

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प्रतीकात्मक फ़ोटो।

नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत में कोरोना मामले में अल्पसंख्यकों को दोषी ठहराने की कोशिश पर कड़ा एतराज़ ज़ाहिर किया है। उसने कहा है कि यह पूरी तरह से ग़लत है। उसने साफ-साफ कहा कि कोरोना की उत्पत्ति को लेकर दुनिया में जारी आरोपों-प्रत्यारोपों को किसी भी क़ीमत पर पीछे धकेले जाने की ज़रूरत है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिकी राजदूत सैम ब्राउनबैक ने गुरुवार को कहा कि “उन्हें (सरकारों को) बाहर जाकर खुला संदेश देना चाहिए और कहना चाहिए, बिल्कुल नहीं। यह कि ऐसा कुछ नहीं है। हम जानते हैं कि यह वायरस कहां से पैदा हुआ है। हम यह भी जानते हैं कि यह महामारी है जिसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है यह ऐसा कुछ नहीं है जो धार्मिक अल्पसंख्यकों से आया हो। लेकिन दुर्भाग्य से हम लोग देख रहे हैं कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आरोपों-प्रत्यारोपों का खेल शुरू हो गया है। हम आशा करते हैं कि मेज़बान सरकारें इसको पूरी ताक़त के साथ पीछे धकेलेंगी।”

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ब्राउनबैक की यह टिप्पणी दिल्ली में आयोजित तबलीग के कार्यक्रम के बाद आयी है। गौरलतब है कि यह पूरा आयोजन कोरोना प्रभावितों के बड़े केंद्र के तौर पर सामने आया है।

उन्होंने धार्मिक समूहों से सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ावा देने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के पैमाने पर धार्मिक बंदियों की रिहाई की भी मांग की। इस सिलसिले में उन्होंने ख़ासकर ईरान और चीन का नाम लिया।

कोविद 19 का धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर होने वाली कांफ्रेंस काल में जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी भारतीय अधिकारियों से कोरोना जेहाद के ट्रेंड होने पर कोई विशिष्ट बात हुई है तो उन्होंने उससे इंकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि “अगर कोई शख़्स अपने धर्म का पालन करता है और यह सब कुछ एक जेहादी के तौर पर करता है तथा किसी बिल्डिंग पर हमला करके उसे जला देता है तो मैं सोचता हूँ कि सरकार के पास उसको पकड़ कर जेल में डालने से लेकर दंडित करने तक हर तरह के अधिकार सुरक्षित हैं। और इसे हम लोग अमेरिका में करते भी हैं। और इसे मैंने अपने राज्य कंसास में ख़ुद किया है जब मैं वहाँ का गवर्नर था”। 

(ज़्यादातर इनपुट इंडियन एक्सप्रेस से लिया गया है।)

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