Sunday, October 24, 2021

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एबीपी न्यूज के सर्वे पर उत्तराखंड के मंत्री और विधायक को नहीं भरोसा, कांग्रेस में हुए शामिल

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उत्तराखंड में अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले को लेकर एबीपी न्यूज और सी वोटर के सर्वे में राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी अगले साल एक बार फिर जीत हासिल करने कि भविष्यवाणी पर धामी सरकार में परिवहन मंत्री यशपाल आर्य और उनके बेटे नैनीताल विधायक संजीव आर्य को ही भरोसा नहीं है। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य अपने बेटे नैनीताल विधायक संजीव आर्य ने सोमवार को नई दिल्ली में कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। इसी से पता चलता है कि एबीपी न्यूज और सी वोटर का सर्वे कितना खोखला है।

उत्तराखंड में अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एबीपी न्यूज और सी वोटर ने सर्वे किया है। एबीपी न्यूज-सी वोटर के सर्वे के मुताबिक राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी अगले साल एक बार फिर जीत हासिल कर सकती है। वहीं कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल होगी। सर्वे के मुताबिक, कुल 70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी, बसपा और दूसरी पार्टियां कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकेंगी।

सर्वे के मुताबिक, उत्तराखंड में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में 44 से 48 सीटों पर जीत के साथ पूर्ण बहुमत मिल जाएगा। कांग्रेस को 19-23 सीटें मिलेंगी। आम आदमी पार्टी को शून्य से 4 और अन्य को 0-2 सीटें मिलेंगी। वोट शेयर की बात की जाए तो बीजेपी को 43 फीसदी वोट मिलेंगे। कांग्रेस को 32.6 फीसदी आप को 14.6 फीसदी और अन्य को 9.7 फीसदी मत हासिल होंगे।

कांग्रेस ने उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव-2022 से पहले भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने अपने बेटे नैनीताल विधायक संजीव आर्य ने सोमवार को नई दिल्ली में कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। यशपाल उत्तराखंड सरकार ने समाज कल्याण मंत्री व परिवहन मंत्री थे। दोनों नेताओं ने पूर्व सीएम हरीश रावत व कांग्रेस प्रदेश कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजदूगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से उनके आवास में मुलाकात की थी। बीजेपी कैडर आधारित पार्टी मानी जाती है और इस प्रकार से नेताओं के पाला बदलने से एबीपी न्यूज और सी वोटर के सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया है।

यशपाल आर्य बाजपुर और उनके बेटे संजीव आर्य नैनीताल सीट से विधायक हैं। वहीं यशपाल आर्य पुष्कर सिंह धामी सरकार में मंत्री थे और उनके पास छह विभाग थे। जिसमें परिवहन, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण, निर्वाचन और आबकारी विभाग शामिल थे।

यशपाल और संजीव आर्य ने 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था। भाजपा ने तब दोनों को प्रत्याशी भी बनाया था। दोनों ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद भाजपा सरकार ने यशपाल आर्य को कैबिनेट मंत्री बनाया। यशपाल पूर्व में उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे हैं। यशपाल आर्य पहली बार 1989 में खटीमा सितारगंज सीट से विधायक बने थे। वह पहले भी काफी समय तक कांग्रेस पार्टी में भी रहे हैं।

उत्तराखंड में बीजेपी अब तक तीन मुख्यमंत्री बदल चुकी है। बीजेपी ने ये फैसला आगामी चुनाव तो देखते हुए लिया। क्या इस बार भी सत्ता की गद्दी पर काबिज रह पाएंगी। सर्वे के अनुसार बीजेपी 42 से 46 सीट पाकर सत्ता पर काबिज बनी रह सकती है। वहीं कांग्रेस को 20 से अधिक सीट मिलने के आसार है।

यशपाल आर्य 2007 से 2014 तक कांग्रेस की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष थे और रावत के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले 2017 में भाजपा में शामिल हो गए थे। यशपाल आर्य बाजपुर और उनके बेटे संजीव आर्य नैनीताल सीट से विधायक हैं।

यह कहकर सिर्फ नहीं बचा जा सकता है कि यशपाल आर्य पूर्व में कांग्रेसी थे और वापस कांग्रेस में ही चले गए। उनका वापस कांग्रेस में जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। खासकर ऐसे राज्य जहां अगले साल चुनाव है। इस प्रकार से किसी बड़े नेता के पार्टी छोड़ने से यह सवाल जरूर खड़ा होगा कि क्या प्रदेश की सियासी फिजा बदल रही है। आर्य के पार्टी छोड़ने पर भले ही सीएम पुष्कर सिंह धामी यह कह रहे हों कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम, संगठन द्वितीय और व्यक्ति तीसरा है। जाने वाले को कौन रोक सकता है भला।

वैसे तो जिन राज्यों में चुनाव होते हैं उससे पहले और बाद में इस प्रकार के पाला बदलने की कई खबरें आती हैं। भाजपा के लिए थोड़ी चिंता की बात इसलिए भी है कि क्योंकि विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में उसकी स्थिति अच्छी नहीं है। एक के बाद एक जिन्हें कल तक भरोसेमंद माना जा रहा था वो अब पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी की ओर से सकारात्मक छाप छोड़ना पार्टी के लिए एक चुनौती है। बंगाल में पार्टी का प्रदर्शन बढ़िया नहीं रहा उसके पीछे एक कारण यह भी गिनाया गया कि चुनाव से पहले अंधाधुंध जैसे लोगों को शामिल कराया गया वो भी एक वजह रही।

उत्तराखंड में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 33.5 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ था और बीजेपी ने 46.5 फीसदी वोट मिले थे। 46 फीसदी से ज्यादा वोट लेकर भारतीय जनता पार्टी ने 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में सरकार बनाई थी। इस चुनाव में भाजपा को राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से 57 सीटों पर जीत मिली थी और कांग्रेस 11 सीटों पर सिमट गई थी।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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